India Bangladesh Relations: बांग्लादेश की नई सरकार ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों की शुरू की समीक्षा, दिल्ली ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार भारत से बातचीत के अलावा अन्य व्यापारिक मुद्दों को लेकर तैयारी कर रहा है. लेकिन इससे पहले रहमान सरकार ने भारत के साथ हुए 101 द्विपक्षीय समझौतों और सहमति पत्रों (MoUs) की समीक्षा शुरू कर दी है. उधर, दिल्ली ने भी ढाका के बदले रुख पर अपना साफ संदेश साफ कर दिया है. केंद्र सरकार का कहना है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.
दरअसल, यह समीक्षा सिर्फ कागजी प्रक्रिया नहीं है. इसके दायरे में भारत-बांग्लादेश के बीच बंदरगाह, संपर्क, व्यापार, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े समझौते शामिल हैं. खास तौर पर चटगांव और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से जुड़ी व्यवस्थाएं अहम हैं. इन बंदरगाहों के जरिए भारत को बांग्लादेश के रास्ते अपने पूर्वोत्तर राज्यों तक माल पहुंचाने का वैकल्पिक रास्ता मिलता है.
बांग्लादेश की तरफ से साफ कहा गया है कि भारत के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखना जरूरी है, लेकिन राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर रहेगा. यानी नई सरकार पिछली अवामी लीग सरकार के दौरान भारत के साथ बनाए गए सहयोग के पूरे ढांचे को अब नए सिरे से परख रही है.
क्या है 101 समझौते?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में भारत के साथ हुए 101 द्विपक्षीय समझौते हुए थे. मौजूदा तारिक रहमान सरकार ने इन्हीं समझौतों की समीक्षा शुरू की है. हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने साफ किया है कि इन समझौतों को पूरी तरह से रद्द करने की कोई योजना नहीं है. सरकार का कहना है कि इस समीक्षा का मकसद समझौतों में मौजूद कमियों और विसंगतियों की पहचान करके उन्हें दूर करना है, ताकि उन्हें और ज्यादा असरदार बनाया जा सके और बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप किया जा सके.
समझौतों में बांग्लादेश के हितों की समीक्षा
ढाका का कहना है कि इन समझौतों को बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित की कसौटी पर परखा जाएगा. जिन समझौतों में बांग्लादेश के हितों के खिलाफ प्रावधान या विसंगतियां मिलेंगी, उनमें बदलाव किया जा सकता है. बांग्लादेश के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने चटगांव बंदरगाह से जुड़ी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने भारत के साथ हुए कुछ समझौतों को बांग्लादेश के हितों के नजरिए से देखने की जरूरत बताई है. भारत से मिली ऋण सहायता से बनी परियोजनाओं और उनकी शर्तों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.
भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में इन समझौतों की अहमियत इसलिए ज्यादा है क्योंकि पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच रेल, सड़क, जलमार्ग, बंदरगाह, व्यापार और ऊर्जा का व्यापक संपर्क तंत्र विकसित हुआ है. बांग्लादेश के रास्ते भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक संपर्क बढ़ाने में भी इन व्यवस्थाओं की अहम भूमिका है.
भारत सरकार का कड़ा रुख
अब इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार ने भी अपना रुख साफ कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत को 101 समझौतों की समीक्षा के संबंध में बांग्लादेश की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. भारत ने मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया है, लेकिन ढाका की ओर से औपचारिक सूचना अभी नहीं मिली है.साथ ही भारत सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अगर इस प्रक्रिया में भारत के हित प्रभावित होते हैं तो भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा.
यानी एक तरफ ढाका पिछली सरकार के दौर में भारत के साथ बने समझौतों को खोलकर देख रहा है, तो दूसरी तरफ दिल्ली ने भी साफ कर दिया है कि भारत के हितों से जुड़े किसी भी फैसले को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में बदलाव की जमीन तैयार
101 समझौतों की समीक्षा अब भारत-बांग्लादेश रिश्तों में बदलाव की जमीन तैयार कर रही है. जिस दौर में दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग का विस्तार हुआ था, अब उसी व्यवस्था की शर्तों पर ढाका सवाल उठा रहा है. बंदरगाह से लेकर संपर्क और ऊर्जा से लेकर बुनियादी ढांचे तक, इन समझौतों पर होने वाली समीक्षा यह तय करेगी कि बांग्लादेश भारत के साथ बनी साझेदारी को किस दिशा में ले जाता है.