Punjab Kala Bhawan Chandigarh: रेनोवेशन के बाद नए रंग-रूप में खुला ओपन एयर थिएटर, बुकिंग फीस भी हुई कम
चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन का डॉ. रतन सिंह जग्गी ओपन एयर थिएटर रेनोवेट होकर खुला। अत्याधुनिक साउंड-लाइट और शेड की सुविधा, फीस में भी कटौती।
पंचकूला: चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्थित पंजाब कला भवन का डॉ. रतन सिंह जग्गी ओपन एयर थिएटर अब नए रूप में लोगों के सामने आया है. नतीजतन कलाकारों इस मंच से अपने कौशल का प्रदर्शन करना और कला प्रेमियों का उन्हें देखने का इंतजार अब खत्म हो गया है. क्योंकि इस ओपन और थिएटर की रेनोवेशन का काम पूरा होने के बाद यहां कार्यक्रम होने शुरू हो गए हैं. यह नया मंच किन नवीन सुविधाओं के साथ कलाकारों का स्वागत करेगा.
2016 से वीरान था थियेटर: चेयरमैन स्वर्णजीत सिंह सवी ने कहा कि, "साल 2016 से ओपन एयर थिएटर का सूरत-ए-हाल खराब होने से यह वीरान था, यहां कोई कार्यक्रम नहीं होता था. जब कभी वह कला परिषद के पीछे के हिस्से में आकर ओपन एयर थिएटर को देखते तो मायूस होना पड़ता था. लेकिन करीब तीन महीने पूर्व डॉ. रतन सिंह जग्गी के बेटे आईएएस मालविंदर सिंह जग्गी उनके पास कार्यालय पहुंचे और कहा कि पिता की याद के लिए वह कुछ करना चाहते हैं. इस पर मैंने उन्हें ओपन एयर थिएटर की ओर ले जाकर थिएटर के जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण की जरूरत बताई. इसके बाद आईएएस मालविंदर सिंह जग्गी ने ओपन एयर थिएटर की दर्शक दीर्घा के लिए ग्रेनाइट की सीढ़ियां, स्टेज पर वुडन पैनलिंग, सबसे विशेष- थिएटर की रूफ तैयार कराई. साथ ही लाइट-साउंड के लिए अत्याधुनिक उपकरण लगवाए और परिसर में पीछे की ओर बेंच लगाए गए हैं. नतीजतन डॉ. रतन सिंह जग्गी ओपन एयर थिएटर की रूफ तैयार होने से कलाकार अब हर मौसम में यहां अभ्यास कर सकेंगे. इन सभी सुविधाओं के चलते पहले के मुकाबले अब दर्शक अधिक संख्या में आकर यहां कार्यक्रमों का आनंद ले सकते हैं."
चंडीगढ़ का बेस्ट ओपन एयर थिएटर: चेयरमैन स्वर्णजीत सिंह सवी ने कहा कि, "पंजाब कला भवन का डॉ. रतन सिंह जग्गी ओपन एयर थिएटर चंडीगढ़ का बेस्ट ओपन थिएटर है. किसी भी कॉलेज, यूनिवर्सिटी, यहां तक कि सरकार के पास भी ऐसा ओपन एयर थिएटर नहीं है. कला, संस्कृति व साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए प्रबंधन ने फैसला किया है कि अब यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए निर्धारित फीस में कटौती की जाए. जहां पहले एक कार्यक्रम के लिए पांच हजार रूपये चार्ज किए जाते थे, वहीं अब चार हजार रूपये फीस ली जाएगी."
पंजाब कला भवन ललित कलाओं का मक्का: पंजाब कला परिषद के चेयरमैन स्वर्णजीत सिंह सवी ने बताया कि, "पद्मश्री मोहिंदर सिंह रंधावा के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक पंजाब कला भवन की स्थापना था. उन्होंने रोज गार्डन के एक तरफ ललित कलाओं का मक्का (पंजाब कला परिषद) स्थापित किया. आर्ट काउंसिल के अधीन तीन अकादमी, जिनमें साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी और संगीत नाटक अकादमी संचालित हैं. परिषद का कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने यहां समय की जरूरत के अनुसार सिनेमा एवं डिजिटल आर्ट अकादमी के संचालन पर भी ध्यान दिया. नतीजतन वर्तमान में पंजाब कला परिषद में चार अकादमी संचालित है, जिनमें चौथी सिनेमा एवं डिजिटल आर्ट्स अकादमी है."
हरियाणा-चंडीगढ़ स्टूडेंट्स के कार्यक्रम: स्वर्णजीत सिंह सवी ने बताया कि, "पंजाब कला परिषद में हरियाणा और चंडीगढ़ के छात्र भी कार्यक्रम करते हैं. हाल ही में सोनीपत से 25 स्टूडेंट्स ने यहां शो किया. पंजाब कला परिषद अपने मुख्य उद्देश्य कला-संस्कृति एवं साहित्य के आदान-प्रदान के अनुसार सभी राज्यों को साथ जोड़ते हुए ललित कलाओं का विस्तार करता है. हरियाणवी भाषा के महज अंदाज में अंतर है लेकिन संस्कृति काफी मेल खाती है. वहीं, जब हिमाचल प्रदेश जाते हैं तो वहां पंजाबी भाषी लोग भी मिलते हैं."
देश भर से आते हैं कलाकार: चेयरमैन स्वर्णजीत सिंह सवी ने बताया कि, "पंजाब कला परिषद का मुख्य उद्देश्य कला-संस्कृति एवं साहित्य का आदान-प्रदान करना है. कलाकार, लेखक व थिएटर से जुड़े कलाकार यहां आकर अपने शो करते हैं, क्योंकि यह एक केंद्रीय इंस्टिट्यूट है. उन्होंने बताया कि हाल ही में एक ग्रुप ने श्रीनगर जाकर स्थानीय लेखकों का एक कार्यक्रम किया, जिसकी पुस्तक जल्द प्रकाशित होगी, वर्तमान में पुस्तक का अनुवाद जारी है."
पांच जोन बनाकर कला विस्तार: स्वर्णजीत सिंह सवी ने बताया कि, "पंजाब कला परिषद ने कला-संस्कृति एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए देशभर में पांच जोन में बनाए हैं, जिनमें से सेंट्रल जोन को अलग किया है. इन सभी जोन से विभिन्न समूहों के जरिए कला-संस्कृति व साहित्य के माध्यम से प्रचार प्रसार किया जा रहा है. जम्मू एवं कश्मीर में पंजाबी से मेल खाती डोगरी, गुजरी जैसी करीब आठ-नौ भाषाएं बोली जाती हैं. ऐसे ही तमिल-तेलगु भाषा के लिए एक समूह है, असम में बोली जाने वाली भाषाओं के लिए भी एक समूह है. ऐसे ही देशभर को पांच जोन में वर्गीकृत किया गया है."