Tehsil Verification Updates: नगर निकायों और तहसीलों के बीच बंटा काम, ऑनलाइन भेजी जाएगी वैध कॉलोनियों की सूची
हरियाणा: राज्य के शहरी निकायों में प्रॉपर्टी आईडी (Property ID) के नाम पर आम जनता को होने वाली परेशानियों और कथित धांधली पर हरियाणा सरकार अब पूरी तरह अंकुश लगाने जा रही है। नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाएं अब केवल संपत्ति से संबंधित बकाया कर (Property Tax) व अन्य देनदारियों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करेंगी। संपत्ति वैध है या अवैध, इसकी वास्तविक जांच और तस्दीक पूर्व की भांति तहसीलों में राजस्व अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी। इस फैसले से उन लाखों लोगों को सीधी राहत मिलेगी, जिन्हें प्रॉपर्टी आईडी में गलतियों और नगर निकायों के चक्कर काटने से जूझना पड़ता था।
🛑 लंबा विवाद होगा खत्म; नगर निकायों की भूमिका बकाया करों की जांच तक सीमित
प्रॉपर्टी आईडी विवाद और नए बदलाव:
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विवाद की मुख्य वजह: प्रदेश में लंबे समय से प्रॉपर्टी आईडी में मालिकाना हक, नाम की वर्तनी और संपत्ति के विवरण में आ रही विसंगतियों के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
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सीमित अधिकार: अब नगर निकायों का काम केवल संपत्ति पर बकाया टैक्स और अन्य नगरीय देनदारियों (Dues) की जांच कर एनओसी जारी करने तक सीमित रहेगा। मालिकाना हक तय करना नगर निकायों का काम नहीं होगा।
🏛️ तहसील में होगी रजिस्ट्री और वैधता की जांच; ऑनलाइन भेजी जाएगी वैध कॉलोनियों की सूची
राजस्व विभाग का नया कार्य तंत्र:
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राजस्व रिकॉर्ड से मिलान: भूमि या मकान की रजिस्ट्री से पहले संपत्ति के मूल दस्तावेजों और सरकारी राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर उसकी कानूनी वैधता की जांच तहसील स्तर पर की जाएगी।
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ऑनलाइन डेटा ट्रांसफर: नए सिस्टम के तहत शहरी स्थानीय निकाय विभाग (ULBD) की ओर से सभी अनुमोदित व वैध कॉलोनियों की सूची ऑनलाइन माध्यम से तहसीलों को भेजी जाएगी। इसके बाद आगे की रजिस्ट्री और नामांतरण (Mutation) का काम तहसील प्रशासन पूरा करेगा।