Devdutt Padikkal News: कुकाबुरा बॉल और स्पिन पिचों पर 3-3 घंटे प्रैक्टिस, ऐसे देवदत्त पडिक्कल ने जमाया शतक
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले देवदत्त पडिक्कल ने जड़ा नाबाद 142 रन का शतक। जानिए कुकाबुरा गेंद और स्पिन ट्रैक पर की गई उनकी खास तैयारी के बारे में।
2024 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद से भारतीय टेस्ट टीम नंबर-3 के स्थान के लिए एक बल्लेबाज की तलाश कर रही है. इस दौरान साई सुदर्शन को लगातार मौके दिए गए, वहीं करुण नायर और वॉशिंगटन सुंदर को भी आजमाया गया. अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में भी साई सुदर्शन को ही तरजीह दी गई थी. हालांकि, सुदर्शन के चोटिल होकर श्रीलंका सीरीज से बाहर होने पर देवदत्त पडिक्कल के लिए भारतीय प्लेइंग इलेवन के दरवाजे खुल गए. उन्होंने प्रैक्टिस मैच में इस मौके का पूरा फायदा भी उठाया. जिसके लिए वो पिछले कुछ समय से दमकर तैयारी कर रहे थे.
देवदत्त पडिक्कल के शतक के पीछे का असली राज
पडिक्कल ने श्रीलंका क्रिकेट XI के खिलाफ तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच के दूसरे दिन 164 गेंदों पर नाबाद 142 रनों की शतकीय पारी खेली. लेकिन इस शानदार वापसी और शतकीय पारी की नींव उन्होंने कोलंबो की फ्लाइट पकड़ने से पहले ही बेंगलुरु में रख दी थी. दरअसल, श्रीलंका की स्पिन-फ्रेंडली पिचों पर महारत हासिल करने के लिए पडिक्कल ने अपने बचपन के कोच मोहम्मद नसीरुद्दीन का रुख किया था. उनका ये फैसला सही भी साबित हुआ.
दरअसल, महाराजा ट्रॉफी टी20 के बाद पडिक्कल ने तुरंत लाल गेंद से प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. श्रीलंका ए के खिलाफ 67 और 94 रन की पारियां खेलने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं थे और टेस्ट सीरीज से पहले अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे.कोच नसीरुद्दीन ने पीटीआई को बताया कि श्रीलंका दौरे की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कुछ खास कदम उठाए थे.
देवदत्त पडिक्कल का सीक्रेट प्लान
देवदत्त पडिक्कल ने सबसे पहले गेंद में बदलाव किया. दरअसल, श्रीलंका में टेस्ट मैचों में कुकाबुरा गेंदों का इस्तेमाल होता है. पडिक्कल ने खुद ये गेंदें खरीदीं और बेंगलुरु में प्रैक्टिस सेशन की शुरुआत कुकाबुरा बॉल से ही की ताकि वो गेंद की सीम और बाउंस से पूरी तरह वाकिफ हो सकें. वहीं, एशियाई पिचों पर स्पिनरों की चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने प्रैक्टिस के लिए ऐसी पिचें तैयार करवाईं जो काफी टर्न लेती थीं.
इसके साथ-साथ श्रीलंकाई स्पिनर्स का सामना करने के लिए अलग-अलग लंबाई के बाएं हाथ के स्पिनरों और ऑफ-स्पिनरों को बुलाया गया. पडिक्कल हर दिन करीब 3 घंटे तक सिर्फ स्पिन गेंदबाजों का सामना करते थे. कोच नसीर ने उनकी बल्लेबाजी तकनीक में कुछ तकनीकी सुधार भी किए, जिसका असर अभ्यास मैच में देखने को मिला. अब उनकी यह चुपचाप की गई मेहनत गॉल टेस्ट में उन्हें नंबर-3 का सबसे मजबूत दावेदार बना चुका है.

