Cooperative Cab Model Chandigarh: चंडीगढ़ में भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत, कम बुकिंग से परेशान ड्राइवर और ऊंचे किराए पर घिरे यात्री
चंडीगढ़: चंडीगढ़ में ओला, उबर, रैपिडो और एंड्रिवे के लाइसेंस निलंबित होने के बाद ऐप आधारित कैब सेवा का पूरा समीकरण बदल गया है. इन कंपनियों के बाहर होने के बाद सहकारी मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी को शहर में एक प्रमुख विकल्प के रूप में उतारा गया. सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को कैब का विकल्प तो मिला, लेकिन अब किराए को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
यात्रियों की शिकायत: भारत टैक्सी इस्तेमाल करने वाले कुछ यात्रियों का कहना है कि कई रूट पर ऐप में दिखने वाला किराया उनकी उम्मीद से ज्यादा है. खासकर शहर के भीतर कम दूरी के सफर में यात्री पुराने समय की ओला-उबर सेवाओं से किराए की तुलना कर रहे हैं. ऐप आधारित कैब का इस्तेमाल सुविधा के साथ किफायती सफर के लिए किया जाता है. लेकिन ये सफर काफी महंगा पड़ रहा है.
विकल्प कम हुए तो किराए बढ़ गए: चार प्रमुख ऐप आधारित एग्रीगेटरों के लाइसेंस अलग-अलग समय पर निलंबित होने के बाद यात्रियों के पास विकल्प सीमित हुए हैं. ऐसे में भारत टैक्सी की भूमिका बढ़ गई है. यात्रियों का सवाल है कि जब शहर में विकल्प कम हैं तो क्या किराया भी यात्रियों की जेब के हिसाब से होना चाहिए. उनका कहना है कि सुविधा तभी आकर्षक होगी, जब कैब आसानी से मिले और किराया भी उचित रहे.
रोजाना बड़ी संख्या में लोग करते हैं कैब का इस्तेमाल: चंडीगढ़ में ऐप आधारित कैब सेवा का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या काफी बड़ी मानी जाती है. एक अनुमान के मुताबिक करीब एक लाख लोग रोजाना ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में किसी एक प्रमुख प्लेटफॉर्म पर निर्भरता बढ़ने से उसके किराए, उपलब्धता और बुकिंग व्यवस्था का सीधा असर यात्रियों पर पड़ सकता है.
ड्राइवरों की अलग परेशानी: जहां यात्री किराए को लेकर परेशान हैं, वहीं भारत टैक्सी से जुड़े ड्राइवर कम बुकिंग मिलने की बात कह रहे हैं. ड्राइवरों के मुताबिक प्लेटफॉर्म पर गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुपात में बुकिंग नहीं आ रही. इसका असर यह है कि एक ड्राइवर को दिनभर में मिलने वाली ट्रिप की संख्या कम हो रही है.
"भारत टैक्सी पर गाड़ियां ज्यादा हैं, लेकिन फिलहाल बुकिंग उस हिसाब से नहीं मिल रही. ड्राइवरों को नियमित ट्रिप मिलने की जरूरत है."
ड्राइवरों को सहकारी मॉडल से उम्मीद: भारत टैक्सी का सबसे बड़ा आकर्षण इसका सहकारी मॉडल बताया जा रहा है. इसमें ड्राइवरों को केवल कैब चलाने वाला नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के सदस्य और हिस्सेदार के रूप में जोड़ा जाता है. सेवा की शुरुआत के समय प्रशासन की ओर से भी इसे ड्राइवर-केंद्रित मॉडल के तौर पर पेश किया गया था. ड्राइवरों को उम्मीद है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ बुकिंग भी बढ़ेगी.
"इस प्लेटफॉर्म का सहकारी मॉडल ड्राइवरों के लिए अलग है. अगर बुकिंग बढ़ती है तो इससे ड्राइवरों को फायदा होगा."
तय किराया ढांचे में 25 रुपये प्रति किलोमीटर: चंडीगढ़ की एग्रीगेटर नीति के तहत पात्र टैक्सी सेवाओं के लिए किराया ढांचा निर्धारित किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार बेस रेट 25 रुपये प्रति किलोमीटर तय है. नीति में ड्राइवरों को कुल किराए का कम से कम 80 प्रतिशत देने और सर्ज प्राइसिंग को सीमित करने का प्रावधान भी है.
भारत टैक्सी का दावा: भारत टैक्सी की ओर से कहा गया है कि प्लेटफॉर्म पर सर्ज प्राइसिंग और कन्वीनियंस फीस नहीं ली जाती. कंपनी के अनुसार किराया दूरी और ऑपरेशनल लागत जैसे कारकों के आधार पर तय होता है. ऐसे में यात्रियों की ओर से किराए को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच प्लेटफॉर्म की किराया व्यवस्था पर नजर बनी हुई है.
"यात्रियों को किराए की पूरी जानकारी ऐप पर मिलनी चाहिए. पारदर्शी किराया व्यवस्था से यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा और बुकिंग भी बढ़ सकती है."
शुक्रवार को औपचारिक शुरुआत: चंडीगढ़ में शुक्रवार को सहकारी मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी सेवा की औपचारिक शुरुआत हुई थी. सेक्टर-9 स्थित न्यू यूटी सेक्रेटेरिएट में आयोजित कार्यक्रम में यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सेवा का उद्घाटन किया था. इसके बाद भारत टैक्सी के वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था.
यात्रियों और ड्राइवरों की जरूरत अलग-अलग: भारत टैक्सी के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है. यात्रियों को उचित किराए पर आसानी से कैब चाहिए, जबकि ड्राइवरों को लगातार बुकिंग की जरूरत है. यदि यात्रियों को किराया ज्यादा लगता है और ड्राइवरों को ट्रिप कम मिलती हैं तो प्लेटफॉर्म के लिए दोनों पक्षों को साथ बनाए रखना चुनौती बन सकता है.
"भारत टैक्सी को ज्यादा यात्रियों तक पहुंच बनाने की जरूरत है. बुकिंग बढ़ेगी तो ड्राइवरों को नियमित काम मिलेगा और सेवा भी मजबूत होगी."
बता दें कि भारत टैक्सी को शुरुआत में शहर में सीमित विकल्पों का फायदा जरूर मिला है, लेकिन लंबे समय में उसकी सफलता यात्रियों के अनुभव पर निर्भर करेगी. किराया, कैब की उपलब्धता, बुकिंग की संख्या और सेवा की विश्वसनीयता ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर यात्रियों और ड्राइवरों दोनों की नजर रहेगी.