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UPSC Success Story: झज्जर की बेटी प्रख्या ने रचा इतिहास; 584वीं रैंक से असंतुष्ट होकर छोड़ी नौकरी, अब 265वीं रैंक पाकर बनीं अफसर

झज्जर के बादली की प्रख्या ने यूपीएससी परीक्षा में देशभर में 265वीं रैंक हासिल की है। पिछले साल 584वीं रैंक मिलने के बाद भी उन्होंने जॉइन नहीं किया और बेहतर रैंक के लिए 14 घंटे पढ़ाई कर अपना सपना पूरा किया। जानें संघर्ष और सफलता की यह अनूठी कहानी।

 

झज्जर : झज्जर जिले के बादली क्षेत्र की बेटी प्रख्या ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में देशभर में 265वां रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। प्रख्या ने पांचवें प्रयास में यह सफलता प्राप्त कर प्रशासनिक अधिकारी बनने के अपने सपने को साकार किया। जैसे ही शुक्रवार को यूपीएससी परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। परिवार और पूरे बादली क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया और लोगों ने प्रख्या की इस उपलब्धि पर गर्व जताया। 

सफलता के बाद प्रख्या ने कहा कि मेहनत और धैर्य ही किसी भी बड़े लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता होता है। उन्होंने विशेष रूप से अभिभावकों को संदेश देते हुए कहा कि बेटियों को भी खुला आसमान देना चाहिए, ताकि वे अपनी प्रतिभा के दम पर परिवार और देश का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत की और हर असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ती रहीं। 

प्रख्या की इस उपलब्धि पर उनके पिता रामवीर, माता सुशीला और दादा जिले सिंह ने खुशी जाहिर की। परिवार का कहना है कि बेटी ने पूरे गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है और जब वह गांव आएंगी तो उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा। प्रख्या के पति दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं और उन्होंने भी इस सफर में पूरा सहयोग दिया। प्रख्या ने बताया कि अप्रैल 2024 में घोषित यूपीएससी परिणाम में उन्हें 584वां रैंक मिला था, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं थीं। बेहतर रैंक पाने के लिए उन्होंने प्रशासनिक सेवा ज्वाइन नहीं की और फिर से तैयारी शुरू कर दी। पहले जहां वह करीब 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। 

वहीं बाद में अपनी पढ़ाई का समय बढ़ाकर 12 से 14 घंटे तक कर दिया। इसी लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने इस बार 265वां रैंक हासिल किया। प्रख्या का कहना है कि उनका सपना शुरू से ही प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना था। वह चाहती हैं कि उन्हें होम कैडर मिले, लेकिन जो भी कैडर मिलेगा। उसमें पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम कर देश और समाज की सेवा करेंगी।