भिवानी मेडिकल कॉलेज में बदहाली: 2 महीने से थायराइड किट खत्म, प्रशिक्षुओं के भरोसे मरीजों की जांच; बढ़ रहा संक्रमण का खतरा
भिवानी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ के बीच स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं। लैब तकनीशियन की कमी के कारण प्रशिक्षु ले रहे हैं ब्लड सैंपल, वहीं थायराइड किट न होने से गरीब मरीज निजी लैब में महंगे दाम पर जांच कराने को मजबूर हैं।
भिवानी। मौसम में बदलाव के बीच मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की बढ़ती भीड़ के बीच लैब तकनीशियन की कमी और थायराइड जांच किट खत्म होने से व्यवस्थाएं चरमराई नजर आ रही हैं। प्रतिदिन औसतन 1500 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि खून जांच केंद्र पर करीब 500 सैंपल लिए जा रहे हैं। ऐसे में सैंपल कलेक्शन केंद्र पर प्रशिक्षु बिना लैब तकनीशियन की मौजूदगी के मरीजों के सैंपल ले रहे हैं। वहीं थायराइड जांच किट खत्म होने के कारण पिछले दो माह से यह जांच बंद पड़ी है।
बुधवार को संवाददाता ने मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग का निरीक्षण किया। इस दौरान सैंपल कलेक्शन केंद्र पर मरीजों की भीड़ लगी मिली। यहां पर लैब तकनीशियन की अनुपस्थिति में प्रशिक्षु ही मरीजों के खून के सैंपल ले रहे थे। सैंपल लेते समय प्रशिक्षु ग्लव्ज या किसी सुरक्षा किट का उपयोग नहीं कर रहे थे जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। सैंपल लेने से लेकर रिपोर्ट वितरण और पंजीकरण तक का कार्य भी प्रशिक्षुओं द्वारा किया जा रहा था।
करीब दो घंटे तक कुछ मरीज लैब तकनीशियन का इंतजार करते रहे लेकिन कोई प्रशिक्षित कर्मचारी वहां नहीं पहुंचा। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल में लैब तकनीशियन की कमी है। इस कारण कुछ तकनीशियनों को मेडिकल कॉलेज स्थित अन्य प्रयोगशालाओं में नियुक्त किया गया है। फिलहाल खून जांच केंद्र पर लगभग 15 से 20 प्रशिक्षु कार्यरत हैं। प्रशिक्षु सैंपल लेने में अधिक समय लगा रहे हैं जिससे कलेक्शन सेंटर पर मरीजों की भीड़ बढ़ जाती है।
थायराइड जांच करवाने के लिए अस्पताल आई हूं। लेकिन बताया जा रहा है कि यहां पर थायराइड जांच नहीं होती। इस कारण अब बाहर निजी प्रयोगशाला से थायराइड की जांच करवानी पड़ेगी। लोग सस्ता इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। लेकिन यहां तो खून जांच तक की सुविधा प्रभावित है।
बच्चे का पिछले तीन-चार दिन से बुखार ठीक नहीं हो रहा। इसलिए चिकित्सक को दिखाने के लिए लेकर आया हूं। अब दो से तीन जांच के लिए लैब में बच्चे का सैंपल दिलवाने के लिए आया हूं। लेकिन यहां प्रशिक्षु बच्चे का सैंपल ले रहे हैं। दो से तीन बार तो सूई लगाकर सैंपल लिया गया। बच्चों के सैंपल लेने के लिए तो किसी प्रशिक्षित कर्मचारी की ड्यूटी लगानी चाहिए।
मेरी पत्नी का यहां इलाज चल रहा है। चिकित्सक ने थायराइड जांच के लिए कहा है। लेकिन यहां जांच का प्रबंध ही नहीं है। अब बाहर से करवानी पड़ेगी। बाहर 300 से 350 रुपये में थायराइड की जांच की जा रही है। गरीब आदमी सस्ते इलाज की उम्मीद के साथ यहां आता है, लेकिन यहां थायराइड जांच व दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
खून जांच केंद्र पर थायराइड किट खत्म है। इसके लिए उच्च अधिकारियों को मांग भेज दी गई है। जल्दी ही समस्या का समाधान करवा दिया जाएगा। इसके बाद मरीजों की थायराइड जांच पहले की तरह नियमित शुरू हो जाएगी। इसके अलावा लैब तकनीशियन की मौजूदगी में ही मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं। प्रशिक्षुओं को सिखाने के उद्देश्य से सैंपल दिलवाए जा रहे हैं।