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1857 Freedom Struggle Memorial: 68 मीटर ऊंचा कमल मेमोरियल टॉवर और 6 घंटे की ऐतिहासिक यात्रा; जानिए अंबाला शहीद स्मारक की 10 बड़ी खासियतें

अंबाला में 800 करोड़ की लागत से बने 1857 की क्रांति के शहीद स्मारक का 5 नवंबर को गृह मंत्री अमित शाह उद्घाटन करेंगे। ऊर्जा मंत्री अनिल विज से जानिए इस स्मारक का पूरा इतिहास।
 

हरियाणा के अंबाला छावनी में 1857 की पहली स्वाधीनता संग्राम की अमर गाथा को संजोने के लिए लगभग ₹800 करोड़ की लागत से निर्मित देश के सबसे भव्य राष्ट्रीय शहीद स्मारक का आगामी 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भव्य उद्घाटन करेंगे। इस ऐतिहासिक स्मारक का निर्माण हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज के लगभग तीन दशक लंबे संघर्ष, शोध और अटूट संकल्प का प्रतिफल है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री अनिल विज से शहीद स्मारक के ऐतिहासिक महत्व, इसकी वास्तुकला और उनके व्यक्तिगत अनुभवों पर विशेष बातचीत की गई:

❓ प्रश्न 1: अंबाला में बनने जा रहा यह शहीद स्मारक देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस परिकल्पना के पीछे आपकी मूल सोच क्या थी?
💬 उत्तर (अनिल विज):

यह केवल एक इमारत या संरचना खड़ा करने का विषय नहीं था, बल्कि देश के उन अनगिनत गुमनाम वीर शहीदों को उनका खोया हुआ सम्मान दिलाने का पवित्र संकल्प था, जिन्हें इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं दिया गया। हमें लंबे समय तक यही पढ़ाया गया कि आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी, जबकि कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। उससे बहुत पहले 1857 में देशभर में अंग्रेजों के खिलाफ पहला सशस्त्र संग्राम हो चुका था।

अंबाला छावनी में मेरठ से भी पहले आजादी का बिगुल बजा था। मेरे मन में यह कसक हमेशा रही कि जिन वीरों ने हँसते-हँसते फांसी के फंदों को चूमा, उन्हें याद करने के लिए कोई समर्पित राष्ट्रीय स्मारक तक नहीं है। इसी सोच के साथ मैंने इस 30 साल लंबी लड़ाई को आगे बढ़ाया।

❓ प्रश्न 2: आप दावा करते हैं कि 1857 की क्रांति मेरठ से 10 घंटे पहले अंबाला में शुरू हुई थी, इसके ऐतिहासिक प्रमाण क्या हैं?
💬 उत्तर (अनिल विज):

हमारे पास तत्कालीन ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के लिखित रिकॉर्ड, 1923-24 के गजेटियर और ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं। 10 मई, 1857 को सुबह 9 बजे अंबाला छावनी में 60वीं और 5वीं नेटिव इन्फेंटरी के भारतीय सैनिकों ने विद्रोह का बिगुल बजा दिया था, जबकि मेरठ में विद्रोह शाम को शुरू हुआ।

दुर्भाग्य से इस तथ्य को इतिहास में दबाया गया। हमारे वीरों को अंग्रेजों ने पेड़ों से बांधकर गोलियां मारीं, कोल्हू में पीसकर मार डाला। देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाला हर योद्धा हमारे लिए नमन के योग्य है, चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से रहा हो।

❓ प्रश्न 3: 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उद्घाटन करने आ रहे हैं, इस ऐतिहासिक दिन को आप किस रूप में देखते हैं?
💬 उत्तर (अनिल विज):

यह मेरे लिए अत्यंत भावुक, संतोषजनक और गौरव का क्षण है। देश के गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला पहुंचकर पहले शहीद स्मारक का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इसके पश्चात पास ही स्थित गांधी ग्राउंड में एक विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी। यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के महान शहीदों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने का राष्ट्रीय अवसर है।

❓ प्रश्न 4: ₹800 करोड़ की लागत से बने इस स्मारक में ऐसा क्या खास है जो इसे देश भर में सबसे अलग बनाता है?
💬 उत्तर (अनिल विज):

यह एक अत्याधुनिक और डिजिटल राष्ट्रीय स्मारक है। इसमें न केवल अंबाला या हरियाणा, बल्कि पंजाब, बिहार और देश के अन्य हिस्सों में हुए 1857 के संग्राम की गाथाओं को भी जीवंत किया गया है।

  • डिजिटल और आधुनिक तकनीक: यहाँ ओपन एयर थिएटर, डिजिटल गैलरी और लाइट-लेजर-साउंड शो की व्यवस्था है।

  • हेलीपैड सुविधा: अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटकों और गणमान्य अतिथियों के लिए यहाँ विशेष हेलीपैड भी बनाया गया है। इसे देखने में किसी भी दर्शक को कम से कम 6 घंटे का समय लगेगा।

🌺 68 मीटर ऊंचा कमल टॉवर: वास्तुकला नहीं, 1857 की क्रांति के प्रतीक का सम्मान
📜 कमल के फूल और रोटी के माध्यम से भेजा जाता था क्रांति का गुप्त संदेश

स्मारक में निर्मित 68 मीटर ऊंचे कमल के आकार के मेमोरियल टॉवर पर पूछे गए सवाल के जवाब में अनिल विज ने स्पष्ट किया:

  • क्रांति का ऐतिहासिक प्रतीक: 1857 के संग्राम में कमल का फूल और रोटी सैन्य रेजीमेंटों के बीच क्रांति के संदेश और सहमति का गुप्त प्रतीक हुआ करते थे। एक रेजीमेंट द्वारा रोटी स्वीकार करने का अर्थ होता था कि वे भी अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध में शामिल हैं।

  • आधुनिक आकर्षण: इस 68 मीटर ऊंचे टॉवर में दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं और कमल की पंखुड़ियों के भीतर एक भव्य संग्रहालय स्थापित किया गया है।

🎓 6 नवंबर से आम जनता और विद्यार्थियों के लिए खुलेगा स्मारक; अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में होगी पहचान
📽️ 2500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर और वाटर-स्क्रीन लेजर शो

अनिल विज ने बताया कि 6 नवंबर से स्मारक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा:

  • विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक दौरा: राज्य सरकार ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को इस स्मारक का दौरा कराया जाए, ताकि वे इतिहास को परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने के लिए सीखें।

  • वैश्विक पहचान: यह स्मारक अंबाला को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करेगा। जो विदेशी पर्यटक भारत में ताजमहल देखने आते हैं, वे अंबाला के इस ऐतिहासिक शहीद स्मारक को देखने भी जरूर पहुँचेंगे।