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Chandigarh Tree Falling News: बिना आंधी-तूफान के चंडीगढ़ में गिरे विशाल पेड़, हरित विरासत पर मंडराया खतरा

चंडीगढ़ में बिना किसी तेज आंधी के लगातार बारिश के कारण कई बड़े पेड़ सड़क पर गिर गए। पर्यावरण विशेषज्ञों ने पेड़ों के वैज्ञानिक परीक्षण की मांग की है।

 

चंडीगढ़: 'सिटी ब्यूटीफुल' के नाम से मशहूर चंडीगढ़ की पहचान सिर्फ यहाँ की चौड़ी सड़कें ही नहीं, बल्कि दशकों पुराने घने और विशाल पेड़ भी हैं। लेकिन हाल ही में हुई लगातार बारिश ने शहर की इस अनमोल हरित विरासत को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। महज तीन से चार घंटे की मूसलाधार बारिश के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में कम से कम तीन बड़े पेड़ अचानक सड़कों पर आ गिरे। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इन घटनाओं के दौरान कोई तेज आंधी या तूफान नहीं चल रहा था।

🌧️ मिट्टी नरम होने और जड़ों की पकड़ कमजोर होने से हादसा

बिना तेज हवाओं के अचानक पेड़ सड़क पर खड़ी गाड़ियों पर जा गिरे या फिर जड़ों समेत उखड़कर सड़क किनारे आ गए। गनीमत यह रही कि इन घटनाओं में किसी भी तरह की बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन कुछ वाहन पेड़ों के नीचे दबकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। आमतौर पर शहर में इस तरह के पेड़ तेज हवाओं या तूफानों के दौरान गिरते हैं, लेकिन इस बार सिर्फ लगातार बारिश के कारण पेड़ों के गिरने से पर्यावरण प्रेमियों की चिंताएँ काफी बढ़ गई हैं।

🌱 मिट्टी नरम होने से कमजोर होती है पेड़ों की पकड़

पर्यावरण एक्टिविस्ट राहुल महाजन ने इस विषय पर चिंता जताते हुए बताया कि, "लगातार बारिश के कारण जमीन की मिट्टी नरम हो जाती है, जिससे पुराने पेड़ों की जड़ों की प्राकृतिक पकड़ कमजोर हो जाती है।" उन्होंने आगे कहा कि लगातार पानी बरसने से मिट्टी ढीली पड़ जाती है, और इसके साथ ही पेड़ों की अधिक उम्र, जड़ों में लगने वाली सड़न तथा आसपास होने वाले निर्माण कार्य भी पेड़ गिरने के मुख्य कारण बन सकते हैं।

🍃 पत्तों पर पानी जमने से बढ़ता है अतिरिक्त भार

एक्टिविस्ट राहुल महाजन ने बताया कि बारिश के दौरान पेड़ों के पत्तों और शाखाओं पर पानी जमा होने से उन पर अतिरिक्त भार पड़ जाता है। हल्की बारिश का पानी जब लगातार पत्तों पर अटका रहता है, तो उनका कुल वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि पेड़ की जड़ें पहले से ही किसी अंदरूनी कमजोरी या बीमारी के कारण कमजोर हों, तो उनके गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

🏗️ कंक्रीट के बढ़ने से जड़ों को नहीं मिल पाती पर्याप्त जगह

शहर में तेजी से हो रहे विकास कार्यों और सीमेंट-कंक्रीट के बढ़ते दायरे के कारण भी पुराने पेड़ों की जड़ों को पर्याप्त जगह, हवा और पानी नहीं मिल पा रहा है। एक्टिविस्ट के अनुसार, पेड़ों के आसपास लगातार कंक्रीट का जाल बिछने से उनकी प्राकृतिक जड़ प्रणाली बुरी तरह प्रभावित होती है। उम्रदराज पेड़ों में जड़ों की सड़न या अंदरूनी कमजोरी यदि समय रहते सामने न आए, तो बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी खतरनाक रूप ले लेती है।

🔬 वैज्ञानिक स्वास्थ्य परीक्षण की जरूरत और प्रूनिंग पर सवाल

राहुल महाजन ने जोर देकर कहा कि शहर के पुराने पेड़ों का नियमित और वैज्ञानिक तरीके से स्वास्थ्य परीक्षण होना बेहद जरूरी है। वर्तमान में पुराने पेड़ों की सही समय पर पहचान और उनकी सेहत की जाँच नहीं हो रही है। प्रशासन को पर्यावरण संरक्षण के नियमों पर पूरी गंभीरता से काम करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने पेड़ों की प्रूनिंग (छंटाई) के तरीकों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस अवैज्ञानिक तरीके से प्रूनिंग की जा रही है, उससे आने वाले दिनों में और भी पेड़ गिर सकते हैं। प्रूनिंग हमेशा वैज्ञानिक पद्धति से होनी ताकि पेड़ का संतुलन बना रहे।

♻️ गिरा हुआ पेड़ भी पा सकता है दोबारा जीवन

एक्टिविस्ट ने यह भी दावा किया कि उचित देखभाल से कुछ गिरे हुए पेड़ों को दोबारा से जीवनदान दिया जा सकता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कई बार ऐसे पेड़ों को वैसे ही छोड़ दिया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सेक्टर-10 में हाल ही में एक जागरूक नागरिक ने गिरे हुए पेड़ को दोबारा सीधा खड़ा किया था, और करीब 15 दिन बीत जाने के बाद भी वह पेड़ आज पूरी तरह स्वस्थ स्थिति में खड़ा है।

🏛️ नगर निगम की नजर और भविष्य के बड़े खतरे से बचाव

दूसरी ओर, नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि फील्ड वर्करों द्वारा ऐसे कमजोर और खतरनाक पेड़ों पर लगातार नजर रखी जा रही है और समय-समय पर जरूरी कदम उठाए भी जाते हैं। हालांकि, जरूरत इस बात की है कि बारिश के मौसम के बाद शहर के सभी पुराने और विशाल पेड़ों का व्यापक सर्वे कराया जाए। समय रहते कमजोर और बीमार पेड़ों की पहचान करने से न सिर्फ चंडीगढ़ की हरित विरासत को बचाया जा सकेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले बड़े हादसों के खतरे को भी टाला जा सकता है।