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Animal Husbandry Department Bhiwani: लंपी बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क, गोवंश को बचाने के लिए उठाए जा रहे कड़े कदम

भिवानी में लंपी बीमारी से बचाव के लिए पशुपालन विभाग सतर्क। हालुवास रोड नंदीशाला में सभी पशुओं का टीकाकरण पूरा, एक भी केस नहीं।
 

भिवानी। लंपी बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। बुधवार को हालुवास रोड स्थित नंदीशाला के निरीक्षण में सभी पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण पूरा मिला और अब तक लंपी का एक भी मामला सामने नहीं आया।

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत और उपमंडलाधिकारी डॉ. राजेश जाखड़ के दिशा-निर्देशों पर पशु चिकित्सक डॉ. विजय सनसनवाल ने नंदीशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और साफ-सफाई की व्यवस्था की सराहना की। नंदियों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक चारा दिए जाने की भी जानकारी मिली।

डॉ. सनसनवाल ने कहा कि बेहतर पोषण से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। लंपी जैसी संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग सतर्क है और जिलेभर में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने गोशाला संचालकों और पशुपालकों से परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने, पशुओं के लिए पौष्टिक चारे की व्यवस्था करने और समय पर टीकाकरण करवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए पशुपालकों की सतर्कता और समय पर चिकित्सकीय मदद जरूरी है।

लंपी के लक्षण दिखें तो तुरंत पशु को करें अलग
डॉ. सनसनवाल के अनुसार, लंपी त्वचा रोग पशुओं, विशेषकर गायों में तेजी से फैलने वाली संक्रामक वायरल बीमारी है। इसकी शुरुआत तेज बुखार, दूध उत्पादन में अचानक गिरावट, आंखों और नाक से गाढ़ा पानी आने तथा भूख कम होने से हो सकती है। गर्दन, सिर, थन और जननांगों के आसपास दो से पांच सेंटीमीटर की सख्त व दर्दनाक गांठें बनना और पैरों में सूजन के कारण लंगड़ापन इसके प्रमुख लक्षण हैं।

बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ पशुओं का समय पर गोट पॉक्स या एलएसडी टीकाकरण करवाने की सलाह दी गई है। लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पशु को 14 से 21 दिनों तक अलग रखें। मच्छर, मक्खी और चीचड़ पर नियंत्रण के लिए नीम के पानी का प्रयोग करने के साथ बाड़े का सैनिटाइजेशन करें। लक्षण नजर आने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

बाहरी पशुओं का प्रवेश रोका
नंदीशाला के प्रबंधक अमित बंसल ने बताया कि लंपी के प्रकोप की आहट मिलते ही प्रबंधन ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए थे। बीमारी का प्रकोप बढ़ने के बाद बाहर से आने वाले नए पशुओं के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग के सहयोग से नंदीशाला के सभी नंदियों का समय रहते टीकाकरण पूरा करा लिया गया था। अमित बंसल के अनुसार इन सुरक्षा उपायों के चलते नंदीशाला में लंपी का एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है और सभी पशु स्वस्थ हैं।