JPSC Preliminary Exam 2025-26 Supreme Court: JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंची PIL
जेपीएससी (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। परीक्षा रद्द करने, सीबीआई जांच और नए सुरक्षा मानकों की मांग।
रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. याचिका में मांग की गई है कि JPSC को निर्देश दिया जाए कि वे 19 अप्रैल, 2026 को आयोजित ‘संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025’ को रद्द करें और उसके बाद कोर्ट द्वारा मंजूर किए गए सुरक्षा उपायों के तहत एक नई प्रारंभिक परीक्षा आयोजित करें.
याचिका में मांग की गई है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया जाए कि वह उक्त परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समय-सीमा के भीतर जांच करे.
परीक्षा की निष्पक्षता और शुचिता की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए. इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज या झारखंड राज्य के बाहर के किसी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या जज करें. समिति को फोरेंसिक विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों का सहयोग प्राप्त हो.
JPSC प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि 2 जुलाई 2026 को JPSC प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद सवाल उठे हैं. इस बीच, एक सफल अभ्यर्थी की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल हो गई. इसके बाद आरोप लगा कि अभ्यर्थी को पहले पेपर में 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए थे, लेकिन इसके बावजूद उसे सफल घोषित किया गया.
याचिका में JPSC के एक आधिकारिक नोटिस का हवाला देते हुए CID जांच जारी होने की बात कही गई थी. इसके साथ ही सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 के दौरान पेपर-I और पेपर-II की OMR कार्बन कॉपी जमा करने को कहा गया था.
परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी
इस बीच, परीक्षा विवाद को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है. शुक्रवार की रात को छात्रों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी, लेकिन बैठक का कोई समाधान नहीं निकला है.
छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती है, उनका आंदोलन जारी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनशन का भी जिक्र करते हुए परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की गयी है. इसके साथ ही 19 अप्रैल, 2026 की JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और फिर से परीक्षा आयोजित करने की भी मांग की गयी है.
याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई परीक्षा कोर्ट की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ हो. इसके अलावा कोडिंग, मूल्यांकन, OMR स्कैनिंग और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र ऑडिट कराई जाए.