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Electric Vehicle Power Backup: पावर कट होने पर अब कार देगी बिजली! जानिए V2L और V2H टेक्नोलॉजी कैसे करती है काम

बिजली कटने पर अब आपकी इलेक्ट्रिक कार घर के उपकरण चला सकती है। जानिए क्या है V2L (Vehicle to Load) टेक्नोलॉजी, यह कैसे काम करती है और इससे क्या-क्या चलाया जा सकता है।
 

घर में बिजली गुल होते ही सबसे पहले इन्वर्टर या जनरेटर की याद आती है। लेकिन क्या हो अगर आपकी कार ही बिजली जाने पर घर के कुछ जरूरी इक्विपमेंट्स चलाने लगे? सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों में ऐसा करना पूरी तरह मुमकिन है। कुछ EV में ऐसी खास तकनीक मिलती है, जिससे कार की बैटरी में स्टोर बिजली का इस्तेमाल दूसरे इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स चलाने के लिए किया जा सकता है।

इस सुविधा की मदद से बिजली कटने पर पंखा, LED लाइट, मोबाइल चार्जर और लैपटॉप जैसे छोटे उपकरण आसानी से चलाए जा सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा सभी इलेक्ट्रिक कारों में उपलब्ध नहीं होती; इसके लिए कार में V2L (Vehicle to Load) टेक्नोलॉजी का सपोर्ट होना जरूरी है। आइए समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और इससे घर में किन चीजों को चलाया जा सकता है।

🔌 क्या है V2L यानी Vehicle to Load टेक्नोलॉजी और कैसे करती है काम?

V2L का पूरा नाम Vehicle to Load है। आसान भाषा में समझें तो इस तकनीक की मदद से इलेक्ट्रिक कार की बैटरी से बाहरी इलेक्ट्रिकल उपकरणों को पावर सप्लाई दी जा सकती है:

  • DC से AC कन्वर्टर: कार की बैटरी में बिजली DC (डायरेक्ट करंट) के रूप में जमा रहती है। V2L सिस्टम में इनबिल्ट इन्वर्टर की मदद से इसे AC (अल्टरनेटिंग करंट) में बदला जाता है, जिसका इस्तेमाल आम घरेलू उपकरणों में होता है।

  • पावर आउटलेट और अडैप्टर: इसके बाद कार में दिए गए पावर आउटलेट या कंपनी द्वारा दिए गए खास अडैप्टर के जरिए उपकरणों को जोड़ा जा सकता है। इससे पंखा, मोबाइल चार्जर, लैपटॉप और LED लाइट जैसे डिवाइस चलाए जा सकते हैं। कुछ कारों में इसके लिए अलग सॉकेट मिलता है, जबकि कुछ में एक्सटर्नल अडैप्टर का इस्तेमाल करना पड़ता है।

⏱️ कितनी देर तक चलेंगे पंखा और लाइट? समझिए पावर कंजप्शन का गणित

कार की बैटरी से उपकरण कितनी देर चलेंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बैटरी की कैपेसिटी कितनी है और खपत कितनी हो रही है:

  • खपत का उदाहरण: अगर आप 60 वॉट का एक पंखा और 10-10 वॉट की चार LED लाइट चलाते हैं, तो कुल खपत 100 वॉट होगी। यदि ये सभी उपकरण लगातार 10 घंटे तक चलते हैं, तो करीब 1 यूनिट बिजली ही खर्च होगी।

  • चार्ज का ध्यान रखना जरूरी: कार की पूरी बैटरी को घर के उपकरणों के लिए इस्तेमाल करना सही नहीं है, क्योंकि गाड़ी चलाने के लिए भी पर्याप्त चार्ज बचाकर रखना जरूरी है। इसलिए बिजली देने का समय कार के मौजूदा बैटरी लेवल और उपकरणों की खपत के हिसाब से तय करें।

⚠️ घर के हर उपकरण को नहीं दे सकते बिजली: जानिए पावर लिमिटेशंस

V2L की एक तय पावर आउटपुट लिमिट होती है:

  • पावर कैपेसिटी: अलग-अलग कार मॉडल्स में यह कैपेसिटी अलग हो सकती है। कई कारों में करीब 3.3 kW तक बिजली देने का सपोर्ट मिलता है, जबकि कुछ प्रीमियम गाड़ियां इससे ज्यादा आउटपुट दे सकती हैं।

  • कम खपत वाले उपकरण सही: पंखा, लाइट, लैपटॉप और मोबाइल चार्जर जैसे कम बिजली खपत करने वाले उपकरण चलाना पूरी तरह सुरक्षित है।

  • भारी उपकरण चलाने से बचें: AC, गीजर और माइक्रोवेव जैसे ज्यादा बिजली खींचने वाले हैवी अप्लायंसेज को जोड़ने से पहले उनकी पावर रेटिंग और कार की क्षमता जरूर जांच लें। तय सीमा से ज्यादा लोड देने पर सिस्टम ट्रिप हो सकता है।

🏠 V2H (Vehicle to Home) से कार बनेगी पूरे घर के लिए पावर बैकअप

V2L के अलावा कुछ आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों में V2H (Vehicle to Home) तकनीक भी आने लगी है:

  • डायरेक्ट होम सप्लाई: V2H में कार की बैटरी से बिजली सीधे घर के पूरे इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड तक पहुंचाई जा सकती है। इस तरह EV एक बड़े होम बैकअप जनरेटर की तरह काम करती है।

  • जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर: इसके लिए V2H सपोर्ट करने वाली इलेक्ट्रिक कार, खास बायडायरेक्शनल (Bi-directional) चार्जर और घर में विशेष इलेक्ट्रिकल सेटअप होना अनिवार्य है।

  • सलाह: ध्यान रहे कि हर EV में यह सुविधा नहीं मिलती। इसलिए कार खरीदते समय या इस तकनीक का इस्तेमाल करने से पहले वाहन निर्माता कंपनी से इसके सपोर्ट और जरूरी इंस्टॉलेशन की पूरी जानकारी लें।