पानीपत की सीमा कुमारी ने कजाकिस्तान में जीता कांस्य पदक, 48 देशों के बीच लहराया तिरंगा

पानीपत की बेटी सीमा कुमारी ने कजाकिस्तान में आयोजित 10वीं एशियन सीनियर जू-जित्सु चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। जानिए उनकी इस ऐतिहासिक सफलता और प्रेरणादायक सफर की पूरी कहानी।

 
खेल समाचार हिंदी

पानीपत: पानीपत की बेटी सीमा कुमारी ने कजाकिस्तान में आयोजित 10वीं एशियन सीनियर जू-जित्सु चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया है. 48 देशों के खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए सीमा ने यह उपलब्धि हासिल की. उनके पानीपत पहुंचने पर विश्व चैंपियन फिटनेस ट्रेनर प्रवीण नांदल, राष्ट्रीय कोच संजीव तोमर तथा विभिन्न सामाजिक और खेल संगठनों ने जोरदार स्वागत किया. सीमा की सफलता को जिले के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है.

कई देशों की खिलाड़ियों को दी चुनौती: सीमा कुमारी ने बताया कि, "भारतीय दल 14 जुलाई को कजाकिस्तान के लिए रवाना हुआ था और 21 जुलाई को स्वदेश लौट आया. प्रतियोगिता के दौरान मैंने छह मुकाबले खेले और कोरिया, थाईलैंड तथा मेजबान कजाकिस्तान सहित कई देशों की खिलाड़ियों का सामना किया. शानदार प्रदर्शन करते हुए वह सेमीफाइनल तक पहुंचीं और अंततः कांस्य पदक अपने नाम करने में सफल रहीं. 48 देशों के खिलाड़ियों के बीच भारत के लिए पदक जीतना मेरे लिए गर्व का क्षण है. यह उपलब्धि मेरे कोच, परिवार और सभी सहयोगियों के निरंतर सहयोग का परिणाम है."

कोच और सहयोगियों को दिया सफलता का श्रेय: सीमा ने अपनी उपलब्धि का श्रेय राष्ट्रीय कोच संजीव तोमर और फिटनेस ट्रेनर प्रवीण नांदल को दिया. उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से दोनों कोच उनकी फिटनेस, तकनीकी प्रशिक्षण, डाइट और मानसिक तैयारी पर लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने आर्थिक सहयोग देने वाले नीरज भाटिया सहित सभी सहयोगियों का भी आभार व्यक्त किया. सीमा कुमारी ने कहा कि, "मेरी तैयारी में कोचों ने हर पहलू पर मेहनत की. उनके मार्गदर्शन और सहयोगियों के विश्वास ने मुझे लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास दिया."

चोट से वापसी कर हासिल किया बड़ा मुकाम: सीमा की यह सफलता आसान नहीं रही. विश्व चैंपियनशिप की तैयारी के दौरान उनकी कलाई का लिगामेंट और हड्डी गंभीर रूप से चोटिल हो गई थी. चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी थी, लेकिन लगातार पुनर्वास, फिटनेस प्रशिक्षण और कठिन अभ्यास के दम पर उन्होंने कुछ ही महीनों में वापसी की और एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया.

भारत में अन्य खेलों को भी मिले समान सम्मान: विश्व चैंपियन फिटनेस ट्रेनर प्रवीण नांदल ने कहा कि, "हमें सीमा से स्वर्ण पदक की उम्मीद थी, लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण वह कांस्य तक पहुंचीं. फिर भी गंभीर चोट से वापसी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना किसी स्वर्ण से कम उपलब्धि नहीं है. हमारी अकादमी का उद्देश्य अधिक से अधिक खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है. हमारी अकादमी से तैराकी, कबड्डी, कुश्ती, बॉक्सिंग सहित कई खेलों के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर चुके हैं. मेरी सरकार और समाज से क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों और खिलाड़ियों को भी समान सम्मान और प्रोत्साहन देने की अपील है. एक खिलाड़ी की सफलता के पीछे परिवार, कोच, डॉक्टर, स्पॉन्सर और पूरी टीम की वर्षों की मेहनत होती है. सभी खेलों को बराबर सम्मान और अवसर मिलना चाहिए."

आठ वर्षों की मेहनत का मिला परिणाम: वहीं, राष्ट्रीय कोच संजीव तोमर ने कहा कि, "प्रतियोगिता का स्तर बेहद कठिन था, इसलिए उसी के अनुरूप प्रशिक्षण कराया गया. सीमा रोजाना सुबह चार घंटे और शाम चार घंटे अभ्यास करती थीं. प्रतियोगिता नजदीक आने पर दोपहर में दो घंटे का अतिरिक्त प्रशिक्षण भी शामिल किया गया. पिछले आठ वर्षों की निरंतर मेहनत, तकनीकी प्रशिक्षण और अनुशासन का परिणाम आज देश के सामने है. मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता और यही संदेश हम युवाओं को देना चाहते हैं."

जानें क्या है जू-जित्सु और क्यों है खास : दरअसल,जू-जित्सु एक आधुनिक मार्शल आर्ट है जिसकी जड़ें प्राचीन युद्ध कलाओं में मानी जाती हैं. अन्य मार्शल आर्ट्स की तुलना में इसमें प्रहार और किक के बजाय ग्रैपलिंग, पकड़, थ्रो, गला घोंटने और जोड़ों पर नियंत्रण की तकनीकों पर अधिक जोर दिया जाता है. यही कारण है कि इस खेल में शारीरिक क्षमता के साथ तकनीकी कौशल और मानसिक संतुलन भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. सीमा कुमारी की उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत इरादे, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है.