Murder Case High Court Update: मोबाइल कॉल डिटेल और साक्ष्यों के फेर में फंसी पुलिस; हाईकोर्ट ने दिए अहम फैसले
कुरुक्षेत्र । कुरुक्षेत्र के चर्चित डॉ. विनिता अरोड़ा हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम और बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व नौकरानी पूनम को तमाम आरोपों से बरी कर दिया है। करीब 45 महीने (लगभग पौने 4 साल) तक जेल की सलाखों के पीछे वक्त बिताने के बाद आखिरकार पूनम को अदालत से बड़ी राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पूनम के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य उसे दोषी साबित करने के लिए कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं थे। वहीं, इस सनसनीखेज मामले के अन्य चार दोषियों की मौत की सजा (फांसी) को बिना किसी छूट के 30-30 साल के कठोर कारावास में बदल दिया गया है।
🏠 क्या था पूरा मामला? 9 जनवरी 2023 की रात हुई थी वारदात
अभियोजन पक्ष के अनुसार, गत 9 जनवरी 2023 की रात डॉक्टर विनिता अरोड़ा की उनके ही घर में लूटपाट के दौरान बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। सबसे दर्दनाक बात यह थी कि जिस वक्त यह खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया, उस समय मृतका के पति डॉ. अतुल अरोड़ा भी घर पर ही मौजूद थे। आरोपी घर से भारी मात्रा में नकदी और कीमती गहने लूटकर फरार हो गए थे। इस बहुचर्चित मामले की गहन जांच के बाद पुलिस ने पूर्व नौकरानी पूनम सहित कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
📱 कॉल डिटेल और साक्ष्यों को लेकर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
पुलिस ने अपनी जांच के दौरान दावा किया था कि पूर्व नौकरानी पूनम और मुख्य आरोपी विक्रम उर्फ विक्की के बीच लगातार संपर्क था और मोबाइल कॉल डिटेल इस मामले में सबसे अहम साक्ष्य है:
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साजिश का आरोप: पुलिस का आरोप था कि पूनम ने ही विक्की को घर के अंदर नकदी और गहने रखे होने की गुप्त जानकारी दी थी।
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जीजा के नाम पर था सिम: हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिस मोबाइल नंबर को पुलिस पूनम का बता रही थी, वह वास्तव में उसके जीजा जसबीर सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड था।
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अदालत में गवाही: जसबीर सिंह ने अदालत में स्पष्ट किया कि उसने वह सिम कार्ड कभी पूनम को नहीं दिया था। इसके अलावा, पुलिस यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि संबंधित मोबाइल नंबर का इस्तेमाल असल में पूनम ही करती थी या वारदात के आसपास उसकी अन्य आरोपियों से कोई बातचीत हुई थी।
🔍 संदेह और पुलिस हिरासत के बयानों पर बरी हुई पूनम
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि पूनम का अन्य आरोपियों से परिचित होना या उनके घर में घरेलू काम करना मात्र उसे इस आपराधिक साजिश में शामिल साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
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पूनम के पास से लूट का कोई भी सामान बरामद नहीं हुआ और न ही उसकी निशानदेही पर किसी प्रकार की रिकवरी की गई।
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अदालत ने साफ कहा कि केवल कयासों, संदेह और पुलिस हिरासत के दौरान दर्ज कथित स्वीकारोक्ति (Confession) के आधार पर किसी भी नागरिक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
इन्हीं पुख्ता कानूनी तथ्यों और तर्कों के आधार पर अदालत ने पूनम को 'संदेह का लाभ' देते हुए तुरंत प्रभाव से बरी कर दिया।
⛓️ चार दोषियों की फांसी की सजा उम्रकैद यानी 30 साल की कैद में बदली
इस हाई-प्रोफाइल मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने शेष चार दोषियों—सुनील कुमार, मनीष कुमार, विक्रमजीत उर्फ बिट्टू और विक्रम उर्फ विक्की—की मृत्युदंड (फांसी) की सजा को न्यूनतम 30 साल के कारावास में परिवर्तित कर दिया है।
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दोषियों को यह लंबी सजा बिना किसी छूट के काटनी होगी।
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अदालत ने अपराध की भयंकर गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सख्त सजा को तो जरूरी माना, साथ ही कानून के तहत दोषियों के भीतर सुधार की संभावनाओं के बिंदु को भी संज्ञान में लिया।
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दूसरी ओर, पूर्व नौकरानी पूनम के बरी हो जाने के बाद अब इस मामले में कुल दोषियों की संख्या पांच से कम रह गई है, जिसके चलते डकैती और अन्य धाराओं के तहत तय सजा में भी तदनुसार कानूनी बदलाव किए गए हैं।