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Congress District Convention Bhiwani: भिवानी में 27 सितंबर को कांग्रेस का जिला सम्मेलन, बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा के बाद नया अभियान

पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने भिवानी में कहा कि स्थापित नेताओं को युवाओं के लिए रास्ते साफ करने चाहिए। 27 सितंबर को होगा सम्मेलन।
 

भिवानी: पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह डूमरखां मंगलवार को भिवानी पहुंचे. यहां उन्होंने स्थानीय पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया. इस दौरान युवाओं को आगे बढ़ाने की वकालत करने वाले बीरेंद्र सिंह ने खुद भी मुख्यमंत्री बनने की संभावना और इच्छा से इनकार नहीं किया.

27 सितंबर को कांग्रेस के जिला स्तरीय सम्मेलनः पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह भिवानी की जाट धर्मशाला में 27 सितंबर को सांय 3 बजे होने वाले कांग्रेस के जिला स्तरीय सम्मेलन का निमंत्रण देने यहां पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि "पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा संपन्न होने के बाद अब जिला सम्मेलनों का दौर किया गया है, जिसके तहत 7वां सम्मेलन भिवानी में होगा, जो कि 27 सितंबर को होगा.

भूपेंद्र हुड्डा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं: पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि "हुड्डा के साथ उनका राजनीतिक ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और व्यक्तिगत दोस्ती का गहरा संबंध है." उन्होंने बताया कि "उन्होंने हुड्डा को फोन कर बधाई देने का प्रयास किया था, लेकिन उनसे सीधी बातचीत नहीं हो सकी."

'युवाओं के लिए रास्ते साफ करने चाहिए': राजनीति में नेताओं की उम्र और रिटायरमेंट के सवाल पर बीरेंद्र सिंह ने एक नया दृष्टिकोण रखा. उन्होंने कहा कि किसी नेता का मार्गदर्शक बनने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि वह राजनीति से रिटायर हो गया है. इसका असली मकसद नई पीढ़ी को आगे आने का अवसर देना है. अपने त्यागपत्रों का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने तीन साल पहले राज्यसभा का कार्यकाल बाकी रहते हुए पद छोड़ दिया था और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मंत्री पद पर न बने रहने की इच्छा जताई थी. उन्होंने कहा कि स्थापित नेताओं को युवाओं के लिए रास्ते साफ करने चाहिए.

बेरोजगारी और शिक्षा के गिरते स्तर पर जताई चिंता: उन्होंने कहा कि अब हरियाणा कांग्रेस की कमान किसी एक व्यक्ति या धड़े के हाथ में नहीं है. अब सीएलपी नेता, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और आने वाला नया संगठन मिलकर अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे. उन्होंने गुटबाजी को नकारात्मक मानने के बजाय संगठन के पुनर्निर्माण की एक स्वाभाविक प्रक्रिया करार दिया. उनका कहना था कि "इस बदलाव से नए चेहरों और युवाओं के लिए राजनीति में आगे बढ़ने के कई द्वार खुलेंगे. युवाओं के मुद्दों पर बोलते हुए चौ. बीरेंद्र सिंह डूमरखां ने प्रदेश में बेरोजगारी और शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता जताई.

'युवा अपने भविष्य को लेकर बेहद आशंकित है': बीरेंद्र सिंह ने कहा कि आज हरियाणा का युवा अपने भविष्य को लेकर बेहद आशंकित है. मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों का खाली रह जाना उच्च शिक्षा व्यवस्था की नाकामी को दर्शाता है. उन्होंने दावा किया कि देश और प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा मौजूदा व्यवस्था से पूरी तरह असंतुष्ट है और आने वाले समय में यही वर्ग राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा कारण बनेगा.

'पक्की नौकरियों की जगह अस्थायी रोजगार, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़': उन्होंने ऐलान किया कि राहुल गांधी द्वारा चलाए जा रहे प्रतिरोध अभियान को हरियाणा में जन-जन तक पहुंचाया जाएगा. इस अभियान के तहत युवाओं, किसानों और समाज के पीड़ित वर्गों को जोड़ा जाएगा. बीरेंद्र सिंह ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम पर प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पक्की नौकरियों की जगह अस्थायी रोजगार देकर सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है और आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है.

'जो नेता दबाव में हैं, वे दबे रहें': कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों या भाजपा के दबाव में होने के सवाल पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाया. बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जो नेता दबाव में हैं, वे दबे रहें, लेकिन जिन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है, उन्हें मैदान में उतरकर जनता की लड़ाई लडऩी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कांग्रेस में सवाल उठाने तथा अपनी बात मजबूती से रखने का साहस मौजूद है.

'देश का किसान और मजदूर वर्ग अपेक्षित': अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलते हुए बीरेंद्र सिंह ने ब्रिक्स सम्मेलन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि "वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स का बड़ा योगदान है, लेकिन हर उपलब्धि का श्रेय केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से देना तर्कसंगत नहीं है." उन्होंने कहा कि "बड़े-बड़े आर्थिक सुधारों के बावजूद आज भी देश का किसान और मजदूर वर्ग अपेक्षित लाभ से वंचित है."