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भिवानी: स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले PWD का 'जुगाड़', सिर्फ बोर्ड लगाकर बना दिया C&D प्लांट!

भिवानी में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 से पहले नगर परिषद की लापरवाही। बिना प्रोसेसिंग सिस्टम दादरी रोड पर बनाया डमी सीएंडडी प्लांट। 15% अंकों के नुकसान का खतरा बरकरार।

 

भिवानी। सीएंडडी (भवन निर्माण एवं तोड़फोड़ मलबा निस्तारण) प्लांट नहीं होने से पिछले 10 सालों से करीब 15 प्रतिशत अंकों का नुकसान झेल रहे नगर परिषद ने इस बार प्लांट के नाम पर सिर्फ बोर्ड लगाकर खानापूर्ति कर दी है जिससे स्वच्छ सर्वेक्षण में जिले के पिछड़ने का खतरा फिर बढ़ गया है।

कमाल की बात यह है कि जिस स्थान पर पहले ही शहर के कचरे के लिए जगह कम पड़ रही है उसी दादरी रोड स्थित डंपिंग प्वाइंट पर सीएंडडी वेस्ट प्लांट का एस्टीमेट तैयार कर भेज दिया गया। अब देखना होगा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए इसी सप्ताह आने वाली टीम इस प्लांट को अंक देती है या फिर नगर परिषद अधिकारियों से यह सवाल पूछे जाते हैं कि प्लांट में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण का मलबा क्यों नहीं है। पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में जिले को देशभर में 258वां और प्रदेश में 29वां स्थान मिला था। इस बार जिले की रैंकिंग में कितना सुधार होगा यह भी देखने वाली बात होगी।

उल्लेखनीय है कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत निगमायुक्त से जिले में सीएंडडी प्लांट की स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई है लेकिन जमीनी हकीकत सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रही है। नगर परिषद द्वारा हाल ही में दादरी रोड स्थित कचरा डंपिंग प्वाइंट पर खाली पड़ी जगह में सीएंडडी प्लांट बनाया गया है लेकिन यहां निर्माण एवं तोड़फोड़ कचरे के ध्वस्तीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे प्लांट की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यही कारण है कि हर साल जिले को स्वच्छता रैंकिंग में करीब 15 प्रतिशत अंकों का नुकसान उठाना पड़ता है और इस बार भी टॉप रैंक हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा है।

दरअसल, स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 के लिए इस बार 12,500 अंकों का पैमाना तय किया गया है जिसमें सफाई व्यवस्था, ओडीएफ सहित कई मानक निर्धारित किए गए हैं। इनमें सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट एक अहम फैक्टर बन चुका है। पिछली बार भी शहर की रैंकिंग इसी वजह से प्रभावित हुई थी क्योंकि निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरे के निष्पादन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में लोगों को मजबूरी में खाली प्लॉट, गड्ढों और अस्थायी स्थानों पर मलबा डालना पड़ता था।

इस बार नगर परिषद ने स्वच्छता सर्वेक्षण टीम के आने से पहले आनन-फानन में दादरी रोड पर गीले व सूखे कचरे के लिए बने डंपिंग प्वाइंट में ही खाली जगह पर सीएंडडी प्लांट बना दिया लेकिन यहां कचरे के ध्वस्तीकरण से लेकर निर्धारित मानकों तक की कोई व्यवस्था नहीं है।

नगर परिषद के पास नहीं है कोई प्रोसेसिंग सिस्टम

नगर परिषद के पास फिलहाल स्थानीय स्तर पर सीएंडडी कचरे का ढेर लगाने के अलावा डंपिंग, रीयूज या किसी प्रकार का संगठित प्रोसेसिंग सिस्टम नहीं है। शहरवासियों को भी यह जानकारी नहीं है कि दादरी रोड पर सीएंडडी प्लांट बनाया गया है। यही वजह है कि लोग मकान मरम्मत या निर्माण से निकलने वाला मलबा सड़कों या खाली सरकारी जमीनों पर डाल रहे हैं। ऐसे में आधे-अधूरे प्रयासों से स्वच्छता सर्वेक्षण में सुधार संभव नहीं दिखता।

स्वच्छता सर्वेक्षण में सुधार के लिए ये बिंदु हैं अनिवार्य

केंद्र सरकार वर्ष 2016 से देशभर में स्वच्छ सर्वेक्षण करवा रही है। इसके तहत सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) में गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग निष्पादन, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और सीएंडडी प्लांट का संचालन अनिवार्य है। इन्हीं मानकों के आधार पर रैंकिंग तय होती है। इन बुनियादी मानकों को पूरा नहीं कर पाने के कारण नगर परिषद पिछले दस वर्षों में रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार नहीं कर पाया है। हालांकि डंपिंग प्वाइंट पर गीले और सूखे कचरे का निष्पादन किया जा रहा है।

लोहारू व बवानीखेड़ा में भी नहीं है सीएंडडी प्लांट

स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 के लिए केंद्रीय टीम प्रदेश में पहुंच चुकी है और इसी सप्ताह भिवानी आने की संभावना है। जिले के भिवानी शहर के अलावा लोहारू और बवानीखेड़ा नगर पालिका में भी सीएंडडी प्लांट नहीं है जिससे जिले की शहरी स्वच्छता रैंकिंग प्रभावित हो सकती है।

नगर परिषद द्वारा दादरी रोड स्थित कचरे के डंपिंग प्वाइंट में सीएंडडी प्लांट बनाया गया है। जल्द ही सीएंडडी प्लांट में ध्वस्तीकरण सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए एस्टीमेट बनाकर मुख्यालय भेजा जाएगा। जिसके बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।