Bhiwani News Waste Management Crisis: भिवानी शहर में कूड़े से फैली बदबू और संक्रमण, नगर परिषद और निजी कंपनी पर उठे सवाल
भिवानी। शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के 14 दिन बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं। पिछले दो सप्ताह से सड़कों और कूड़ा प्वाइंटों पर जमा कचरा सड़ रहा है। तेज गर्मी और उमस के बीच कूड़े पर मक्खी-मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे आसपास रहने वाले लोगों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
कूड़ा उठान नहीं होने से जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं और बदबू के साथ आबोहवा भी प्रभावित हो रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि हड़ताल के दौरान वैकल्पिक सफाई व्यवस्था तो दूर कूड़ा जमा होने वाले स्थानों पर संक्रमणरोधी दवा का छिड़काव तक नहीं कराया जा रहा है। भिवानी शहर के 31 वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा उठान और ठोस कचरा निस्तारण की व्यवस्था के लिए नगर परिषद ने श्रीश्याम वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी को दादरी रोड पर ठोस कचरा निस्तारण प्लांट स्थापित करने के लिए 25 साल की लीज पर जगह दी हुई है।
प्लांट तक कचरा पहुंचाने के लिए कंपनी के अपने कर्मचारी और संसाधन हैं। नगर परिषद के सफाई कर्मचारी मैनुअल तरीके से शहर के मुख्य रास्तों और वार्डों में झाड़ू लगाने के बाद कचरा निर्धारित प्वाइंटों पर डालते हैं। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की सामान्य सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि डोर-टू-डोर कचरा उठान और ठोस कचरा निस्तारण का काम निजी कंपनी के जिम्मे होने के कारण उसके काम पर हड़ताल का सीधा असर नहीं होना चाहिए था। इसके बावजूद कंपनी ने भी कचरा उठान का काम बंद कर दिया है। इससे शहर में कूड़े के ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
नगर परिषद और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नियमों के अनुसार नगर परिषद की ठेका एजेंसी के कर्मचारी किसी भी तरह की हड़ताल में शामिल नहीं हो सकते। कंपनी के तीन दिन से अधिक समय तक कूड़ा उठान का काम रोकने पर उसकी लीज समाप्त किए जाने का प्रावधान भी है। इसके बावजूद 14 दिन से कूड़ा उठान बंद है और प्रशासन की ओर से अब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। कूड़े के ढेरों पर संक्रमणरोधी दवा का छिड़काव भी नहीं हुआ है। इससे मक्खी-मच्छरों के पनपने और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
शहरवासी बोले: वैकल्पिक व्यवस्था कराए प्रशासन
कर्मचारी नेताओं को अपनी मांगों को लेकर संबंधित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार नेताओं के घरों व कार्यालयों के सामने धरना-प्रदर्शन करना चाहिए ताकि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान हो सके। आम जनता को आंदोलन का माध्यम बनाना उचित नहीं है। सफाई व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन को हड़ताल के दौरान वैकल्पिक सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
शहर कूड़े से सड़ रहा है लेकिन अधिकारी वातानुकूलित कार्यालयों में आराम से बैठे हैं। कूड़े की वजह से शहरवासियों की सेहत पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। बच्चे और बुजुर्ग घरों से बाहर तक नहीं निकल पाते हैं क्योंकि कूड़े से उठ रही बदबू परेशानी बढ़ा रही है। प्रशासन को हड़ताल लंबी चलने की स्थिति में जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि आम जनता को परेशानी न झेलनी पड़े।
शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने का जिम्मा नगर परिषद का है मगर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ चुके हैं। शहर को भी अपने हाल पर सड़ने के लिए छोड़ दिया गया है। हड़ताल में कर्मचारी भले ही अपने जायज हकों के लिए लड़ रहे हों मगर शहरवासी अपनी सेहत पर बड़ा जोखिम झेल रहे हैं। इसका निदान करना संबंधित अधिकारियों का प्रथम दायित्व है मगर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
शहर में कूड़ा उठान का काम निजी कंपनी को दिया हुआ है। कंपनी अपना काम नहीं कर पा रही है तो उस पर कार्रवाई करनी चाहिए। शहर में सफाई न हो तो किसी तरह काम चल सकता है मगर कूड़ा उठान नहीं होने से पूरा शहर सड़ रहा है। इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की बनती है।
नमी और कूड़े से संक्रमण तेजी से फैलता है : डॉ. यतिन गुप्ता
इस समय मौसम में अत्यधिक नमी बनी हुई है। कूड़े की वजह से आसपास के माहौल में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। अगर कूड़ा लंबे समय तक निस्तारित नहीं होता तो उसमें घातक परजीवी बढ़ने लगते हैं। ये हवा के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर बीमारियां पैदा कर सकते हैं। बचाव के लिए मुंह पर कपड़ा ढककर रखें और लगातार स्वच्छ पानी से मुंह और हाथ धोते रहें।
नगर परिषद सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर सरकार से वार्ता चल रही है। जब तक सरकार इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लेती तब तक समाधान संभव नहीं है। शहरवासियों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे अपने घरों से निकलने वाले कचरे का घर के अंदर निस्तारण करने का प्रबंध रखें या उसे सुरक्षित रखें ताकि स्थिति सामान्य होने पर उसका उठान कराया जा सके। कचरा खुले में न फेंकें।