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Haryana Land Records Digitization: नागरिकों को तहसील के चक्कर से मुक्ति, ऑटो म्यूटेशन और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली शुरू

हरियाणा में संपत्ति पंजीकरण के बाद इंतकाल की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू की गई है।
 

पंचकूला: हरियाणा सरकार द्वारा राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी, जवाबदेह एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था को लागू किए जाने का दावा किया गया है. जिला प्रशासन के अनुसार इस व्यवस्था का मकसद पंजीकरण के बाद इंतकाल की प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करना और आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है. उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी.

पंजीकरण के बाद निर्धारित समय इंतकाल: जिला उपायुक्त ने बताया कि पंजीकरण के बाद इंतकाल की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है. इसके तहत पहले चार दिन तक इंतकाल पटवारी के लॉगिन में रहेगा, ताकि पटवारी द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा सके. यदि पांचवें दिन तक पटवारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो इंतकाल स्वतः कानूनगो के लॉगिन में अग्रेषित हो जाएगा. उन्होंने बताया कि कानूनगो को आवश्यक कार्रवाई के लिए दो दिन का समय दिया जाएगा.

सातवें दिन तक मामला आगे बढ़कर स्वत: सीआरओ के लॉगिन में पहुंच जाएगा. सीआरओ को आवश्यक कार्रवाई के लिए चार दिन का समय निर्धारित किया गया है. यदि निर्धारित समय-सीमा में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो 11वें दिन इंतकाल स्वतः जमाबंदी में दर्ज हो जाएगा. इस पूरी व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इंतकाल किसी एक स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई हो.

ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था: जिला उपायुक्त ने बताया कि "सरकार द्वारा नागरिकों की सुविधा के लिए एक विशेष ऑनलाइन पेज/पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां कोई भी नागरिक अपने लंबित इंतकाल से संबंधित शिकायत दर्ज कर सकेगा. नागरिक अपनी शिकायत के साथ संबंधित दस्तावेज भी ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकेंगे. शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग एवं अधिकारी द्वारा दस दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. यदि इंतकाल नियमों के अनुसार विधि को पूरा किया जा सकता है तो नागरिक को इंतकाल की प्रति उपलब्ध करवाई जाएगी. वहीं, यदि किसी कारणवश इंतकाल नहीं किया जा सकता तो संबंधित सीआरओ द्वारा स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया जाएगा."

स्पीकिंग ऑर्डर में कारण स्पष्ट: जिला उपायुक्त ने बताया कि स्पीकिंग ऑर्डर में स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि इंतकाल क्यों नहीं किया जा सकता, किस नियम-कारण के आधार पर मामला स्वीकार नहीं किया गया और आवश्यकता होने पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी. उन्होंने कहा कि इसका मकसद नागरिकों को केवल यह कहकर वापस भेजना नहीं है कि इंतकाल नहीं हो सकता, बल्कि उन्हें लिखित एवं कारण सहित निर्णय उपलब्ध करवाना है.

जमाबंदी व राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण: उपायुक्त सतपाल शर्मा ने बताया कि "सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक राजस्व सेवाएं नागरिकों को घर बैठे या नजदीकी सीएससी केंद्र के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएं. इसके तहत जमाबंदी, इंतकाल, डिजिटल हस्ताक्षरित रजिस्ट्री और अन्य राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करवाने की दिशा में काम जारी है. जमाबंदी में व्यक्ति के हिस्से से संबंधित जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करवाने, छोटी-मोटी त्रुटियों के सुधार की प्रक्रिया को सरल बनाने और तकसीम जैसी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है."

समय-सीमा में कार्रवाई के निर्देश: उपायुक्त ने कहा कि "सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि नागरिकों को अपने कार्य के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े. डिजिटल व्यवस्था का मकसद व्यवस्था को बेहतर बनाना, जवाबदेही तय करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आम नागरिक को समय पर सेवा उपलब्ध करवाना है. नई व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को वास्तविक तकनीकी समस्या, संचालन संबंधी कठिनाई या कोई सकारात्मक सुझाव सामने आता है तो उसे उचित माध्यम से विभाग के संज्ञान में लाया जा सकता है, ताकि उसका शीघ्र समाधान किया जा सके."

कम मानवीय हस्तक्षेप, पारदर्शिता और सेवा: जिला उपायुक्त ने कहा कि "सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि राजस्व सेवाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो, पारदर्शिता अधिक हो और नागरिकों को निर्धारित समय में सेवा मिले. ऑटो म्यूटेशन और डिजिटल राजस्व सेवाओं के माध्यम से आमजन को सरल एवं सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है. तकनीक का उद्देश्य व्यवस्था को कठिन बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए व्यवस्था को सरल बनाना है. सरकार की इस पहल से राजस्व सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक कार्यालयी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी."