Haryana Nasha Mukti Task Force: हर गांव और वार्ड में बनेगी नशा मुक्ति टास्क फोर्स, नशा छोड़ चुके लोगों का होगा पुनर्वास
चंडीगढ़ : हरियाणा में नशे के बढ़ते खतरे पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने अब लड़ाई को गांव और वार्ड स्तर तक ले जाने की तैयारी की है। सरकार की नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के प्रत्येक गांव और शहरी क्षेत्र के हर वार्ड में नशा मुक्ति टास्क फोर्स गठित की जाएगी। गांवों में इसकी कमान सरपंच संभालेंगे, जबकि नगर निगम क्षेत्रों में मेयर और नगर परिषद व नगर पालिका क्षेत्रों में चेयरमैन टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे।
इस पूरी व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन, पुलिस, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही नशे से जूझ रहे लोगों की पहचान, उन्हें उपचार तक पहुंचाने और नशे से बाहर आने के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया को भी निगरानी तंत्र से जोड़ा जाएगा। सरकार नशा मुक्ति मित्र भी बनाएगी, जो अपने-अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ जागरूकता और जरूरतमंदों की मदद में अहम भूमिका निभाएंगे।
पहली बार चार स्तरीय निगरानी तंत्र
नशे के खिलाफ अभियान को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय सरकार ने चार स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था तैयार की है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। जिला स्तर पर उपायुक्त और उपमंडल स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में समितियां काम करेंगी। चौथा और सबसे महत्वपूर्ण स्तर गांव तथा शहरी वार्ड की टास्क फोर्स का होगा।
राज्य स्तरीय समिति में गृह, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, विकास एवं पंचायत, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव सदस्य होंगे। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव तथा दो गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। यह समिति नशीले पदार्थों की मांग कम करने के लिए तैयार राज्य कार्ययोजना की निगरानी करेगी। जागरूकता अभियान, उपचार, पुनर्वास, परामर्श और संबंधित विभागों की क्षमता बढ़ाने जैसे विषय भी इसके दायरे में रहेंगे। राज्य स्तरीय समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही होगी।
जिला स्तर पर हॉटस्पाट की होगी पहचान
जिला मुख्यालय पर उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति में पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, युवा, महिला एवं बाल विकास, ड्रग कंट्रोल तथा सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा दो एनजीओ प्रतिनिधियों और नशे की लत से बाहर निकल चुके चार लोगों को भी समिति का सदस्य बनाया जाएगा। जिला समिति की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। यह नशे के हॉटस्पाट चिन्हित करेगी और स्कूलों, कॉलेजों तथा समुदायों में चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की समीक्षा करेगी। समिति की बैठक हर महीने होगी, जिससे अभियान की प्रगति का लगातार आकलन किया जा सके।उपमंडल स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता वाली समिति जिला समिति के साथ समन्वय करते हुए स्थानीय स्तर पर नशे की समस्या से निपटने के उपायों को आगे बढ़ाएगी।
गांवों में सरपंच की अगुवाई में अभियान
ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच की अध्यक्षता में नशा मुक्ति टास्क फोर्स बनाई जाएगी। इसमें ग्राम सचिव, पुलिस प्रतिनिधि, शिक्षक, पंच, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता, योग प्रशिक्षक, युवा क्लब समन्वयक, वरिष्ठ नागरिक, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि और पूर्व सैनिकों को शामिल किया जाएगा। इससे नशे के खिलाफ अभियान को गांव की सामाजिक संरचना से जोड़ने की कोशिश होगी। ग्रामीण स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने, युवाओं को जागरूक करने और नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार के लिए प्रेरित करने में टास्क फोर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर गठित कमेटी में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे मोहल्लों और कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।
संदिग्ध स्थानों की सूचना पुलिस को देगी टास्क फोर्स
गांव और वार्ड स्तर की टास्क फोर्स को अपने क्षेत्र में नशे की गतिविधियों से जुड़े संदिग्ध या प्रभावित स्थानों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। ऐसी जानकारी संबंधित थाना प्रभारी या चौकी प्रभारी को दी जाएगी।पुलिस की मौजूदगी में जरूरत के अनुसार छापेमारी और विशेष अभियान चलाए जा सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं को प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई से जोड़ना है।टास्क फोर्स नशे का सेवन करने वाले व्यक्तियों की पहचान भी करेगी और ऐसे मामलों की जानकारी उपमंडल समिति को देगी। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को उपचार और परामर्श की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।
72 घंटे में उपचार उपलब्ध कराने का लक्ष्य
सरकार ने नशे की लत से पीड़ित लोगों को केवल कार्रवाई के दायरे में रखने के बजाय उन्हें उपचार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। चिन्हित जरूरतमंद व्यक्तियों को 72 घंटे के भीतर उपचार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।इसमें नशा मुक्ति केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी। नशे की समस्या को बीमारी और सामाजिक चुनौती के रूप में देखते हुए उपचार, परामर्श और परिवार की भागीदारी को अभियान का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
नशे से बाहर आए लोगों के पुनर्वास पर भी नजर
सरकार की योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष नशे से मुक्त हो चुके लोगों को दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ना है। जिला और उपमंडल स्तर की समितियों को ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें कौशल विकास योजनाओं से जोड़ने और रोजगार के अवसरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। पुनर्वास की प्रक्रिया की भी निगरानी होगी, ताकि नशा छोड़ चुके लोग दोबारा उसी वातावरण में न लौटें। जिला स्तर पर गांव, वार्ड और नशा मुक्ति मित्रों की गतिविधियों की समीक्षा भी की जाएगी।
इस तरह हरियाणा में नशे के खिलाफ अभियान को पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़ाकर जागरूकता, उपचार, सामाजिक भागीदारी और पुनर्वास से जोड़ने की कोशिश की गई है। सरकार की नई व्यवस्था का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि गांवों और शहरों में गठित टास्क फोर्स कितनी सक्रियता से काम करती हैं और प्रशासन-पुलिस के साथ उनका समन्वय कितना प्रभावी रहता है।