Stray Cattle Issue Bhiwani: गोवंश की सुरक्षा और यातायात सुधार को लेकर डीसी कार्यालय में उठी आवाज
भिवानी में बेसहारा गोवंश के कारण बढ़ रहे हादसों और यातायात की समस्या को लेकर सामाजिक संगठनों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है।
भिवानी शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और बाजारों में घूम रहे बेसहारा गोवंश के कारण न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि आए दिन सड़क हादसों का खतरा भी काफी बढ़ गया है। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान और उचित प्रबंधन की मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने वीरवार को उपायुक्त के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधियों ने प्रशासन से अपील की है कि शहर को आवारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि आम नागरिक और पशु दोनों सुरक्षित रह सकें।
🚫 सड़कों पर अनुपयुक्त भोजन डालने से हो रही गोवंश की मौत, स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा असर
ज्ञापन सौंपने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों—सुरेश सैनी, विश्वकर्मा शिक्षा एवं जन कल्याण समिति के प्रधान एडवोकेट राजेश जांगड़ा, पर्यटन विकास मंच के संस्थापक राजेश गारनपूरा और ढाणा नरसान के नंबरदार राजेंद्र—ने बताया कि लोग अक्सर सड़क किनारे गोवंश को कच्चा, बासी, तला हुआ या अन्य अनुपयुक्त भोजन डाल देते हैं। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है और प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में गोवंश असमय काल के गाल में समा जाते हैं। सुरेश सैनी ने कहा कि गोसेवा हमारी आस्था के साथ-साथ एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी है, इसलिए इसके लिए प्रभावी और वैज्ञानिक व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
📋 संगठनों ने की विशेष बचाव और स्थायी आश्रय स्थलों की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं:
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अमावस्या और अन्य विशेष धार्मिक अवसरों पर प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर ही स्वच्छ और उचित आहार की व्यवस्था की जाए।
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बेसहारा, घायल और बीमार गोवंश के लिए विशेष बचाव व उपचार व्यवस्था के साथ एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
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प्रमुख मार्गों और चौराहों से पशुओं को सुरक्षित रूप से गोशालाओं या सरकारी आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाए।
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खुले में पशु छोड़ने वाले लापरवाह पशुपालकों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
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अमावस्या के अवसरों पर विशेष निगरानी दल गठित कर आमजन को जागरूक किया जाए तथा नगर प्रशासन, पशुपालन विभाग, पुलिस, गोशालाओं एवं सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।