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अंबाला: एशिया का सबसे बड़ा 'शहीद स्मारक' बनकर तैयार, जल्द होगा लोकार्पण

अंबाला में 700 करोड़ की लागत से बना एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक लोकार्पण के लिए तैयार। 1857 की क्रांति का जीवंत अनुभव, जानें इस ऐतिहासिक धरोहर की खासियत।

 

चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अंबाला छावनी में निर्माणाधीन “आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक” अब राष्ट्र को समर्पित होने की दहलीज पर खड़ा है। बुधवार देर शाम सी एम यहां पहुंचे और स्मारक का विस्तृत अवलोकन किया। इस दौरे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही इस भव्य स्मारक का लोकार्पण कर सकते हैं। करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला यह स्मारक न केवल देश बल्कि एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक माना जा रहा है। इसके निर्माण पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। स्मारक का उद्देश्य 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास और वीर क्रांतिकारियों के बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री को अनिल विज ने कराई स्मारक की विस्तृत सैर

अवलोकन के दौरान मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को स्मारक की विभिन्न गैलरियों, संग्रहालयों और प्रदर्शनों की जानकारी दी। दोनों नेताओं ने 1857 की क्रांति से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, अंग्रेजी शासनकाल के टेलीग्राम, ऐतिहासिक चित्रण और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्षों को दर्शाने वाली आधुनिक प्रस्तुतियों को देखा। मुख्यमंत्री ने स्मारक में प्रदर्शित ऐतिहासिक सामग्री की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और बलिदान की अमर गाथा को जीवंत रखने वाला केंद्र बनेगा।

अनिल विज के तीन दशक पुराने संकल्प का साकार रूप

इस परियोजना को ऊर्जा मंत्री अनिल विज का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। पिछले लगभग 30 वर्षों से विज इस स्मारक के निर्माण के लिए लगातार प्रयासरत रहे हैं। उनके अथक प्रयासों और दृढ़ संकल्प के कारण आज यह परियोजना अंतिम चरण तक पहुंच सकी है। विज ने मुख्यमंत्री को बताया कि स्मारक में ऐसे ऐतिहासिक प्रमाण सुरक्षित किए गए हैं जो दर्शाते हैं कि 10 मई 1857 को अंबाला छावनी में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी भड़क चुकी थी। यहां संरक्षित दस्तावेज और टेलीग्राम उस दौर की घटनाओं के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।

1857 की क्रांति का जीवंत अनुभव देगा स्मारक

स्मारक में 22 अत्याधुनिक गैलरियां बनाई गई हैं, जहां 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, वीर क्रांतिकारियों और विभिन्न युद्धों का डिजिटल और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से जीवंत चित्रण किया गया है। यहां आगंतुकों को क्रांति की घटनाओं, सैनिकों के संघर्ष, युद्ध सामग्री और दुर्लभ दस्तावेजों को बेहद प्रभावशाली तरीके से देखने का अवसर मिलेगा। आधुनिक तकनीक के उपयोग से इतिहास को रोचक और समझने योग्य बनाया गया है।

6 से 8 घंटे में पूरा होता है स्मारक का अवलोकन

स्मारक की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे परिसर का अवलोकन करने में लगभग छह से आठ घंटे का समय लगता है। यहां रोटी, कमल और पेड़ों की छाल के माध्यम से गुप्त संदेशों के आदान-प्रदान जैसी रोचक ऐतिहासिक जानकारियां भी प्रदर्शित की गई हैं। देशभर से एकत्रित पवित्र मिट्टी, 1857 कालीन टेलीग्राम, दुर्लभ हथियार और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी स्मारक का प्रमुख आकर्षण होंगी।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा स्मारक परिसर

स्मारक में दो मंजिला संग्रहालय, विशाल इंटरप्रीटेशन सेंटर, 2500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर, ऑडिटोरियम, ई-लाइब्रेरी, प्रदर्शनी हॉल, फूड कोर्ट और शोध केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। संग्रहालय में बनाई जा रही शहीदी वॉल पर लगभग 700 वीर शहीदों के नाम अंकित किए जा रहे हैं। वहीं डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

150 फुट ऊंचा मेमोरियल टॉवर बनेगा पहचान

स्मारक परिसर का सबसे आकर्षक हिस्सा लगभग 150 फुट ऊंचा मेमोरियल टॉवर होगा। इसमें हाई-स्पीड लिफ्ट, आर्ट गैलरी और विशेष प्रकाश व्यवस्था की सुविधा होगी। रात के समय इसकी भव्य रोशनी दूर-दूर तक दिखाई देगी। इसके अलावा वॉटर स्क्रीन, फव्वारे, कनेक्टिंग ब्रिज और लाइट एंड साउंड शो स्मारक को विश्वस्तरीय पहचान देंगे।

पर्यटन और शोध का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा स्मारक

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्मारक भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन, इतिहास अध्ययन और शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां देशभर के विद्यार्थी, शोधार्थी और पर्यटक पहुंचकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास को करीब से जान सकेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मंत्री अनिल विज ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि यह स्मारक नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, त्याग और समर्पण की भावना को मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित लोकार्पण के साथ अंबाला की यह ऐतिहासिक धरोहर राष्ट्रीय गौरव का नया प्रतीक बनने जा रही है।