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The 50 Winner: शिव ठाकरे ने रचा इतिहास, रजत दलाल को पछाड़ जीती 'द 50' की ट्रॉफी!

रोडीज से 'द 50' के विजेता तक शिव ठाकरे का सफर! जानें कैसे अमरावती के 'शिव भाऊ' ने रजत दलाल को हराकर जीती ट्रॉफी और किसान फैन के साथ बांटे 50 लाख रुपये।

 

शिव ठाकरे ने कलर्स टीवी और जियो हॉटस्टार के रियलिटी शो ‘द 50’ की ट्रॉफी अपने नाम की है. कहते हैं कि सपने वो नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते. महाराष्ट्र के अमरावती गांव का एक लड़का, जो कभी दूध के पैकेट बेचता था और अखबार बांटता था, आज भारत के सबसे बड़े रियलिटी शोज का ‘पोस्टर बॉय’ बन चुका है. शिव ठाकरे, ये सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि उन करोड़ों युवाओं के लिए एक ‘ब्रांड’ और ‘उम्मीद’ बन चुका है जो छोटे शहरों से आंखों में बड़े सपने लेकर निकलते हैं.

शिव ठाकरे का जन्म 9 सितंबर 1989 को अमरावती में हुआ. एक बेहद साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे शिव के पास शुरुआत में न तो कोई ‘गॉडफादर’ था और न ही कोई फिल्मी बैकग्राउंड. उनके पिता की एक छोटी सी पान की दुकान थी. परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए शिव ने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था. लेकिन उनके भीतर एक कलाकार और एक जिद्दी खिलाड़ी हमेशा से जिंदा था. डांस और कोरियोग्राफी के अपने शौक को उन्होंने अपनी ताकत बनाया और यहीं से शुरू हुआ उनके ‘किंग’ बनने का सफर.

रोडीज से मिली पहली पहचान

शिव की पहली बड़ी छलांग ‘एमटीवी रोडीज राइजिंग’ (2017) में देखने को मिली. रणविजय सिंह के गैंग में रहकर शिव ने अपनी जांबाजी और ईमानदारी से सबका दिल जीत लिया. हालांकि वो शो नहीं जीत सके और सेमीफाइनल में बाहर हो गए, लेकिन उन्होंने ये साबित कर दिया कि वो लंबी रेस के घोड़े हैं.

बिग बॉस मराठी में दिखाया कमाल

साल 2019 शिव ठाकरे की जिंदगी का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ. ‘बिग बॉस मराठी सीजन 2’ में शिव एक कंटेस्टेंट बनकर पहुंचे. घर के अंदर उनकी सादगी, टास्क जीतने का जुनून और दोस्तों के प्रति उनकी वफादारी ने महाराष्ट्र के हर घर में उन्हें ‘शिव’ से ‘शिव भाऊ’ (भाई) बना दिया. उन्होंने न सिर्फ वो सीजन जीता, बल्कि ये भी दिखा दिया कि गेम दिमाग से नहीं, दिल से जीता जाता है.

हारकर भी जीतने वाला ‘बाजीगर’

जब शिव ठाकरे ने नेशनल लेवल पर ‘बिग बॉस 16’ में कदम रखा, तब मुकाबला कड़ा था. साजिद खान, अब्दु रोजिक और एमसी स्टेन जैसे बड़े नामों के बीच शिव अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे. वो शो के रनर-अप रहे, लेकिन ‘विजेता’ का टैग न मिलने के बावजूद उन्होंने जनता का दिल जीत लिया. इसके बाद ‘खतरों के खिलाड़ी सीजन 13’ में रोहित शेट्टी के खतरनाक स्टंट्स के बीच शिव ने अपनी फिजिकल और मेन्टल ताकत का लोहा मनवाया.

‘द 50’ की जीत: परफॉर्मेंस का नया बेंचमार्क

साल 2026 में कलर्स टीवी और जियो हॉटस्टार के नए शो ‘द 50’ ने शिव ठाकरे के करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है. ये शो बाकी शोज से अलग था क्योंकि यहां ‘वोट बैंक’ नहीं बल्कि ‘मैदान की जंग’ मायने रखती थी.

  • रणनीति: शिव ने दिखाया कि वो सिर्फ एक अच्छे खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक मास्टरमाइंड भी हैं. फिनाले में रजत दलाल जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी को रणनीति से बाहर करना उनके तेज दिमाग का प्रमाण था.
  • रफ्तार: टाइमिंग वाले टास्क में शिव ने अपनी पुरानी ‘रोडीज’ वाली एनर्जी दिखाई और सबसे कम समय में टास्क पूरा कर ‘द 50’ के पहले विजेता बने.

जमीन से जुड़ी शख्सियत

शिव ठाकरे की सबसे बड़ी खूबी उनकी ‘जमीन से जुड़ी शख्सियत’ है. ‘द 50’ जीतने के बाद उन्होंने अपनी जीत को खुद तक सीमित नहीं रखा, उनकी ये खुशी उन्हें एक फैन के साथ बांटने का मौका मिला. गेम के फॉर्मैट के मताबिक अपने एक फैन, जो मराठवाड़ा का किसान है (सीताराम प्रह्लाद आघाव), को भी शिव के साथ 50 लाख रुपये मिले.

क्या है शिव ठाकरे की ‘सक्सेस रेसिपी’?

शिव ठाकरे जो हैं, वही पर्दे पर दिखते हैं. बनावटीपन से वो कोसों दूर. जब बात किसी खेल या टास्क की आती है, तो शिव अपना 200% देते हैं. प्रिंस नरूला द्वारा उन्हें अपना ‘फिनाले टिकट’ देना इस बात का सबूत है कि इंडस्ट्री के दिग्गज भी शिव की काबिलियत और उनके व्यवहार का सम्मान करते हैं. यही बातें आम शिव को खास बना देती हैं.

इतिहास हमेशा उन्हीं को याद रखता है जो पहले पायदान पर अपना नाम दर्ज कराते हैं. जिस तरह राहुल रॉय और अभिजीत सावंत ने अपने दौर के पहले शोज जीतकर एक मिसाल कायम की थी, आज ‘द 50’ जीतकर शिव ठाकरे उस ‘लीग ऑफ एक्स्ट्राऑर्डिनरी विनर्स’ में शामिल हो गए हैं. उनकी ये जीत यह भी बताती है कि असल विजेता वही है जो शिखर पर पहुंचकर अपनी जड़ों को नहीं भूलता. शिव ने अपनी ये ट्रॉफी उनकी मां और उन्हें ट्रॉफी तक पहुंचाने वाले उनके भाई जैसे मेंटॉर प्रिंस नरूला को समर्पित की है.