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Bhiwani Medical College Reality: न न्यूरोलॉजिस्ट न कार्डियोलॉजिस्ट; भिवानी मेडिकल कॉलेज में दवा संकट, रोहतक पीजीआई हो रहे रेफर

भिवानी मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टरों और मुफ्त दवाओं की कमी से मरीज परेशान हैं। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।
 

भिवानी। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज शुरू हुए करीब एक साल बीत चुका है लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और दवाओं की अनुपलब्धता से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी और पेट रोग विशेषज्ञों के अभाव में गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना पड़ रहा है।

वहीं सामान्य दवाएं नहीं मिलने से मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। मेडिकल कॉलेज शुरू होने के समय उम्मीद थी कि गंभीर बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा और मरीजों को रोहतक पीजीआई या दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद स्वीकृत चिकित्सकों के अधिकांश पद खाली पड़े हैं। नागरिक अस्पताल के आपात विभाग में दुर्घटना में घायल और अन्य गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआई रेफर किए जाने की बात सामने आ रही है।

रोजाना ओपीडी में दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों से सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण उन्हें घंटों कतार में इंतजार करना पड़ता है। कई बार मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के बिना ही लौटना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज ओपीडी प्रभारी डॉ. राजेश ने बताया कि नए चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया और दवाओं की आपूर्ति सुचारू करने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। विभाग की ओर से सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फिलहाल मरीजों को उपचार दिया जा रहा है और जल्द ही उन्हें और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

सामान्य दवाओं की भी कमी
अस्पताल में निशुल्क दवा योजना के तहत मिलने वाली कई सामान्य दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इनमें दर्द निवारक जेल, खांसी की दवा और एंटीबायोटिक के साथ त्वचा व मनोरोग चिकित्सकों की ओर से लिखी जाने वाली दवाएं भी शामिल हैं। दवाएं नहीं मिलने से गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवा खरीदनी पड़ रही है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बन गया है।

मरीजों और परिजनों का दर्द
अस्पताल में अपने बुजुर्ग पिता का इलाज कराने पहुंचे राममेहर ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से कतार में खड़े थे। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज बनने से बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद थी लेकिन दो घंटे इंतजार करने के बाद डॉक्टर ने जो दवाएं लिखीं उनमें से एक भी अस्पताल की खिड़की से नहीं मिली। महिला मरीज संगीता ने बताया कि डॉक्टर ने तीन दवाएं लिखीं लेकिन इनमें से दो अस्पताल में नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।