Yuvraj Singh Manchand Murder: दिल्ली से लापता युवक का गुरुग्राम में मिला था शव, पुलिस ने उत्तराखंड से दबोचे आरोपी
गुड़गांव : सेक्टर-70 एरिया में नाले से 10 सितंबर को मिले युवक के शव मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। युवक की हत्या कर शव को खुर्दबुर्द करने की नीयत से पूर्व सहकर्मी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर नाले में फेंक दिया था। मृतक की गुमशुदगी की शिकायत दिल्ली में दर्ज थी। दिल्ली पुलिस ने कॉल डिटेल के आधार पर पूर्व महिलाकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को अदालत में पेश कर पांच दिन के रिमांड पर लिया।
जानकारी के मुताबिक, मृतक सरिता विहार दिल्ली निवासी युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को अपनी बहन के साथ लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में शॉपिंग करने गया था। इसके बाद दोनों लाजपत नगर-2 के K-Block स्थित गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट पहुंचे। शाम करीब 4 बजे युवराज ने अपनी बहन से कहा कि उसकी गुरुग्राम में एक मीटिंग है और वह रात करीब 10 बजे तक वापस घर आ जाएगा, लेकिन युवराज रात तक घर नहीं लौटा। उसका मोबाइल फोन भी बंद मिलने के बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की।
युवराज की बहन ने 11 सितंबर को शाम को लाजपत नगर थाने में उसके लापता होने की शिकायत दी। पुलिस ने इस मामले में गुमशुदगी की धाराओ BNS 140(3) के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया। CDR और IPDR यानी मोबाइल कॉल और इंटरनेट इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। जांच में पता चला कि युवराज ने आखिरी बार अपनी पूर्व ऑफिस सहकर्मी अन्या वत्स से बात की थी। युवराज ने परिवार को भी बताया था कि वह गुरुग्राम में अन्या से मिलने जा रहा है। इसके बाद युवराज और अन्या दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए।
पुलिस ने इसके बाद CCTV फुटेज खंगाले, स्थानीय स्तर पर पूछताछ की और युवराज तथा संदिग्ध महिला के ऑफिस से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाई। लगातार जांच के दौरान अन्या वत्स पुलिस की मुख्य संदिग्ध बनकर सामने आई। इसी दौरान पुलिस को पता चला कि अन्या एक नए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही है। नए नंबर के कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और दूसरे तकनीकी सबूतों की जांच की गई तो उसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिली। इसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम उत्तराखंड पहुंची और वहां से अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को काबू कर लिया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने युवराज सिंह मनचंदा की हत्या में शामिल होने की बात बताई।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने यह भी बताया कि हत्या के बाद युवराज के शव को गुरुग्राम में उनके घर के पास एक नाले में फेंक दिया था। जांच के दौरान पुलिस को एक अहम कड़ी तब मिली, जब पता चला कि 10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर थाना क्षेत्र में एक नाले से एक अज्ञात शव बरामद हुआ था। पुलिस ने इस शव की तस्वीरें हासिल कीं और युवराज के परिवार को दिखाईं। परिवार ने तस्वीरों के आधार पर शव की पहचान युवराज सिंह मनचंदा के रूप में की। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच और जुटाए गए सबूतों के आधार पर अन्या वत्स और संयम सचदेवा की युवराज की हत्या और शव को छिपाने/ठिकाने लगाने में प्रथम दृष्टया भूमिका सामने आई है।
जांच में आरोपियों से जुड़े घटनास्थलों की पहचान और निशानदेही, तकनीकी सबूत और फोरेंसिक एविडेंस जुटाने के साथ-साथ हत्या से पहले और बाद की पूरी घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि युवराज की हत्या किस वजह से की गई और इस वारदात में आरोपियों की पूरी भूमिका क्या थी।आरोपी महिला के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज है।
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी मृतक के साथ पहले जॉब करती थी। वहीं, मामले में संलिप्त दूसरा आरोपी महिला का पार्टनर बताया जा रहा है और दोनों आरोपी लिव-इन पार्टनर के तौर पर रह रहे थे। प्रारंभिक तौर की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने रुपयों के लेनदेन के विवाद में हत्या की वारदात को अंजाम दिया है। फिलहाल दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है।