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Ambulance Diesel Scam 2026: फरीदाबाद क्राइम न्यूज़: मोर्चरी और वर्कशॉप में धूल फांक रही थीं एंबुलेंस, कागजों पर होता रहा डीजल का खेल

फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में महीनों से खड़ी चार एंबुलेंसों के नाम पर 50 लाख रुपये का डीजल खरीदने का बड़ा घोटाला सामने आया है। सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए हैं।
 

हरियाणा के फरीदाबाद जिले के प्रमुख बीके सिविल अस्पताल से जुड़ा एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में खड़ी चार एंबुलेंसों के नाम पर करीब 50 लाख रुपये का डीजल खरीदे जाने का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन एंबुलेंसों के नाम पर लगातार डीजल की एंट्रियां दर्ज होती रहीं, वे वास्तव में पिछले कई महीनों से अस्पताल की मोर्चरी के पास और एजेंसी की वर्कशॉप में धूल फांक रही थीं। इस गंभीर मामले के उजागर होने के बाद से स्वास्थ्य विभाग के महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने 20 अक्टूबर को एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इस फर्जीवाड़े में संलिप्त सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

💳 चार एंबुलेंसों के फ्यूल कार्ड से हुआ लाखों का लेनदेन, महीनों से बंद पड़ी थीं गाड़ियां

विभागीय दस्तावेजों और शुरुआती पड़ताल से सामने आए तथ्य:

  • मुख्यालय स्तर पर खुलासे: विभागीय जानकारी के अनुसार, पंचकूला स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय की ओर से कुछ महीने पहले एंबुलेंसों के फ्यूल कार्ड (Fuel Card) के जरिए हुए वित्तीय लेनदेन की ऑनलाइन समीक्षा की गई थी।

  • फर्जी प्रविष्टियां: समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि चार एंबुलेंसों के लंबे समय से परिचालन में न होने और एक ही जगह खड़े होने के बावजूद उनके नाम पर बड़े पैमाने पर डीजल खरीदा जा रहा था। शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 50 लाख रुपये के ईंधन की संदेहास्पद खरीद का अंदेशा जताया गया है।

  • गाड़ियों के नंबर और स्थिति:

    • एंबुलेंस नंबर HR38GV3491 और HR38GV9863 पिछले तीन से चार महीनों से अस्पताल की मोर्चरी के पास लावारिस हालत में खड़ी थीं, इसके बावजूद 11 अक्टूबर तक इनके फ्यूल कार्ड से डीजल भरवाने के रिकॉर्ड दर्ज मिले।

    • वहीं, एंबुलेंस नंबर HR38Z0951 और HR38GV1670 क्रमशः जनवरी और अगस्त माह से अधिकृत एजेंसी की वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी थीं। इसके बावजूद इनके नाम पर भी 16 सितंबर और 11 अक्टूबर तक नियमित रूप से डीजल डलने की एंट्रियां पाई गईं।

📝 आरटीएस फ्लीट मैनेजर को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस

प्रशासनिक स्तर पर की गई शुरुआती कार्रवाई:

  • स्पष्टीकरण तलब: इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को संज्ञान में लेते हुए डिप्टी सिविल सर्जन (एनएचएम) विनय गुप्ता ने 16 अक्टूबर को संबंधित आरटीएस फ्लीट मैनेजर को एक सख्त 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया था।

  • मांगा गया पूरा ब्योरा: इस नोटिस के तहत प्रत्येक एंबुलेंस के फ्यूल कार्ड से हुए प्रत्येक लेनदेन का विस्तृत ब्योरा देने को कहा गया। इसमें डीजल भरवाने की सटीक तारीख, ईंधन की मात्रा, कुल कीमत, संबंधित पेट्रोल पंप का नाम और इस प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए थे।

👁️ एनएचएम निदेशक भी रख रहे हैं पैनी नजर, दोषियों पर गिरेगी गाज

उच्चाधिकारियों के सख्त निर्देश और प्रतिक्रियाएं:

  • निदेशक का दौरा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के निदेशक वीरेंद्र यादव भी इस पूरे प्रकरण पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में बीके अस्पताल के अपने दौरे के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की पारदर्शिता से जांच के लिए कमेटी बना दी गई है और रिपोर्ट आते ही किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • सिविल सर्जन का बयान: सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा ने भी दो टूक शब्दों में कहा है कि जांच रिपोर्ट में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

❓ जांच के घेरे में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और कई अनसुलझे सवाल

इस पूरे घोटाले ने स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • जब एंबुलेंस पिछले कई महीनों से एक ही स्थान पर बंद खड़ी थीं, तो आखिर किसके मौखिक या लिखित निर्देशों पर उनके नाम पर डीजल खरीदा जाता रहा?

  • फ्यूल कार्ड से होने वाले हजारों-लाखों रुपये के इस वित्तीय लेनदेन का भौतिक सत्यापन अस्पताल के किस जिम्मेदार अधिकारी द्वारा किया जा रहा था?

  • शहर के जिन पेट्रोल पंपों से कागजों पर डीजल की यह फर्जी खरीद दिखाई गई, उनकी भूमिका और मिलीभगत की जांच क्यों नहीं की गई?

  • क्या इस पूरे खेल की जानकारी अस्पताल के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पहले से थी? फिलहाल इन तमाम गंभीर सवालों के आधिकारिक जवाब जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेंगे।