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भिवानी विधायक कार्यालय में सत्संग व दुख निवारण समागम का समापन, हवन और भंडारे में पहुंचे श्रद्धालु 
 

परमार्थ और ईश्वर भक्ति ही दुखों से मुक्ति का मार्ग : स्वामी फकीरानंद महाराज
जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म : विधायक घनश्याम सर्राफ
 

भिवानी, 24 जून : स्थानीय बाग कोठी स्थित विधायक घनश्याम सर्राफ के कार्यालय परिसर में पिछले कुछ दिनों से चल रहा आध्यात्मिक रस का प्रवाह बुधवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। पंजाब के पठानकोट स्थित रामदेव आश्रम से पधारे सुप्रसिद्ध संत श्रीश्री 1008 स्वामी फकीरानंद महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस भव्य सत्संग एवं दुख निवारण समागम के समापन अवसर पर पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। समापन के दिन प्रात:काल से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन यज्ञ शुरू हुआ, जिसमें विधायक घनश्याम सर्राफ सहित अनेक गणमान्य लोगों ने आहुति डाली। यह जानकारी देते हुए समाजसेवी रमेश सैनी और पर्यावरण प्रहरी विजय सिंहमार ने संयुक्त रूप से बताया कि इस समागम की सफलता में स्थानीय विधायक घनश्याम सर्राफ का विशेष और सराहनीय योगदान रहा। समागम के अंतिम दिन बुधवार सुबह सबसे पहले दिव्य सत्संग का आयोजन किया गया, जिसके बाद विश्व कल्याण और क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए पूर्णाहूति के साथ हवन किया गया। इसके उपरांत एक विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। समागम के समापन पर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए श्रीश्री 1008 स्वामी फकीरानंद महाराज ने कहा कि आज के इस कलयुग में मनुष्य भौतिक सुखों की दौड़ में अपने मानसिक सुकून को खोता जा रहा है। दुख निवारण का एकमात्र मार्ग ईश्वर की भक्ति, संतों का संग और दीन-दुखियों की सेवा है। विधायक घनश्याम सर्राफ के इस परिसर में जिस प्रकार भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सेवा का भाव दिखाया, वह सराहनीय है। जब जनप्रतिनिधि स्वयं ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढक़र भाग लेते हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस समागम का उद्देश्य केवल कथा सुनाना नहीं, बल्कि लोगों के दिलों से द्वेष मिटाकर प्रेम और करुणा की स्थापना करना था। इस मौके पर विधायक घनश्याम सर्राफ ने कहा कि संतों के सान्निध्य से न केवल वातावरण शुद्ध होता है, बल्कि हमें जनसेवा के मार्ग पर और अधिक निष्ठा से चलने की प्रेरणा मिलती है। राजनीति मेरे लिए केवल पद नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के दुखों का निवारण करने का माध्यम है। मैं भविष्य में भी भिवानी की जनता के कल्याण के लिए ऐसे आध्यात्मिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़े आयोजनों में अपना सहयोग देता रहूंगा। आज इस हवन और भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति में धर्म और सेवा की जड़ें कितनी गहरी हैं। इस अवसर पर प्रेमलता सर्राफ, अमन सर्राफ, सुरेंद्र लोहिया, महेंद्र लोहिया, सत्यनारायण गुज्जर, रामदेव तायल, सुखविंद्र दुहन, नरेश आहुजा, डा. सुनीता दुहन, आनंद तंवर, ललित चौहान, कृष्ण सोनी, सुनील मोनिया, सुनील जांगड़ा, राजेश सोनी, राहुल, उमेश, रिंकू ख्यालीराम, पीयूष, ललित, मोहित, अल्का, रमन सैन, सुभाष गोयल, नीरज वर्मा सहित अनेक श्रद्धालुगण मौजूद रहे।