AI Selfie With Daughter: जिनके घर बेटी नहीं, AI ने पूरा किया उनका सपना; सुनील जागलान की नई पहल
सुनील जागलान ने शुरू किया ‘AI सेल्फी विद डॉटर’ अभियान। जिनके पास बेटी नहीं है, वे AI तकनीक से अपनी बेटी का रूप रचकर ले रहे सेल्फी। 2000 से अधिक लोगों ने किया अपलोड।
अभियान का उद्देश्य स्पष्ट है – कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सदुपयोग से बेटी की अनुपस्थिति में भी उसके एहसास को जीवंत करना। जिन परिवारों में केवल पुत्र हैं, वे एआई के विभिन्न ऐप के माध्यम से अपनी इच्छित बेटी का रूप रच रहे हैं, उसके साथ एआई सेल्फी विद डॉटर ले रहे हैं, नाम दे रहे हैं और अपनी भावनाएं साझा कर रहे हैं। कई माता-पिता ने सुनील जागलान को फोन कर आंसू भरकर शुक्रिया अदा किया। एक माता-पिता ने बताया, “जब हम उस एआई बेटी को सेल्फी विद डॉटर में देख रहे थे तो काफी समय तक नजरें हटा नहीं पाए। यह अनुभव जीवन बदलने वाला है।” कई परिवारों ने घोषणा की है कि वे अब बेटी गोद लेने की योजना बना रहे हैं।
सुनील जागलान ने इसे “एआई का सबसे बेहतरीन और मानवीय इमोशनल प्रयोग” बताया। उन्होंने कहा, “2015 में बीबीपुर गांव से शुरू हुए ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान ने दुनिया को बेटी के महत्व का संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई बार इसकी सराहना की। यह भारत का पहला ग्लोबल कैंपेन बना, जिसमें देश-विदेश के सेलिब्रिटी शामिल हुए। अब एआई सेल्फी विद डॉटर उस भावना को और गहरा बना रहा है। जिनके पास बेटी नहीं, वे भी इस अनुभूति से गुजर सकें।”
अभियान की एक खास श्रेणी ‘गुमशुदा बेटियों’ के लिए भी शुरू की गई है, जिसमें एआई सेल्फी विद डॉटर की मदद से लापता बेटियों की तलाश और जागरूकता का मिशन चलाया जाएगा। जागलान ने घोषणा की कि आगामी ‘सेल्फी विद डॉटर दिवस’ पर ‘एआई सेल्फी विद डॉटर’ के अवार्ड दिया जाएगा।
यह अभियान केवल सेल्फी नहीं, बल्कि बहुत बड़ा सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। यह साबित करता है कि तकनीक अगर सही मकसद से इस्तेमाल हो तो कितनी मानवीय हो सकती है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को एआई सेल्फी विद डॉटर ने फिर से नई ऊंचाई दी है। देशभर के माता-पिता इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।