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Iran-Israel War: युद्ध रोकने के लिए साथ आए फ्रांस और चीन; विदेश मंत्रियों की फोन पर बातचीत, शांति के लिए बनाया 'पॉलिटिकल प्लान'

मिडिल ईस्ट में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी जंग को रुकवाने के लिए फ्रांस और चीन ने हाथ मिलाया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट और चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हुई बातचीत में सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक समाधान और कूटनीति पर जोर दिया गया। जानें पूरी रिपोर्ट।

 

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच छिड़ी जंग थमती नजर नहीं आ रही है. इस जंग से मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरान भी लगातार पलटवार कर रहा है. दुनिया के तमाम देशों की नजरें इस जंग टिकी हुई हैं. इस बीच युद्ध रुकवाने के लिए दो ताकतवर देश सामने आए आए हैं. ये हैं फ्रांस को चीन.


फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट (Jean-Noel Barrot) ने सोमवार को अपने चीनी समकक्ष वांग यी (Wang Yi)के साथ ई फोन पर बातचीत की. इस बातचीत का मकसद ईरान से जुड़ा युद्ध और क्षेत्र में बढ़ता तनाव था. इस दौरान दोनों नेता तनाव कम करने के लिए काम करने पर सहमत हुए.


समाधान राजनीतिक तरीके से निकालने पर जोर


फ्रांस के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने हालात को शांत करने और तनाव कम करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई. बयान में कहा गया कि दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि समस्या का समाधान राजनीतिक तरीके से निकाला जाना चाहिए. ऐसा समाधान होना चाहिए जो सामूहिक सुरक्षा की गारंटी दे और ईरान की जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं का भी सम्मान करे. मंत्रियों का मानना है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही स्थायी शांति लाई जा सकती है.

ईरान की आलोचना


बयान में कहा गया है कि क्षेत्र में जो तनाव बढ़ रहा है, उसकी जिम्मेदारी ईरानी शासन पर है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने बिना किसी उचित कारण के क्षेत्र के कई देशों पर हमला किया है, जिससे स्थिति और खराब हुई है. इसके साथ ही उन्होंने ईरान की आलोचना करते हुए कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन नहीं कर रहा है. ये प्रस्ताव ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल गतिविधियों और गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को समर्थन देने से जुड़े हैं.

‘फ्रांस किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं’


फ्रांसीसी मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है और उसे इन कार्रवाइयों की पहले से कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने आगे कहा कि देशों को अपने विवाद सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर ही बल का प्रयोग करना चाहिए. अंत में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने इस मुद्दे पर संवाद जारी रखने और शांति की दिशा में प्रयास करते रहने पर सहमति जताई.