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NMC Update: अब MBBS पूरा करने के लिए मिलेंगे 10 साल; एनएमसी ने जारी किया नया ड्राफ्ट

एनएमसी (NMC) का बड़ा फैसला: एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने की समय सीमा 9 से बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव। जानें फर्स्ट ईयर एग्जाम और इंटर्नशिप से जुड़े नए नियम।

 

नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी (NMC) ने एमबीबीएस की पढ़ाई की अवधि को बढ़ाकर 10 साल करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि पहले यह अवधि 9 साल थी. ‘ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस (अमेंडमेंट) 2023’ में इस अवधि को 9 साल कर दिया गया था. हालांकि उससे पहले एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के लिए एडमिशन की तारीख से 10 साल तक का ही समय मिलता था. अब 10 साल वाला जो नया नियम लागू होने वाला है, उसमें 4.5 साल के एकेडमिक कोर्स के साथ-साथ 1 साल की अनिवार्य ‘रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप’ भी शामिल है.

आयोग ने स्पष्ट किया है कि फर्स्ट प्रोफेशनल एमबीबीएस एग्जामिनेशन से संबंधित नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. मौजूदा नियमों के अनुसार, छात्रों को फर्स्ट ईयर एमबीबीएस परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार प्रयास करने की अनुमति मिलती रहेगी.

छात्रों, मेडिकल कॉलेजों से मांगे सुझाव

एनएमसी ने जो आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है, उसमें कहा गया है कि इस नए नियम को सक्षम प्राधिकारी द्वारा अप्रूव कर दिया गया है. हालांकि आयोग ने छात्रों, मेडिकल कॉलेजों, फैकल्टी मेंबर्स और अन्य हितधारकों से उनके सुझाव मांगे हैं और कहा है कि वो इस नए नियम पर अपनी आपत्ति भी दर्ज करा सकते हैं. इसके लिए उन्हें 30 दिन का समय दिया गया है. जब ये अवधि पूरी हो जाएगी, उसके बाद एनएमसी को मिले सुझाव और आपत्ति के आधार पर नए नियम पर विचार किया जाएगा. आयोग ने स्पष्ट किया है कि समीक्षा प्रक्रिया के दौरान सिर्फ निर्धारित ईमेल के माध्यम से ही प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार किया जाएगा.

डॉक्टर बनने में कितने साल लगते हैं?

एमबीबीएस में एडमिशन की शुरुआत NEET UG परीक्षा से होती है, जिसमें पास होने वाले छात्रों को देशभर के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने का मौका मिलता है. एमबीबीएस का कोर्स वैसे तो 5.5 साल का होता है, लेकिन उसमें पढ़ाई सिर्फ 4.5 साल की ही होती है और बाकी बचे एक साल में छात्रों को इंटर्नशिप करने का मौका मिलता है. हालांकि कई छात्र ऐसे भी होते हैं, जो 5.5 साल में एमबीबीएस कंप्लीट नहीं कर पाते, उन्हें पास होने में सालों लग जाते हैं.

अगर किसी कारणवश किसी छात्र का सेमेस्टर पूरा नहीं हो पाता, तो उसे दोबारा एग्जाम देने का मौका मिलता है. हालांकि फर्स्ट ईयर में पास होने के लिए छात्रों को सिर्फ 4 ही मौके मिलते हैं, जिसमें उन्हें पास होना जरूरी होता है.