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US-Iran Peace Talks: स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता, क्या सुलझेंगे बड़े मुद्दे?

अमेरिका-ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता का पहला दौर शुरू। जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधि शामिल। परमाणु ठिकानों और मानवीय राहत पर क्या होगा फैसला?

 

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड में होने जा रहा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बातचीत में हिस्सा लेने के लिए पहुंच चुके हैं. यह वार्ता पिछले हफ्ते हुए अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते के बाद हो रही है. इस समझौते में दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर स्थायी समाधान खोजने के लिए बातचीत का समय दिया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि पहले दौर की बातचीत में ईरान संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षकों को अपने परमाणु ठिकानों का दौरा करने की अनुमति दे. इन ठिकानों का आखिरी निरीक्षण जून 2025 में हुआ था. इसके बदले अमेरिका ईरान को उसकी जमी हुई रकम का कुछ हिस्सा देने को तैयार है. शुरुआत कतर में फंसे 6 अरब डॉलर से हो सकती है. इस पैसे का इस्तेमाल खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य मानवीय जरूरतों के लिए किया जाएगा.

वार्ता में कौन-कौन शामिल हो रहा?

स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में होने वाली इस वार्ता में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अरागची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती शामिल होंगे. वहीं पाकिस्तान भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी वहां पहुंचे हैं.

जेडी वेंस ने कहा है कि उनका मकसद बातचीत के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इजराइल-लेबनान संघर्ष जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता निकलेगा.

नेतन्याहू को लेकर खुफिया एजेंसियों की चेतावनी

हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस शांति प्रक्रिया में रुकावट पैदा कर सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण वह लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखना चाहते हैं. इससे अमेरिका-ईरान वार्ता प्रभावित हो सकती है.

इस बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 60 दिन की बातचीत के दौरान वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर शांति समझौता सफल नहीं हुआ, तो भविष्य में अमेरिका शुल्क लगा सकता है.