Success Story Family Struggle: संघर्षों से भरी जीत की कहानी! पिता का साया उठने के बाद भी नहीं मानी हार, अब विश्व स्तर पर लहराया तिरंगा

जींद के सिवाहा गांव की पहलवान मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वे यह गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।
 
Jind Sivadha Wrestler Manisha

हरियाणा के जींद जिले के सिवाहा गांव की बेटी और अंतरराष्ट्रीय पहलवान मनीषा भनवाला ने खेल जगत में भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन करते हुए एक स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित प्रतिष्ठित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में मनीषा ने शानदार खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ ही वह इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली देश की पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।

🤼 रोमांचक फाइनल मुकाबले में अमेरिकी पहलवान को दी शिकस्त

59 किलोग्राम भारवर्ग के खिताबी मुकाबले में मनीषा का मुकाबला अमेरिका की मजबूत पहलवान एबिगेल नेट से हुआ।

  • शानदार तकनीक: रोमांच और संघर्ष से भरपूर इस फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अपनी बेहतरीन दांव-पेंच, गजब के धैर्य और उच्च स्तर के आत्मविश्वास का परिचय दिया।

  • अंकों का अंतर: उन्होंने अमेरिकी पहलवान को 8-6 के अंतर से परास्त करते हुए जीत हासिल की और देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराया। उनके भाई रिंकू ने इस जीत को भारतीय महिला कुश्ती के लिए मील का पत्थर बताया है।

🏅 संघर्ष से सफलता तक का सफर: जूनियर कोच के रूप में दे रही हैं सेवाएं

मनीषा वर्तमान में रोहतक में जूनियर कोच के पद पर कार्यरत हैं और नई पीढ़ी को कुश्ती के गुर सिखा रही हैं।

  • शुरुआत: उन्होंने वर्ष 2015 में खेल स्कूल निडani से कुश्ती का ककहरा सीखना शुरू किया था। अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।

  • एशियाई पदक: इससे पहले वर्ष 2022 से 2025 तक लगातार चार वर्षों तक सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था।

💪 पिता के निधन का गम और अटूट हौसला: परिवार का सपना किया साकार

मनीषा की यह सफलता जितनी शानदार है, उतनी ही उनके कड़े संघर्षों से भरी है। उनके पिता सुरेश का वर्ष 2022 में दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया था।

परिवार पर आए इस अत्यंत कठिन दौर के बावजूद मनीषा ने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपने आंसुओं को ताकत बनाकर अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ती रहीं। विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने न केवल अपने दिवंगत पिता का सपना पूरा किया है, बल्कि सिवाहा गांव, जींद जिले और पूरे हरियाणा प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। मनीषा की यह ऐतिहासिक जीत देश की हर बेटी और महिला पहलवान के लिए प्रेरणा का एक नया स्रोत बन गई है।