Haryana Land Pooling Policy 2026: 2000 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन पर मिलेगा कमर्शियल प्लॉट, जानिए नई नीति के सभी नियम
हरियाणा में विकास परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों और भू-मालिकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 'लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026' को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। यह नई नीति वर्ष 2022 की पुरानी नीति का स्थान लेगी। इसके तहत जमीन देने वाले भू-मालिकों को अब सिर्फ एकमुश्त मुआवजे के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे विकास परियोजनाओं में सीधे भागीदार बनेंगे। नई नीति के तहत भू-मालिकों को उनकी भूमि के योगदान के अनुपात में प्रोजेक्ट के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50 प्रतिशत हिस्सा विकसित भूखंड के रूप में दिया जाएगा।
🤝 मुख्यमंत्री नायाब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुए 7 बड़े कैबिनेट फैसले
कैबिनेट बैठक के प्रमुख निर्णय:
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विधानसभा का विशेष सत्र: संविधान दिवस के अवसर पर 26 नवंबर को हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा।
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ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण अनिवार्य: युवाओं को धोखाधड़ी, अवैध विदेश भर्ती, मानव तस्करी और 'डंकी रूट' के खतरों से बचाने के लिए 'हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन नियम, 2026' को मंजूरी दी गई है।
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शिक्षा क्षेत्र में सुधार: जूनियर लेक्चर असिस्टेंट (JLA) की भर्ती एवं पदोन्नति के लिए हरियाणा एजुकेशनल कॉलेज कैडर सेवा नियम, 1986 में संशोधन को स्वीकृति।
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टीडीआर (TDR) नीति में बदलाव: ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स (TDR) प्रमाणपत्रों का उपयोग अब प्रदेश की अन्य कम क्षमता वाली विकास योजनाओं में भी किया जा सकेगा।
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गौवंश संरक्षण के लिए अनुदान: प्रदेश की 629 गौशालाओं को चारे और शेड निर्माण के लिए ₹86.95 करोड़ की सहायता राशि स्वीकृत की गई है।
🏙️ बिक्री योग्य क्षेत्र का 50% हिस्सा मिलेगा किसानों को; बाजार मूल्य से जोड़ने का नियम खत्म
लैंड पूलिंग नीति के तहत जमीन का बंटवारा:
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बराबर की हिस्सेदारी: स्वीकृत लेआउट प्लान के अनुसार कुल बिक्री योग्य क्षेत्र का 50% हिस्सा जमीन देने वाले भू-मालिकों को आवंटित होगा, जबकि शेष 50% हिस्सा विकास एजेंसी के पास रहेगा।
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व्यावसायिक और आवासीय स्थल: भू-मालिकों को उनकी पात्रता के अनुसार आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक (कमर्शियल) भूखंड दिए जाएंगे।
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पुराना प्रावधान समाप्त: नई नीति में 50 प्रतिशत हिस्से को बाजार मूल्य से जोड़ने वाली पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। अब हिस्सेदारी सीधे स्वीकृत लेआउट प्लान के कुल बिक्री योग्य क्षेत्र पर आधारित होगी।
💵 4 साल तक प्रति एकड़ मिलेंगे ₹1 लाख; भुगतान में देरी पर 9% ब्याज का प्रावधान
अंतरिम वित्तीय सहायता और सुरक्षा चक्र:
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वार्षिक सहायता: सेल डीड के पंजीकरण की तारीख से लगातार 4 वर्षों तक किसानों को उनके भूमि योगदान के अनुपात में ₹1 लाख प्रति एकड़ प्रति वर्ष की अंतरिम वित्तीय सहायता दी जाएगी। (1 एकड़ जमीन पर 4 साल में कुल ₹4 लाख)।
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विलंब पर ब्याज: यदि सेल डीड के 15 दिनों के भीतर यह राशि खाते में ट्रांसफर नहीं होती है, तो सरकार भू-मालिक को देरी की अवधि के लिए 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देगी।
⏱️ प्रोजेक्ट पूरा करने की समय-सीमा घटकर हुई 4 साल; काम न होने पर वापस होगी जमीन
परियोजना निष्पादन के सख्त नियम:
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समय-सीमा में कटौती: बुनियादी ढांचे के विकास की समय-सीमा को 5 साल से घटाकर 4 साल कर दिया गया है।
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जमीन वापसी की गारंटी: यदि विकास एजेंसी तय 4 साल की समय-सीमा के भीतर आवश्यक सुविधाओं का विकास पूरा नहीं कर पाती है, तो भू-मालिकों को उनकी जमीन वापस लौटा दी जाएगी।
📐 विकसित भूखंडों का न्यूनतम आकार तय; जानिए किसे मिलेगा कमर्शियल प्लॉट
भूखंड आवंटन का खाका:
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आवासीय भूखंड: न्यूनतम आकार 100 वर्ग मीटर
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औद्योगिक भूखंड: न्यूनतम आकार 250 वर्ग मीटर
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संस्थागत भूखंड: न्यूनतम आकार 500 वर्ग मीटर
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कमर्शियल प्लॉट (2000 वर्ग मीटर से अधिक जमीन पर): जिन भू-मालिकों का योगदान 2,000 वर्ग मीटर से अधिक होगा, उन्हें कियोस्क या बूथ के रूप में कमर्शियल प्लॉट दिया जाएगा।
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छोटे भू-मालिकों को मुआवजा (999 वर्ग मीटर से कम): 999 वर्ग मीटर से कम जमीन देने वालों को प्लॉट के बजाय 'भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013' या संबंधित प्लॉट के रिजर्व प्राइस (जो भी अधिक हो) के आधार पर नगद मुआवजा दिया जाएगा।
🧩 संयुक्त आवेदन की सुविधा, बायबैक अवधि 3 साल और ई-भूमि पोर्टल बाहर
अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत नियम:
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संयुक्त आवेदन: छोटे भू-मालिक अपने लैंड एंटाइटलमेंट सर्टिफिकेट जोड़कर बड़े प्लॉट के लिए संयुक्त आवेदन कर सकेंगे।
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बायबैक अवधि बढ़ी: विकास एजेंसी द्वारा आवंटित भूखंडों को वापस खरीदने (Buyback) की अवधि 1 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है।
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लैंड एग्रीगेटर को 0.5% शुल्क: जमीन एकत्रित करने वाले एग्रीगेटर को कृषि भूमि के कलेक्टर रेट का 0.5% पारिश्रमिक विकास एजेंसी द्वारा दिया जाएगा।
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ई-भूमि पोर्टल बाहर: नई नीति के तहत लैंड पूलिंग के लिए ई-भूमि (E-Bhoomi) पोर्टल के विकल्प को शामिल नहीं किया गया है।