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Manisha Bhanwala Gold Success Story 2026: भारत की पहली महिला कुश्ती विश्व चैंपियन मनीषा भानवाला की अनकही संघर्ष गाथा

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली मनीषा भानवाला ने माता-पिता की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनकर अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि दी। जानिए उनके संघर्ष की पूरी कहानी।

 

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जब मनीषा भानवाला ने अपने माता-पिता की तस्वीरों वाली सफेद टी-शर्ट निकालकर दर्शकों को गर्व के साथ दिखाई, तो वह सिर्फ एक ऐतिहासिक जीत का जश्न नहीं था। यह उस बेटी की ओर से अपने दिवंगत पिता को एक भावुक श्रद्धांजलि थी, जिन्होंने वर्षों तक अपनी बेटी को पहलवान बनाने का सपना अपने दिल में संजोया था।

भारत की पहली महिला कुश्ती विश्व चैंपियन मनीषा के लिए यह स्वर्ण पदक सिर्फ करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं था, बल्कि उस परिवार के संघर्ष और त्याग की पराकाष्ठा थी, जिसने हर मुश्किल परिस्थिति में हार नहीं मानी। खासतौर पर उनके पिता सुरेश का सपना, जिनका 2022 में मनीषा के एशियाई चैंपियनशिप के लिए रवाना होने वाले ही दिन अचानक निधन हो गया था।

🚜 जींद के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं मनीषा

हरियाणा के जींद की रहने वाली मनीषा एक किसान परिवार से आती हैं, जहां खेल का माहौल हमेशा से एक प्रेरणा का केंद्र रहा है।

  • खेलकूद का परिवार: उनके भाई रिंकू एक कबड्डी खिलाड़ी हैं, जबकि उनकी भाभी ममता सिहाग भी जानी-मानी पहलवान हैं।

  • शुरुआत: गांव में अपने भाई को कबड्डी खेलते देखकर ही मनीषा के मन में खेलों के प्रति रुचि पैदा हुई थी।

भाई रिंकू ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि मनीषा शारीरिक रूप से काफी मजबूत थीं और मानसिक दृढ़ता हमेशा से उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। परिवार ने शुरू में ही तय कर लिया था कि उन्हें किसी टीम गेम के बजाय व्यक्तिगत खेल में अपनी किस्मत आजमानी चाहिए।

💔 पिता के अचानक निधन और कुश्ती छोड़ने के वो काले बादल

रिंकू को वो मनहूस सुबह आज भी अच्छी तरह याद है, जब मनीषा को एशियाई चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया रवाना होना था।

  • दुखद पल: उनके पिता पिछली रात गांव के एक जागरण में शामिल हुए थे और अगली सुबह नींद में ही दिल का दौरा पड़ने से उनका आकस्मिक निधन हो गया।

  • टूटा हुआ हौसला: अपने पिता की अचानक मौत की खबर सुनकर मनीषा पूरी तरह टूट चुकी थीं। उनका घर से बाहर कदम रखने का बिल्कुल मन नहीं था और उन्होंने कुश्ती हमेशा के लिए छोड़ने का मन बना लिया था।

रिंकू ने बताया, "हमें उसे बहुत समझाना पड़ा कि अगर उसने आज हार मान ली और कुश्ती छोड़ दी, तो हमारे पिता ने उसे एक सफल पहलवान बनाने के लिए जो खून-पसीना बहाया था, वह सब बेकार चला जाएगा।" काफी मान-मनौव्वल के बाद वे उसे किसी तरह मंगोलिया की फ्लाइट में बैठाने में सफल रहे। उस प्रतियोगिता में मनीषा ने कांस्य पदक जीतकर अपने हौसले का प्रमाण दिया, जिसने आगे चलकर उन्हें विश्व शिखर तक पहुंचने की राह दिखाई।

👕 माता-पिता की तस्वीर वाली टी-शर्ट और अस्ताना में रचा गया इतिहास

कजाकिस्तान के अस्ताना रवाना होने से पहले मनीषा ने अपनी इस सबसे बड़ी प्रतियोगिता के लिए एक बेहद खास और भावनात्मक तैयारी की थी।

  • खास टी-शर्ट: उन्होंने अपनी सफेद टी-शर्ट पर अपने माता-पिता की तस्वीरें विशेष रूप से छपवाई थीं, ताकि यह अहसास हो सके कि इस महामुकाबले में उनके माता-पिता का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है।

  • ऐतिहासिक वापसी: फाइनल मुकाबले में अमेरिका की मजबूत पहलवान अबीगेल नेटे के खिलाफ 8-6 से पिछड़ने के बावजूद मनीषा ने शानदार वापसी करते हुए मैच जीत लिया।

जैसे ही उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया, उन्होंने वह टी-शर्ट निकालकर पूरी दुनिया को दिखाई। उस पल उन्होंने अपने दिवंगत पिता को उस ऐतिहासिक जीत का हिस्सा बना लिया, जिसे देखने की इच्छा उन्होंने कभी अपनी आंखों से संजोई थी। जींद के एक छोटे से गांव से लेकर भारत की पहली महिला कुश्ती विश्व चैंपियन बनने तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि अटूट संघर्ष, मजबूत इरादों और अपनों के आशीर्वाद से हर मुकाम को हासिल किया जा सकता है।