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अली खामेनेई की अंतिम यात्रा: ईरान में बड़े स्तर पर सुरक्षा और तैयारी

ईरान में अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के लिए भारी तैयारियां। संभावित भीड़ और भगदड़ को देखते हुए विशेष आपातकालीन इंतजाम, हजारों कब्रें तैयार। जानें पूरी अपडेट।

 

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. जर्मनी के अखबार डाई वेल्ट (Die Welt) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने आशंका जताई है कि अंतिम विदाई के दौरान भारी भीड़, गर्मी और भगदड़ जैसी घटनाओं के कारण 1,500 से 3,000 लोगों की मौत हो सकती है. इसी संभावना को देखते हुए सरकार ने पहले से ही आपातकालीन इंतजाम शुरू कर दिए हैं.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के रेड क्रिसेंट और नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट ऑर्गनाईजेशन ने एक गोपनीय पत्र में उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ को संभावित खतरे की जानकारी दी है. ईरानी सरकार का दावा है कि सिर्फ तेहरान में ही अंतिम यात्रा में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं. इसे देखते हुए तेहरान प्रशासन ने मृतकों और लापता लोगों के लिए अलग विशेष यूनिट बनाई है. राजधानी के बेहेश्त-ए-जहरा कब्रिस्तान में हजारों नई कब्रें भी पहले से तैयार कर दी गई हैं.

9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द ए खाक किए जाएंगे

अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हवाई हमले में मौत हुई थी. उन्हें 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द ए खाक किया जाएगा. इससे पहले एक हफ्ते तक उनका पार्थिव शरीर तेहरान, कोम और इराक के नजफ़ और करबला जैसे शिया धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों से होकर ले जाया जाएगा. 6 जुलाई तक उनका पार्थिव शरीर तेहरान के ग्रैंड प्रेयर हॉल में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तेहरान में 24 घंटे मुफ्त मेट्रो और बस सर्विस चलाई जाएगी. हजारों बसें तैनात की गई हैं. स्कूलों और मस्जिदों को बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने की व्यवस्था के लिए तैयार किया गया है. शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कुछ इलाकों में आवाजाही तथा हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है. बताया गया है कि केवल तेहरान में तीन दिन के कार्यक्रम पर लगभग 1.7 करोड़ डॉलर खर्च होने का अनुमान है.

पहले भी जनाजे के दौरान हादसे हो चुके

ईरान इस बार अतिरिक्त सतर्क इसलिए भी है क्योंकि पहले भी बड़े जनाजों में हादसे हो चुके हैं. 2020 में आईआरजीसी कमांडर कासिम सुलेमानी के जनाजे में भगदड़ से 56 लोगों की मौत और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. वहीं 1989 में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक आयतुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे में कम से कम 8 लोगों की मौत और 11 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार को सिर्फ भीड़ से नहीं, बल्कि आंतरिक राजनीतिक तनाव से भी चिंता है. कुछ कट्टरपंथी गुट अमेरिका के साथ हुए हालिया शांति समझौते का विरोध कर रहे हैं. ऐसे में अंतिम विदाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती.