Gurgaon Rain Update: भारी बारिश के कारण शहर हुआ जलमग्न, स्कूल बसें और कैब रहीं बंद, तापमान में भारी गिरावट
गुरुग्राम में रातभर हुई झमाझम बारिश के चलते शहर जलमग्न हो गया है। पॉश इलाकों और सड़कों पर 2-3 फीट पानी भरने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गुरुग्राम में रविवार देर रात से शुरू हुई झमाझम बारिश ने जहां एक तरफ मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया और गर्मी से राहत दिलाई, वहीं दूसरी तरफ यह बारिश शहरवासियों के लिए बड़ी आफत बन गई। सुबह होते ही पूरा शहर जलमग्न नजर आया और मुख्य सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। शहर के पॉश इलाकों में शुमार सेक्टर 14 के मुख्य मार्ग पर करीब ढाई फीट पानी भर जाने के कारण कई वाहन बीच रास्ते में ही खराब होकर बंद हो गए। हालांकि नगर निगम और जीएमडीए (GMDA) द्वारा पंप लगाकर पानी निकालने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जलभराव इतना अधिक था कि पानी कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था।
🚗 वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को हुई भारी परेशानी: सड़कों पर बंद हुई गाड़ियां, कई लोगों ने ली छुट्टी
भारी जलभराव और जलमग्न सड़कों के कारण सुबह के वक्त ऑफिस जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी खराब थी कि बच्चों को स्कूल ले जाने वाली अधिकांश कैब और स्कूल बसें सड़कों पर नहीं उतरीं, जिसके कारण बच्चों की छुट्टी रही। कई लोग कैब का इंतजार करते रहे और जब कैब नहीं आई तो वे अपने निजी वाहनों से निकल पड़े, लेकिन रास्तों में पानी अधिक होने के कारण उनकी गाड़ियां और बाइक बीच रास्ते में ही बंद हो गईं। कई कर्मचारियों को तो मजबूरन पानी के बीच से पैदल ही अपने दफ्तरों तक जाना पड़ा। हालात को देखते हुए तमाम लोगों ने सप्ताह के पहले दिन ही अपने ऑफिस से अवकाश ले लिया।
🌡️ तापमान में आई भारी गिरावट: प्रशासन के जल निकासी के सारे दावे फिर साबित हुए खोखले
बारिश के चलते शहर के तापमान में अचानक जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से जो तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा था, वह लुढ़ककर सीधे 23 डिग्री तक पहुँच गया, जिससे लोगों को हल्की ठंड का अहसास होने लगा है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार दोपहर बाद तापमान में फिर थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन 15 और 16 अक्टूबर को एक बार फिर बारिश होने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, हर साल मानसून या प्री-मानसून बारिश से पहले जल निकासी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाले जिला प्रशासन और नगर निगम के बड़े-बड़े दावे एक बार फिर खोखले साबित होते दिखे। जगह-जगह हुए जलभराव ने सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।