Global NCAP vs Bharat NCAP: कौन सा क्रैश टेस्ट है ज्यादा भरोसेमंद? जानें अंतर
क्या Bharat NCAP के टेस्ट आसान हैं? जानें Global NCAP और Bharat NCAP के बीच बॉडी स्ट्रक्चर, स्कोरिंग और टेस्टिंग के तरीकों का असली अंतर और कौन सा है बेहतर।
पिछले कई सालों से Global NCAP की Safer Cars for India मुहिम ने भारतीय कार बाजार में सेफ्टी को लेकर सोच पूरी तरह बदल दी है. पहले लोग सिर्फ माइलेज और फीचर्स देखते थे, लेकिन अब क्रैश टेस्ट रेटिंग भी कार खरीदने का बड़ा कारण बन गई है. खासकर तब से जब कई लोकप्रिय कारों को शुरुआती टेस्ट में कम रेटिंग मिली थी और उनकी सुरक्षा पर सवाल उठे थे.
अब भारत में Bharat NCAP भी 2023 से पूरी तरह शुरू हो चुका है. ये भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत काम करता है. इसके आने से एक नया सवाल भी लोगों के मन में पैदा हुआ है कि अगर ज्यादातर कारें Bharat NCAP में 5 स्टार ले रही हैं, तो क्या इसका टेस्ट आसान है या फिर सच में भारतीय कारें ज्यादा सुरक्षित हो गई हैं? इसका जवाब पूरी तरह एक तरफ नहीं है, बल्कि इसमें कई बातें शामिल हैं.
दोनों टेस्ट में क्या समान है?
सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि Bharat NCAP ने क्रैश टेस्ट को पूरी तरह अलग तरीके से नहीं बनाया है. दोनों सिस्टम लगभग उन्हीं आधुनिक सेफ्टी नियमों को फॉलो करते हैं जो 2022 से 2025 के बीच ग्लोबली इस्तेमाल हो रहे हैं.
इन दोनों टेस्ट में आम तौर पर ये चीजें शामिल होती हैं
- 64 kmph की स्पीड पर फ्रंट ऑफसेट क्रैश टेस्ट
- 50 kmph पर साइड इम्पैक्ट टेस्ट
- 29 kmph पर पोल से टक्कर का टेस्ट
- बच्चों की सुरक्षा के लिए डमी टेस्ट
- इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल जैसी बेसिक सेफ्टी जरूरतें
इसका मतलब यह है कि असली टक्कर की गंभीरता दोनों सिस्टम में काफी हद तक एक जैसी ही रहती है.
सीट बेल्ट और स्कोरिंग में फर्क
Global NCAP में सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसे फीचर्स पर बोनस अंक दिए जाते हैं. लेकिन Bharat NCAP में आगे की सीटों के लिए सीट बेल्ट अलर्ट को जरूरी सेफ्टी फीचर माना जाता है, यानी उसे अलग से बोनस की तरह नहीं गिना जाता. ये एक बड़ा अंतर है, जो स्कोरिंग को थोड़ा अलग बना देता है.
बॉडी स्ट्रक्चर का फर्क
दोनों सिस्टम में सबसे चर्चित अंतर कार के बॉडी स्ट्रक्चर को लेकर है. Global NCAP अपने रिपोर्ट में साफ बताता है कि क्रैश के बाद कार का ढांचा Stable रहा या Unstable.
ये जानकारी बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कई बार कुछ कारें एयरबैग और सीट बेल्ट की वजह से अच्छे अंक ले लेती हैं, लेकिन उनकी बॉडी में ज्यादा नुकसान होता है.
वहीं Bharat NCAP अपनी रिपोर्ट में इस Stable/Unstable शब्द को उतना प्रमुखता से नहीं दिखाता. वो ज्यादा ध्यान कुल सुरक्षा स्कोर और चोट के आंकड़ों पर देता है. इसलिए कुछ एक्सपर्ट्स को Global NCAP की रिपोर्ट ज्यादा डिटेल वाली लगती है.
टेस्ट के लिए कार चुनने का तरीका
Global NCAP अक्सर कारें खुद डीलरशिप से खरीदकर टेस्ट करता है ताकि कोई खास मॉडल या वेरिएंट न चुना जाए.
लेकिन Bharat NCAP में कंपनियां खुद अपनी कारें टेस्ट के लिए भेजती हैं. इस वजह से आलोचना होती है कि कंपनियां ज्यादा सुरक्षित या नए मॉडल ही भेजती हैं, जबकि पुराने मॉडल शायद टेस्ट में शामिल नहीं होते.
क्या वाकई कारें ज्यादा सुरक्षित हो गई हैं?
इसका जवाब है हां भी और नहीं भी. पिछले कुछ सालों में भारत में कारों की सुरक्षा काफी बेहतर हुई है. अब कई कारों में 6 एयरबैग, ESC, मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और ISOFIX जैसे फीचर्स आम हो गए हैं. Hyundai Verna, Tata Nexon, Mahindra Scorpio N और Volkswagen Virtus जैसी कारें पहले की तुलना में काफी मजबूत और सुरक्षित मानी जाती हैं.
लेकिन साथ ही यह भी सच है कि आज जिन कारों को टेस्ट के लिए चुना जा रहा है, वे पहले से बेहतर मॉडल हैं. इसलिए ज्यादा 5-स्टार रेटिंग दिखना भी इसका एक कारण है.
कौन सा टेस्ट ज्यादा भरोसेमंद है?
दोनों ही टेस्ट सिस्टम विश्व स्तर के सेफ्टी मानकों पर आधारित हैं और भरोसेमंद माने जाते हैं. अगर किसी कार को Global NCAP या Bharat NCAP में अच्छा स्कोर मिलता है, तो वह आम तौर पर सुरक्षित मानी जा सकती है.