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JSSC JPSC Case in High Court: हजारों अभ्यर्थियों को राहत, झारखंड सरकार के फैसले पर स्टे जारी; 18 सितंबर को अगली सुनवाई

झारखंड हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक बरकरार रखी। सरकार को 48 घंटे में जवाब देने का निर्देश।
 

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद में हजारों अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है. झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से रद्द की गई विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं पर पहले लगाई गई रोक को बरकरार रखा है. जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में मंगलवार को JSSC-CGL, 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, CDPO समेत अन्य परीक्षाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इन परीक्षाओं के जरिए चयनित होकर सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को चुनौती दी थी. कोर्ट ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी.

सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर स्टे जारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा. कोर्ट ने मामले को अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए ज्यादा समय देने से इनकार कर दिया. अदालत ने सरकार को 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

22 प्रतियोगी परीक्षाएं की गई थीं रद्द

दरअसल, JPSC और JSSC की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में करीब 26 दिनों तक आंदोलन चला था. इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 17 अगस्त को बड़ा फैसला लिया गया था.

सरकार ने 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं को स्थगित करने और 17 परीक्षाओं की CID जांच कराने का निर्णय लिया था. 18 अगस्त को संबंधित विभाग ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी थी.

चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया

सरकार के फैसले से JSSC-CGL, 11वीं से 13वीं JPSC, CDPO, Food Safety Officer समेत कई परीक्षाओं से चयनित अभ्यर्थी प्रभावित हुए. नौकरी कर रहे इन अभ्यर्थियों ने अपने भविष्य को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की. 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी थी. मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने इस रोक को बरकरार रखा. अब 18 सितंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा.