Haryana Minister Anil Vij News: प्रवासी समाज की आस्था का सम्मान, अंबाला में स्थायी छठ घाट बनने से हर साल की अस्थायी व्यवस्था से मिलेगी मुक्ति
चंडीगढ़ : धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी आस्था एवं प्रतिबद्धता के लिए पहचाने जाने वाले हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अंबाला कैंट के प्रवासी समाज की धार्मिक भावनाओं को सम्मान देते हुए छठ पूजा घाट के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये उपलब्ध कराने की पहल की है। विज ने यह भी भरोसा दिलाया है कि निर्माण कार्य में यदि अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता पड़ती है तो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी।
अंबाला कैंट में बड़ी संख्या में बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़े परिवार निवास करते हैं। छठ पूजा के दौरान इन परिवारों के लिए स्थायी घाट की सुविधा उपलब्ध नहीं थी और श्रद्धालुओं को हर वर्ष टेंट लगाकर अस्थायी घाट तैयार करना पड़ता था। अब स्थायी घाट बनने से श्रद्धालुओं को छठ पर्व के अवसर पर व्यवस्थित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध हो सकेगा।
धर्म और आस्था को सुविधा से जोड़ने की पहल
अनिल विज की इस पहल को उनकी धर्म एवं आस्था के प्रति गहरी प्रतिबद्धता और समाज की धार्मिक भावनाओं के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा पर्व है। ऐसे में स्थायी घाट की सुविधा उपलब्ध कराने से प्रवासी समाज को अपनी धार्मिक परंपरा के निर्वहन के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।
विज की ओर से निर्माण के लिए 50 लाख रुपये उपलब्ध कराने के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राशि देने का आश्वासन इस बात को दर्शाता है कि छठ पूजा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन के लिए आधारभूत सुविधा विकसित करने को प्राथमिकता दी जा रही है।
छठ पूजा में घाट का विशेष धार्मिक महत्व
छठ पूजा में घाट का विशेष महत्व होता है। व्रती जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं। इसलिए जलस्रोत के किनारे स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित घाट इस पर्व की पूजा-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
स्थायी घाट बनने के बाद यहां छठ पूजा के दौरान प्रकाश, स्वच्छता, सुरक्षित आवागमन और श्रद्धालुओं की सुविधा जैसी व्यवस्थाओं को भी बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकेगा। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की समृद्ध परंपरा
छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से मनाई जाती है। रोजगार, व्यापार और अन्य कारणों से देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों में बसे इन क्षेत्रों के प्रवासी भी छठ पर्व को अपनी सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर मनाते हैं।
भोजपुरी, मैथिली और मगही भाषी समाज में छठ पूजा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। दूसरे राज्यों में इन समुदायों की आबादी बढ़ने के साथ छठ पूजा के आयोजन भी बड़े स्तर पर होने लगे हैं।
हर वर्ष की अस्थायी व्यवस्था से मिलेगी मुक्ति
अंबाला कैंट में अब तक श्रद्धालु छठ पूजा के लिए अस्थायी घाट तैयार करते थे। टेंट लगाकर बनाए जाने वाले इन घाटों में हर वर्ष स्थान, मौसम और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार व्यवस्थाएं करनी पड़ती थीं। स्थायी घाट बनने से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
50 लाख रुपये की राशि से बनने वाला घाट श्रद्धालुओं को एक निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने के साथ-साथ छठ पूजा के आयोजन को भी अधिक व्यवस्थित स्वरूप देगा। निर्माण में अतिरिक्त धनराशि की जरूरत होने पर उसे उपलब्ध कराने के विज के आश्वासन से परियोजना को आवश्यकतानुसार विस्तार देने का रास्ता भी खुला है।
प्रवासी समाज की आस्था को मिला सम्मान
स्थायी छठ पूजा घाट की पहल को लेकर अंबाला कैंट के प्रवासी समाज में संतोष है। समाज के लोगों का कहना है कि इससे उन्हें हर वर्ष अस्थायी घाट तैयार करने की परेशानी से राहत मिलेगी और छठ पूजा के लिए स्थायी धार्मिक स्थल उपलब्ध होगा।
अनिल विज की पहल अंबाला कैंट में विभिन्न राज्यों से आकर बसे लोगों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक जरूरतों के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है। स्थायी छठ घाट बनने से आने वाले वर्षों में श्रद्धालु अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण में सूर्योपासना एवं छठ पर्व की परंपरा को आगे बढ़ा सकेंगे।