भिवानी: तिगड़ाना के 50 साल पुराने जलघर का होगा कायाकल्प, खर्च होंगे 18 करोड़
भिवानी के तिगड़ाना गांव में 18 करोड़ की लागत से बनेगा नया जलघर। 50 साल पुराने जर्जर टैंक और पाइपलाइन बदले जाएंगे, पेयजल संकट से मिलेगी राहत।
भिवानी। तिगड़ाना के करीब 50 साल पुराने जर्जर जलघर का 18 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्माण किया जाएगा। योजना के तहत नहर से नए जलघर तक रॉ वाटर की अलग पाइपलाइन बिछाई जाएगी। ईंटों से बने तीन पुराने टैंकों को हटाकर उनकी जगह आरसीसी पैटर्न के दो आधुनिक टैंक बनाए जाएंगे जिनकी जल भंडारण क्षमता वर्तमान से करीब डेढ़ गुना होगी।
इसके अलावा एक एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा तथा गांव में करीब पांच किलोमीटर लंबी जर्जर व लीकेज वाली पेयजल पाइपलाइन भी बदली जाएगी। करीब आठ एकड़ में बने जलघर का पूरी तरह से कायाकल्प किया जाएगा। करीब 20 हजार से अधिक आबादी वाले तिगड़ाना में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। इसे देखते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने पेयजल व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 18 करोड़ रुपये की योजना तैयार कर मुख्यालय भेजी है।
योजना के तहत भिवानी-जींद मुख्य मार्ग स्थित पुराने जलघर के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। करीब आठ एकड़ में फैला यह जलघर 50 वर्ष से अधिक पुराना हो चुका है। ईंटों से बने तीनों टैंक की तलहटी क्षतिग्रस्त हो चुकी है और उनमें चवा ऊपर आ गया है। नहरी पानी के साथ आई गाद जमा होने से उनकी जल भंडारण क्षमता भी काफी कम रह गई है जिसके कारण गांव को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही।
हालांकि गांव में मंढाना रोड पर दूसरा जलघर भी है जिसमें आरसीसी के दो टैंक बने हुए हैं लेकिन गांव की अधिकांश पेयजल आपूर्ति अब भी पुराने जलघर पर निर्भर है।
जलघर में नए टैंक, नई मशीनरी और नई पाइपलाइन का होगा काम
योजना के तहत जलघर में दो नए आरसीसी टैंक बनाए जाएंगे। पांच दशक पुरानी पंपिंग मशीनरी को हटाकर नई मशीनें लगाई जाएंगी। जींद रोड स्थित नहर से जलघर तक रॉ वाटर की नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी ताकि पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी का भंडारण हो सके। गांव के भीतर जर्जर पेयजल लाइन भी बदली जाएगी और इसी परिसर में एक एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा।
महाग्राम योजना के मसौदे पर मुख्यालय ने लगाई रोक
गांव तिगड़ाना के लिए प्रस्तावित महाग्राम योजना पर फिलहाल जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग मुख्यालय ने रोक लगा दी है। इस योजना के तहत करीब 30 करोड़ रुपये से पेयजल व्यवस्था मजबूत करने तथा 37 करोड़ रुपये की लागत से नई सीवर लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव था। फिलहाल विभाग ने महाग्राम योजना से पहले पुराने जलघर के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी है।
गांव के टैंक करीब 50 वर्ष पहले पुरानी तकनीक से बनाए गए थे। अब उनकी हालत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। टैंकों में पानी का भंडारण दस दिन भी नहीं टिकता। चवा ऊपर आने और गंदगी के कारण पानी भी प्रदूषित हो रहा है। जलघर के फिल्टर भी खराब पड़े हैं। जलघर के नवीनीकरण से गांव को स्वच्छ पेयजल मिलने की उम्मीद जगी है।
जलघर के टैंक ही नहीं, पंपिंग मशीनरी भी पांच दशक पुरानी हो चुकी है जिससे पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती। पंपिंग मशीनें अधिकांश समय खराब रहती हैं। नए जलघर के निर्माण के बाद तकनीकी दिक्कतें दूर होंगी और नियमित पेयजल आपूर्ति की उम्मीद बढ़ेगी।
गांव तिगड़ाना में खासकर गर्मी के मौसम में पेयजल की गंभीर किल्लत रहती है। बारिश के दौरान पुराने टैंकों के कारण नलों में दूषित पानी पहुंचता है। टैंक अपनी जल भंडारण क्षमता खो चुके हैं और उनमें चवा भी ऊपर आ चुका है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री से पुराने जलघर के पुनर्निर्माण की मांग की गई थी जो अब पूरी होती दिखाई दे रही है।
गांव तिगड़ाना के पुराने जलघर के पुनर्निर्माण के लिए करीब 18 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर मुख्यालय भेजा गया है। मंजूरी और बजट मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। नए जलघर के निर्माण के बाद गांव में पेयजल आपूर्ति की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। नहर से रॉ वाटर के लिए अलग पाइपलाइन भी बिछाई जाएगी।