Rao Narendra Singh & Sanjay Dutt: संगठन बनते ही बदली कांग्रेस की तस्वीर, एक मंच पर दिखे सभी बड़े नेता
एक दशक से अधिक समय के बाद हरियाणा कांग्रेस गुटबाजी से उबरकर एकजुट नजर आ रही है। नए संगठन और नेतृत्व के साथ पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाया है।
चंडीगढ़: हरियाणा कांग्रेस एक दशक से अधिक लंबे समय के बाद एक नए तेवर में दिख रही है. पिछले एक दशक से ज्यादा लंबे समय तक गुटों में बंटी कांग्रेस एक होती दिख रही है. इसे नए प्रभारी संजय दत्त और नए प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के प्रयास के तौर पर देखें या राहुल गांधी के विजन के तौर पर, यह चर्चा कई स्तर पर हो सकती है, लेकिन संगठन के निर्माण की वजह से भी कांग्रेस बदली हुई दिख रही है. बदले माहौल में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के बहाने ही सही, हरियाणा कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन में जो दम दिखाया. उसके बाद लग रहा है कि हरियाणा कांग्रेस अब नए तेवरों के साथ विपक्ष की भूमिका निभाने की तैयारी में है.
क्या गुटबाजी से बाहर निकल गई हरियाणा कांग्रेस? कभी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आसपास घूमती हरियाणा कांग्रेस अब उनकी परछाई से बाहर आती दिख रही है. जैसे ही एक दशक से ज्यादा वक्त के बाद प्रदेश कांग्रेस का संगठन बना, पार्टी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पकड़ से बाहर आती दिख रही है. कभी हुड्डा, बीरेंद्र सिंह, सैलजा, सुरजेवाला के गुटों की चर्चा अब खत्म होती दिख रही है. क्योंकि पहले गुटबाजी के चलते अलग-अलग चलते पार्टी नेता एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हरियाणा कांग्रेस का प्रदर्शन है.
प्रदर्शन में दिखा संगठन का दम, एक साथ दिखे सभी नेता: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनकी गिरफ्तारी तथा उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए चुनाव संबंधी फैसलों और मतदाता सूचियों में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग को लेकर हरियाणा कांग्रेस ने बीते शुक्रवार को चंडीगढ़ में जोरदार प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में सबसे बड़ी बात यह रही कि लंबे वक्त के बाद हरियाणा कांग्रेस का दम दिखा. इससे पहल पिछले कई सालों में हरियाणा कांग्रेस ने कई प्रदर्शन किए. लेकिन इन सभी प्रदर्शन में जहां संगठन की कमी, पार्टी की गुटबाजी साफ तौर पर कांग्रेस के प्रयासों को कमजोर दिखाते थे.
क्या प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने बदले हालात? दरअसल पिछले एक दशक से ज्यादा वक्त में हरियाणा कांग्रेस अपना संगठन नहीं बना पाई थी, वहीं पार्टी नेताओं के धडों में बनते होने से भी कांग्रेस प्रदेश में कमजोर होती है. जिसका असर यह हुआ कि 2014, 2019 और 2024 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस से आगे रही, लेकिन जैसे ही पार्टी का संगठन करीब एक दशक के बाद बनाने लगा और प्रदेश कांग्रेस को राव नरेंद्र सिंह की अगुवाई मिली और नए प्रभारी संजय दत्त बने तो कांग्रेस के हालात बदलते दिखाई दिए. इन बदलावों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई भी देने लगा है.
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन जारी: कभी बड़ा या लंबा प्रदर्शन करने से चूकती कांग्रेस अब संगठन निर्माण के बाद अपने प्रदर्शनों के जरिए विपक्ष की ताकत को दिखाती हुई नजर आ रही है. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन से इस बात को समझा जा सकता है. कांग्रेस जहां इस प्रदर्शन को बूथ स्तर तक करती दिखाई देती है. वहीं सोमवार को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन किया. इन प्रदर्शनों में पार्टी के विधायक, सांसद और तमाम नेता भी अपने अपने जिलों में मौजूद रहे. खुद प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और प्रभारी संजय दत्त पलवल और गुरुग्राम के प्रदर्शन में शामिल हुए. यानि संगठन के निर्माण का प्रभाव अब हरियाणा में कांग्रेस में दिखाई देने लगा है.
खत्म हुई कांग्रेस की गुटबाजी? हरियाणा कांग्रेस में सबसे बड़ा बदलाव जो वर्तमान में दिखाई दे रहा है, वह है संगठन बनने के बाद हाशिए पर जाते जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की दुखती सक्रियता. जिला और बूथ सत्र पर संगठन निर्माण से अब नेताओं की जवाबदेही बढ़ गई है. इसी का असर यह हुआ है कि अब पहले कई गुटों में बंटी कांग्रेस के नेता पार्टी के झंडे तले अपने अपने समर्थकों को एक साथ ला रहे हैं. यह अब समर्थकों की नारेबाजी में भी साफ झलकता है, पहले गुटों में बंटी कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने अपने नेताओं के नाम के नारे लगाते दिखते थे, लेकिन अब वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के नाम के नारे लगाते दिखते हैं. यह संकेत भविष्य में हरियाणा में कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्कर देगी उसके तौर पर भी देखे जा सकते हैं.
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक? हरियाणा कांग्रेस में आए इस बदलाव को लेकर राजनीतिक मामलों के जानकार धीरेंद्र अवस्थी कहते हैं कि ये मजबूत विपक्ष के लिए एक सकारात्मक संदेश है और सत्ता पक्ष के लिए भी इसमें संदेश साफ दिखाई देता है कि अब किसी भी फैंसले पर उसकी गंभीर विचार करना होगा, वरना विपक्ष उसे बड़ा मुद्दा बनाने से चूकने वाला नहीं है. वे कहते हैं कि हरियाणा कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी संगठन का न होना और गुटबाजी रही. लेकिन अब इसको लेकर पार्टी के उठाए गए कदमों का असर दिखाई देने लगा है.
संगठन निर्माण होते ही जहां कार्यकर्ता जोश में दिखते हैं. वहीं गुटबाजी करने वाले नेता भी अब एक साथ दिखते हैं. जिसका फायदा यह हुआ कि अब पार्टी की आवाज में गंभीरता दिखाई देती है. प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और प्रभारी संजय दत्त संगठन को लेकर जिस तरह की सोच रखते हैं. वह जमीनी स्तर पर दिखाई भी देने लगी है. यह दोनों नेता कार्यकर्ताओं की ताकत को समझते हैं, इनकी प्राथमिकता में कार्यकर्ता सबसे पहले है. यह दिखाई भी देता है. वे कहते हैं कि कांग्रेस में आए इस बदलाव को सकारात्मक माना जा सकता है. जिस कमजोरी की वजह से कांग्रेस तीन बार हरियाणा में चुनाव हारी अब उस कमजोरी को पार्टी खत्म करती दिख रही है.
वहीं हरियाणा कांग्रेस में आ रहे बदलावों को लेकर वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर गुरमीत सिंह कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि हरियाणा में कांग्रेस खत्म हो गई थी. पिछले तीन विधानसभा चुनावों में मिली हार इसलिए नहीं मिली कि कार्यकर्ता पार्टी से दूर ही गए थे. वह इसलिए हुई कि पार्टी का संगठन नहीं बन पाता, नेता अपने अपने गुटों को चलाने लगे, उससे हुआ यह कि कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर अनदेखी का शिकार होते गए और वे पार्टी से दूर होते होते गए, फिर यह हुआ कि कांग्रेस को लगातार तीन बार विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. अब जो बदलाव दिख रहा है वो कार्यकर्ताओं की बदली अप्रोच का नतीजा है.
जब किसी पार्टी का संगठन बन जाता है, तो उसमें खुद ब खुद जान पड़ जाती है. यही कांग्रेस में हुआ है. अब बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर और प्रदेश स्तर तक पार्टी को चेहरे मिल गए हैं. कार्यकर्ताओं की पहुंच भी धीरे-धीरे नेताओं तक मजबूत हो रही है. उनमें भी जो निष्क्रियता लंबे वक्त से बनी हुई थी, अब उसमें भी सांस का संचार हो गया है. जिससे कांग्रेस अब अपना दम दिखाती नजर आ रही है. अब संगठन और पार्टी के प्रदेश स्तर पर संगठन को चलाने वाले नेताओं का कार्यकर्ताओं को लेकर दिख रहा बदलाव, जमीनी स्तर पर दिख रहा है.
प्रोफेसर गुरमीत सिंह ने कहा कि संगठन निर्माण से यह भी हुआ कि अब पार्टी नेताओं की गुटबाजी पर भी लगाम लग गई है. कार्यकर्ता एक छत्र पार्टी के झंडे तले आते दिखाई देते हैं. जिसका फायदा कांग्रेस को मिलता दिख रहा है, और आने वाले वक्त में विपक्ष की मजबूती की तरफ इशारा कर रहा है. वे कहते हैं कि अगर पार्टी गुटबाजी की इसी तरह खत्म करने में कामयाब होती है तो निश्चित तौर पर सत्ता पक्ष के लिए विपक्ष कड़ी चुनौती दे सकता है.