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Manisha Death Mystery: मनीषा के पिता को फंसाने की साजिश का आरोप, किसान नेता सुरेश कोथ बोले- पुलिस ने बचाए असली आरोपी

भिवानी के मनीषा मौत मामले में AIIMS की तीसरी रिपोर्ट में हत्या की ओर इशारा। 18 घंटे का रहस्य बरकरार, किसान संगठनों ने सीबीआई जांच पर उठाए सवाल।
 

भिवानी: बहुचर्चित मनीषा मौत मामले में शव मिलने से ठीक पहले के 18 घंटों का रहस्य आज भी पूरी तरह बरकरार है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली की तीसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की आशंका को पूरी तरह खारिज करते हुए हत्या की ओर इशारा किया गया है, जिसके बाद अब पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बीच, बुधवार को भिवानी के सिटी स्टेशन स्थित स्वामी धर्मशाला में विभिन्न किसान संगठनों और बैरागी समाज की एक अहम महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें मृतका मनीषा के पिता संजय भी शामिल हुए।

❓ शव मिलने से पहले के 18 घंटे कहां थी मनीषा? रोहतक और दिल्ली की रिपोर्ट में विरोधाभास

जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • अनसुलझा सवाल: महापंचायत में वक्ताओं ने सवाल उठाया कि मनीषा की मौत से ठीक पहले के 18 घंटे वह कहां और किसके साथ थी, इसका जवाब आज तक पुलिस या जांच एजेंसियां नहीं दे पाई हैं।

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट का फेरबदल: भिवानी के शुरुआती पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि हुई थी, लेकिन इसके बावजूद परिजनों की मांग या अनुमति के बिना पुलिस ने रोहतक पीजीआई में शव का दोबारा पोस्टमार्टम करवा दिया था।

  • एम्स का बड़ा खुलासा: अब एम्स दिल्ली में हुए तीसरे पोस्टमार्टम में आत्महत्या के एंगल को खारिज कर दिया गया है। पुलिस और सीबीआई इस मामले को जहरीला पदार्थ खाने से हुई मौत बता रही हैं, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

🚨 "लोहारू पुलिस असल आरोपियों को बचाने और पिता संजय को फंसाने में जुटी थी" – सुरेश कोथ

किसान नेता के तीखे आरोप:

  • पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: किसान नेता सुरेश कोथ ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि लोहारू पुलिस मामले के असली दोषियों को बचाने के लिए मनीषा के पिता संजय और उसके भाई को ही झूठे मामलों में उलझाने का प्रयास कर रही थी। उन्होंने कहा कि यदि उस समय स्थानीय पुलिस की चलती, तो आज संजय जेल के अंदर होता।

  • आंदोलन की चेतावनी: सुरेश कोथ ने उत्तर प्रदेश के एक अन्य मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जब तक जनता सड़क पर नहीं उतरती, तब तक न्याय मिलना मुश्किल होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा प्रदेश और छत्तीस बिरादरी पीड़ित पिता संजय के साथ है। यदि जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो मनीषा को न्याय दिलाने के लिए दोबारा बड़े स्तर पर सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।