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Namo City Urban Development: हरियाणा में बनेगा आधुनिक अर्बन सेंटर, किसान खुद तय करेंगे अपनी जमीन की कीमत

हरियाणा में प्रस्तावित 'नमो सिटी' के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया शुरू। झज्जर, सोनीपत और रोहतक में 9000 एकड़ का लैंड बैंक तैयार होगा।
 

चंडीगढ़ : हरियाणा में भविष्य के शहरी विस्तार को नई दिशा देने वाली प्रस्तावित ‘नमो सिटी’ के लिए जमीन जुटाने की कवायद शुरू हो गई है। सरकार ने झज्जर, सोनीपत और रोहतक जिलों के संबंधित क्षेत्रों में करीब 9000 एकड़ जमीन का लैंड बैंक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए भू-मालिकों को ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से अपनी जमीन सरकार को देने की पेशकश करने का विकल्प दिया गया है। जमीन मालिक 31 अक्टूबर तक अपनी जमीन का विवरण और अपेक्षित कीमत पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।

इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शुरुआत में जमीन का रेट सरकार की ओर से तय नहीं किया जा रहा, बल्कि भू-मालिक अपनी अपेक्षित कीमत स्वयं बताएगा। इसके बाद सरकार संबंधित प्रस्ताव का परीक्षण करेगी और जरूरत के अनुसार जमीन मालिक से कीमत को लेकर बातचीत की जाएगी। दोनों पक्षों में सहमति बनने के बाद ही जमीन अधिग्रहण अथवा खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

पहले जमीन, फिर शहर का नक्शा
नमो सिटी की पूरी परिकल्पना को आकार देने से पहले सरकार का फोकस जमीन उपलब्ध कराने पर है। करीब 9000 एकड़ का लैंड बैंक तैयार होने के बाद यह तय किया जाएगा कि शहर का आवासीय क्षेत्र कहां विकसित होगा, रोजगार और कारोबार के लिए कौन से क्षेत्र निर्धारित होंगे और स्कूल, अस्पताल, बाजार, पार्क तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति क्या होगी। यानी फिलहाल शहर का नक्शा नहीं, जमीन का आधार तैयार किया जा रहा है। जमीन की उपलब्धता स्पष्ट होने के बाद अर्बन प्लानिंग का अगला चरण शुरू होगा। इसके तहत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें विशेषज्ञ एजेंसी की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता लेने की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।

किसान खुद बताएगा जमीन की कीमत
ई-भूमि पोर्टल की व्यवस्था में भू-मालिक सीधे अपनी जमीन की पेशकश कर सकेगा। इसमें जमीन का क्षेत्रफल, स्थान और संबंधित विवरण दर्ज करने के साथ वह यह भी बताएगा कि वह जमीन के बदले कितनी कीमत की अपेक्षा करता है। सरकार इन प्रस्तावों का परीक्षण करेगी। यदि प्रस्तावित कीमत और अन्य शर्तें स्वीकार्य होती हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कीमत में अंतर होने पर बातचीत का रास्ता रहेगा। इस व्यवस्था से सरकार को एक साथ दो महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी—कितने भू-मालिक जमीन देने के इच्छुक हैं और वे किस कीमत की अपेक्षा रखते हैं। इससे जमीन जुटाने की प्रक्रिया को वास्तविक बाजार प्रतिक्रिया के आधार पर आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

तीन जिलों का बेल्ट बनेगा नए अर्बन सेंटर का आधार
झज्जर, सोनीपत और रोहतक का क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के प्रभाव क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। सड़क और रेल कनेक्टिविटी के लिहाज से भी यह बेल्ट महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित नमो सिटी की प्लानिंग में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को अहम आधार बनाए जाने की तैयारी है। शहर के परिवहन ढांचे में आरआरटीएस को मोबिलिटी बैकबोन के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था और शहरी विकास को एक-दूसरे से जोड़ना है। योजना में आवास के साथ रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी जोड़े जाने की दिशा में काम होगा। इससे शहर को केवल रहने की जगह के बजाय रहने और काम करने वाले एकीकृत अर्बन सेंटर के रूप में विकसित करने की सोच सामने आती है।

कॉलोनी नहीं, पूरी सिटी का मॉडल
नमो सिटी की योजना सामान्य रिहायशी कॉलोनी से अलग रखने की तैयारी है। इसमें ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) और मिक्स्ड-यूज प्लानिंग को प्रमुखता दी जा सकती है। इसके तहत सार्वजनिक परिवहन के आसपास आवासीय, व्यावसायिक और अन्य शहरी गतिविधियों को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाएगा। शहर की डिजाइन में ई-वाहन, साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए अलग सुविधाओं पर भी जोर रहेगा। बिजली, पानी, सीवर और दूसरी यूटिलिटी सेवाओं की प्लानिंग शुरुआत से करने का प्रयास होगा। इससे भविष्य में बार-बार सड़कें खोदकर पाइपलाइन और अन्य नेटवर्क डालने की आवश्यकता कम की जा सकेगी।

मनोरंजन, शिक्षा और संस्कृति भी प्लानिंग का हिस्सा
नमो सिटी को केवल मकानों, कार्यालयों और बाजारों तक सीमित रखने की योजना नहीं है। प्रस्तावित मॉडल में बड़े पार्क, खेल क्षेत्र, पिकनिक स्पॉट और लेक जैसी सुविधाओं के लिए भी जगह रखने की परिकल्पना है। इसके अलावा जू, म्यूजियम, आधुनिक लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाओं को भी शहरी डिजाइन का हिस्सा बनाया जा सकता है। वॉकिंग और साइकिल ट्रैक, हरित क्षेत्र तथा बेहतर पब्लिक स्पेस शहर की पहचान का हिस्सा होंगे। इसका उद्देश्य ऐसा शहरी वातावरण तैयार करना है, जहां नागरिकों को मनोरंजन, शिक्षा, संस्कृति, खेल और दैनिक जरूरतों के लिए बार-बार दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।

दिल्ली-एनसीआर के विस्तार को मिल सकता है नया आधार
प्रस्तावित नमो सिटी को दिल्ली-एनसीआर में भविष्य के नियोजित शहरी विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। सेमी-ग्रीनफील्ड और टीओडी आधारित मिक्स्ड-यूज विकास की अवधारणा के तहत शहर में शुरुआत से ही परिवहन, आवास, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश होगी। हालांकि फिलहाल इस परियोजना की सबसे बड़ी कसौटी 9000 एकड़ जमीन की उपलब्धता होगी। 31 अक्टूबर तक ई-भूमि पोर्टल पर कितने भू-मालिक अपनी जमीन की पेशकश करते हैं और उनकी अपेक्षित कीमत क्या रहती है, इससे परियोजना की आगे की दिशा और गति को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट होगी।