Finance Department: विशेष परिस्थितियों में ही होगा क्यूसीबीएस प्रणाली का उपयोग, वित्त विभाग ने जारी किए आदेश
चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी खरीद और विकास कार्यों में पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ाने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब राज्य में कोई भी सरकारी विभाग मुख्यमंत्री की पूर्व मंजूरी के बिना गुणवत्ता और लागत के आधार पर चयन (QCBS - Quality and Cost-Based Selection) प्रणाली से टेंडर जारी नहीं कर सकेगा। सरकार ने इस प्रणाली के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए इसके उपयोग को सीमित कर दिया है और नए निर्देश जारी किए हैं।
नए नियमों के मुताबिक, अब विभागों को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि किसी विशिष्ट कार्य के लिए क्यूसीबीएस प्रणाली अपनाना क्यों अनिवार्य है। यह नए निर्देश राज्य के सभी सरकारी विभागों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों और अन्य सभी सरकारी खरीद एजेंसियों पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
✍️ विशेष परिस्थितियों में ही होगा उपयोग; प्रशासनिक विभाग के माध्यम से भेजना होगा प्रस्ताव
वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, क्यूसीबीएस प्रणाली का उपयोग अब केवल विशेष और असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकेगा:
-
किन कार्यों के लिए अनुमति: इस प्रणाली का उपयोग केवल उन कार्यों में किया जाएगा, जिनमें अत्यधिक तकनीकी विशेषज्ञता (Technical Expertise), विशिष्ट अनुभव या विशेष परामर्श (Consultancy) सेवाओं की वास्तविक आवश्यकता हो।
-
अनिवार्य मुख्यमंत्री मंजूरी: नई व्यवस्था के तहत संबंधित विभाग को प्रशासनिक विभाग के माध्यम से पूरा प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के पास भेजना होगा और उनकी पूर्व स्वीकृति (Approval) लेनी अनिवार्य होगी। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद ही टेंडर आमंत्रित करने का आधिकारिक नोटिस जारी किया जा सकेगा।
⚙️ क्या होती है क्यूसीबीएस (QCBS) प्रणाली और इसकी प्रक्रिया?
आम तौर पर सरकारी टेंडर सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) को दिए जाते हैं, लेकिन क्यूसीबीएस प्रक्रिया इससे अलग होती है:
-
चयन का आधार: इस प्रक्रिया में कंपनियों या एजेंसियों का चयन केवल सबसे कम कीमत लगाने के आधार पर नहीं होता है। इसमें उनकी तकनीकी योग्यता, पिछला अनुभव, कार्य की गुणवत्ता और वित्तीय प्रस्ताव को निर्धारित अंकों के मानकों के अनुसार परखा और तौला जाता है।
-
कहां पड़ती है जरूरत: स्कूलों, कॉलेजों या विश्वविद्यालयों में किसी विशेष तकनीकी परियोजना, आधुनिक डिजिटल शिक्षा प्रणाली या विशेषज्ञ परामर्श सेवाओं की खरीद में आवश्यकतानुसार इसका उपयोग किया जाता है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर साधारण खरीद या टेंडर में इस पद्धति को अपनाना बिल्कुल जरूरी नहीं है।