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Two-Wheeler Sales in India: भारत के टू-व्हीलर बाजार में ग्रामीण इलाकों का जलवा, कुल रजिस्ट्रेशन में 55% हिस्सेदारी के साथ गांवों का दबदबा

भारत के टू-व्हीलर बाजार में ग्रामीण क्षेत्रों की 55% हिस्सेदारी। मोटरसाइकिलों और ईवी की मांग पर नई रिपोर्ट।
 

भारत में टू-व्हीलर खरीदने का ट्रेंड लगातार मजबूत बना हुआ है, और इस बाजार में ग्रामीण इलाकों की भूमिका सबसे अहम साबित हो रही है. कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के दौरान देश में हुए कुल टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी अकेले 55 फीसदी दर्ज की गई. जाटो डायनेमिक्स (Jato Dynamics) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अवधि में शहरी इलाकों से 32% और मेट्रो शहरों से 13% रजिस्ट्रेशन हुए. इन आंकड़ों से साफ है कि ग्रामीण भारत में मोटरसाइकिल, स्कूटर और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है.

🛣️ 2. ग्रामीण बाजारों में कम्यूटर मोटरसाइकिलों का जलवा, 100-125cc सेगमेंट की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

ग्रामीण इलाकों में ग्राहकों की पहली पसंद आज भी मोटरसाइकिलें ही हैं. जनवरी से जून 2026 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों के कुल टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में अकेले मोटरसाइकिलों की हिस्सेदारी 68.3 फीसदी रही. इसमें भी 100cc से 125cc के बीच आने वाली एंट्री-लेवल और कम्यूटर मोटरसाइकिलों ने करीब 75% हिस्सेदारी हासिल की है. इसकी मुख्य वजह यह है कि इस कैटेगरी की बाइक्स माइलेज, कम कीमत और रोजाना के इस्तेमाल के लिहाज से ग्रामीण ग्राहकों की जरूरतों पर पूरी तरह खरी उतरती हैं. इसके अलावा, ग्रामीण टू-व्हीलर बाजार में स्कूटरों की हिस्सेदारी भी करीब 24 फीसदी तक दर्ज की गई है.

⚡ 3. धीरे-धीरे बढ़ रही है ग्रामीण इलाकों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की रफ्तार, टीवीएस और बजाज का दबदबा

भले ही ग्रामीण भारत में 94 फीसदी टू-व्हीलर रजिस्ट्रेशन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों के रहे हों और इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 5.9% तक सीमित हो, लेकिन गांवों में भी अब ईवी की पैठ धीरे-धीरे मजबूत हो रही है. ग्रामीण इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो ने मिलकर 56 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की है. इसके अलावा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में 100-110cc कम्यूटर बाइक्स का दबदबा सबसे आगे रहा है. कुल मिलाकर, 2026 की पहली छमाही में ग्रामीण बाजारों ने यह साबित कर दिया है कि देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की रीढ़ आज भी गांव ही हैं.