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Haryana News: धान खरीद सीजन में सरकार का बड़ा कदम, 58 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य और डिजिटल निगरानी पर जोर

हरियाणा में खरीफ खरीद सीजन 2026-27 के तहत अब तक 15.52 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीद हो चुकी है। किसानों को 1,221 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

 

चंडीगढ़। हरियाणा में खरीफ खरीद सीजन 2026-27 के दौरान धान की सरकारी खरीद का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश की विभिन्न खरीद एजेंसियों ने अब तक कुल 15.52 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर ली है, जबकि फसल बेचने वाले किसानों के बैंक खातों में 1,221 करोड़ रुपये का सीधा भुगतान किया जा चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्यभर की मंडियों में अब तक कुल 21.27 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। राज्य सरकार ने फसल की खरीद, समय पर उठान और किसानों के भुगतान की प्रक्रिया को और अधिक गति देने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

💰 एमएसपी पर हो रही है फसल की खरीद, 58 लाख मीट्रिक टन धान का रखा गया है बड़ा लक्ष्य

खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने सामान्य श्रेणी के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। प्रदेशभर में निर्धारित 249 मंडियों में सरकारी खरीद का यह दौर 29 सितंबर से शुरू हुआ था, जो आगामी 15 नवंबर तक अनवरत जारी रहेगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार ने जानकारी दी है कि इस सीजन में केंद्र सरकार द्वारा हरियाणा के लिए 58 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके मुकाबले राज्य ने अब तक लगभग 27 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है।

📊 कुरुक्षेत्र और पंचकूला ने मारी बाजी, खरीद और उठान के मामले में जिले रहे सबसे आगे

विभिन्न जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मंडियों में धान की आवक के मुकाबले नीलामी के मामले में कुरुक्षेत्र 88.2 प्रतिशत के साथ पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि यमुनानगर 81.8 प्रतिशत और अंबाला 80.7 प्रतिशत के साथ दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे। इसी तरह नीलामी के मुकाबले धान खरीद के अनुपात में पंचकूला 93.7 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर, कुरुक्षेत्र 92.4 प्रतिशत के साथ दूसरे और कैथल 90.9 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर दर्ज किया गया। इसके अलावा, उठान के मामले में पंचकूला 57.1 प्रतिशत के साथ सबसे आगे बना हुआ है।

💻 डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता पर विशेष जोर, बायोमेट्रिक सत्यापन से हो रहा काम

खरीद प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार डिजिटल तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है। नए ऑनलाइन राइस मिल पंजीकरण पोर्टल के जरिए राज्य में 1,433 चावल मिलों का पंजीकरण किया गया है, जिनमें से 1,215 मिलों का जियो-फेंसिंग आधारित भौतिक सत्यापन भी पूरा हो चुका है। इसके साथ ही, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से अब तक 1,52,136 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मंडियों में किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।