Haryana Rain Update: फरीदाबाद में बारिश के बाद बिगड़े हालात, बच्चों का स्कूल जाना बंद, प्रशासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा
फरीदाबाद में मूसलाधार बारिश से सूर्या विहार, सेहतपुर और डबुआ समेत दर्जनों कॉलोनियां जलमग्न। 3 से 4 फीट पानी भरने से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त।
फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है. शहर की दर्जनभर कॉलोनियां जलमग्न हैं. कई जगह सड़कों और गलियों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया है, जिससे लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. सबसे ज्यादा प्रभावित कॉलोनियों में सूर्या विहार, विनय नगर, सूरदास कॉलोनी, ओम एनक्लेव, अगवानपुर, रोशन नगर, सोनिया विहार, डबुआ कॉलोनी, सेहतपुर, सरस्वती कॉलोनी, श्याम कॉलोनी और धीरज नगर शामिल हैं.
फरीदाबाद में बारिश से दर्जनभर कॉलोनियां जलमग्न: लगातार हो रही बारिश के बाद फरीदाबाद की कई कॉलोनियां तालाब में तब्दील हो गई हैं. मुख्य सड़कें हों या गलियां, हर तरफ जलभराव का नजारा देखने को मिल रहा है. कई स्थानों पर वाहन बंद हो रहे हैं, तो पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया.
जलभराव से जनजीवन प्रभावित: स्थानीय रेहड़ी चालक अजय ने बताया कि "हर बारिश में हमारी कॉलोनी पानी में डूब जाती है. प्रशासन ना तो समय पर पानी निकालता है और ना ही कोई स्थायी व्यवस्था करता है. परिवार का पेट पालने के लिए मजबूरी में पानी से भरी सड़कों पर रेहड़ी लेकर निकलना पड़ता है. फिलहाल लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं, बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे और दुकानदारों व रेहड़ी-पटरी वालों का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है."
पानी निकासी की नहीं व्यवस्था: दुकानदार चिरंजीव ने बताया कि "बारिश के बाद सड़क पर करीब तीन फीट तक पानी भर जाता है. कभी-कभार टैंकर से थोड़ा पानी निकाल दिया जाता है, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है. कई बार स्थानीय पार्षद और प्रशासन को शिकायत दी गई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला."
स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे: 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला चम्पावती ने बताया कि "मैं कई वर्षों से यहां रह रही हूं और हर बरसात में यही हाल होता है. घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. उम्र बीत गई लेकिन कॉलोनी की हालत नहीं बदली. सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और बच्चों को होती है, जबकि बच्चे कई दिनों तक स्कूल भी नहीं जा पाते."
कॉलोनियों में तीन से चार फीट तक भरा पानी: स्थानीय निवासी जितेंद्र ने कहा कि "पैदल चलना तो दूर, गाड़ियों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है. केवल उनकी कॉलोनी ही नहीं बल्कि आसपास की लगभग सभी कॉलोनियां जलभराव की समस्या से जूझ रही हैं. गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक पानी भरा हुआ है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है."
'शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं': स्थानीय निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि "हम पिछले 30-35 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं. जब से हमने यहां रहना शुरू किया, तब से हर बारिश में यही हाल देखते आ रहे हैं. जलभराव के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. प्रशासन और सरकार को जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए. चुनाव के समय नेता वादे करते हैं, लेकिन बाद में कोई काम नहीं होता."
'समाधान के बदले सिर्फ आश्वासन ही मिला': स्थानीय निवासी पन्नालाल ने कहा कि कॉलोनी की हालत इतनी खराब है कि ऐसा लगता है जैसे लोग नर्क में रह रहे हों. गलियों और मुख्य सड़क दोनों जगह कई फीट पानी भरा हुआ है. बच्चे करीब दस दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और लोग अपने काम पर भी नहीं निकल पा रहे. नेता और अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, लेकिन हर बारिश में हालात पहले जैसे ही बने रहते हैं.
प्रशासन के दावों पर सवाल: मानसून शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फरीदाबाद दौरे के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिले में कहीं भी जलभराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए. इसके बाद जिला प्रशासन ने जलभराव से निपटने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई और करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का दावा भी किया, लेकिन मौजूदा हालात इन दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं. शहर की दर्जनों कॉलोनियां पानी में डूबी हैं और लोग बदहाल हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जल निकासी की व्यवस्था जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रही? अब लोगों की मांग है कि प्रशासन केवल कागजी दावों तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि हर साल बारिश के साथ होने वाली यह परेशानी खत्म हो सके.