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CM Nayab Saini Leadership: सफाई कर्मचारी हड़ताल से लेकर जीवन कुंडू हत्याकांड तक, सीएम सैनी के हस्तक्षेप से कैसे सुलझे बड़े मामले

हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने कई बड़े विवादों को खुद सुलझाकर विपक्ष के 'डमी सीएम' वाले नैरेटिव को करारा जवाब दिया है।
 

चंडीगढ़: हरियाणा में विपक्ष एक तरफ सीएम नायब सिंह सैनी पर डमी सीएम, दिल्ली से चलने वाला सीएम और पूर्व सीएम मनोहर लाल की छवि से बाहर ना निकलने का आरोप लगा रहा है. दूसरी तरफ सीएम विपक्ष के इन आरोपों का जवाब अपने काम से दे रहे हैं. मौजूदा वक्त में प्रदेश में कई ऐसे विवाद हुए हैं, जिनका समाधान अधिकारी और मंत्री नहीं निकाल पाए, लेकिन जैसे ही वे विवाद सीएम सैनी के दरबार तक पहुंचे. वैसे ही उसका समाधान भी हो गया. ये एक तरह से विपक्ष, जो सीएम पर आरोप लगाता है. उसका जवाब भी माना जा सकता है.

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल: प्रदेश के नगर पालिका सफाई यूनियन और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों की बीते छह अगस्त से 11 सितंबर तक रही हड़ताल से प्रदेश की कई नगर पालिकाओं की सफाई व्यवस्था चरमरा गई थी. वहीं विपक्ष भी उनकी हड़ताल को नैतिक समर्थन देता रहा. इसको लेकर सरकार पर विपक्ष की तरफ से कर्मचारियों की मांगें न मानने के आरोप भी लगते रहे. विपक्ष सरकार की कार्यशैली पर भी इस मामले में सवाल उठता रहा. हालांकि सरकार हर बार इस मसले के समाधान के लिए कर्मचारियों से वार्ता करती रही.

सरकार के दो मंत्रियों ने की भरपूर कोशिश? शहरी विकास मंत्री विपुल गोयल और सामाजिक न्याय मंत्री कृष्ण बेदी ने लगातार सफाई कर्मचारियों से बातचीत की. लेकिन उनके प्रयासों से भी कोई समाधान नहीं निकला. वहीं सरकार ने हड़ताल को लेकर कड़ा रुख भी अपनाया. कई कर्मचारियों को नोटिस भी थमाए. बावजूद इसके हड़ताल का समाधान नहीं निकला. 37 वें दिन 11 सितंबर को सीएम नायब सैनी की मध्यस्थता के बाद हड़ताली कर्मचारियों की सीएम के साथ बैठक हुई. जिसमें कर्मचारियों के तमाम मुद्दों पर बातचीत हुई. सीएम आवास पर हुई इस बैठक के बाद जब सफाई कर्मचारी मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया. साथ ही सीएम नायब सैनी का उनकी मांगों को मानने के लिए धन्यवाद भी किया. यानी हड़ताल का हल सीएम के आवास पर आकर ही निकला.

जीवन कुंडू हत्याकांड का समाधान: चार अगस्त को हुए हिसार के डेयरी संचालक जीवन कुंडू हत्याकांड को लेकर संघर्ष समिति और पुलिस-प्रशासन के बीच करीब दो सप्ताह से गतिरोध चल रहा था. जोकि 17 अगस्त को मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के बाद विवाद खत्म हुआ. इस मामले को शांत करने के लिए प्रशासन ने पूरा जोर लगाया था, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया. वहीं 15 अगस्त को सीएम के कार्यक्रम के दौरान भी स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया था. वहीं जब मामला सीएम नायब सैनी के पास पहुंचा तो उसके बाद यह मामला समाप्त हुआ. पीड़ित को आर्थिक और अन्य जरूरी मदद पर सहमति के बाद परिजनों ने मृतक का अंतिम संस्कार किया था.

गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब विवाद: इससे पहले अंबाला के गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब में बीत सात अगस्त को गुरूपर्व के दौरान खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड और सिख संगत के बीच विवाद हो गया था. मंड पर आरोप लगा था कि उनकी गाड़ी ने कुछ सिख श्रद्धालुओं की टक्कर लगी. जिसके बाद हंगामा इतना बड़ा कि मंड की भीड़ ने जमकर पिटाईंकर दी थी और इस दौरान तोड़फोड़ भी हुई थी. विवाद इतना बढ़ गया था कि 13 अगस्त को सिख संगत ने हाइवे पर जाम लगा दिया था. सिख संगत गुरसिमरन सिंह मंड पर एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तार सिख युवाओं की रिहाई की मांग कर रही थी.

पुलिस और प्रदर्शनकारियों में हुई थी झड़प: इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा था. इसके बाद 19 अगस्त को इस विवाद के हल के लिए हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के 23 प्रतिनिधिमंडल के लोगों ने सीएम से उनके आवास पर बैठक की. जिसमें इस मामले में जिन युवाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी उसको रद्द करने पर सहमति बनी. जेल में बंद युवाओं की रिहाई पर सहमति बनी. वहीं गुरसिमरन सिंह मंड के माफी मांगने के प्रस्ताव के बाद यह विवाद शांत हो गया.

करनाल के बीरू बाल्मीकि हत्याकांड विवाद सुलझाया: बीरू बाल्मीकि हत्याकांड के बाद हर्ष और बीरबल के एनकाउंटर को लेकर रोड समाज में नाराजगी थी. यह मामला भी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ. इन घटनाओं में एक समान बात यह रही कि स्थानीय स्तर पर बढ़ता विवाद सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन रहा था और मुख्यमंत्री ने सीधे बातचीत कर उसे खत्म करने की कोशिश की. मामले की जांच सीएम ने क्राइम ब्रांच को सौंपी थी.

क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार? राजनीतिक मामलों के जानकार धीरेंद्र अवस्थी ने कहा कि "भले ही सीएम नायब सैनी विपक्ष के नैरेटिव (डमी सीएम) को कई बड़े विवादों का समाधान करके तोड़ने में कामयाब हुए हों. शायद बीजेपी का भी यही प्रयास है कि इन सभी विवादों को सीएम आवास पर समाप्त करके संदेश दिया जाए कि नायब सैनी डमी सीएम नहीं है, लेकिन अभी भी कहीं ना कहीं उनके फैसले दिल्ली से प्रभावित दिखते हैं, दिल्ली से मतलब पूर्व सीएम मनोहर लाल अभी भी कहीं ना कहीं इन सभी विषयों के हल होने के पीछे काम करते दिखाई देते हैं. बड़े विवादों का हल सीएम आवास पर निकलने के पीछे लगातार कोशिश है कि जो बात विपक्ष कहता है उस को गलत साबित किया जाए."

इसमें कोई दो राय नहीं है कि पूर्व सीएम मनोहर लाल वर्तमान सीएम नायब सैनी के राजनीतिक गुरु रहे हैं. ऐसे में उनका प्रभाव सरकार में दिखाई देना कोई विपरीत बात नहीं है, लेकिन जिस तरह बीते दिनों सीएम ने प्रदेश में चल रहे बड़े विवादों को निपटाने का काम किया है. वो यही दर्शाता है कि नायब सैनी कहीं ना कहीं अब उस पूर्व की छवि से बाहर निकल रहे हैं. विपक्ष जिस तरह का नैरेटिव उनको लेकर बना रहा है. उसको भी वे अपनी कार्यशैली से समाप्त करते दिखते हैं.

'मंझे हुए खिलाड़ी हैं सीएम': इधर इसी मसले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार राजेश मोदगिल कहते हैं कि "सीएम नायब सैनी लगातार जनता से संपर्क करते रहते हैं. जो उनकी छवि को कहीं ना कहीं अलग बनाता है. हालांकि विपक्ष का काम है कि वो सरकार की कमजोरी पर निशाना साधते रहे. जहां तक बात विपक्ष के नैरेटिव कि है, तो सीएम सैनी अपनी कार्यशैली से उसका जवाब देते दिखते हैं. भले ही विपक्ष उनको डमी सीएम या दिल्ली से चलने वाला सीएम कहता हो, लेकिन जिस तरह से वे प्रदेश के बड़े विवादों को हल करते दिखे हैं, उससे यह इनकार नहीं किया जा सकता कि वे राजनीति के एक मंझे हुए खिलाड़ी बनते जा रहे हैं."