हरियाणा में विवाहित प्रवासी महिलाओं को नहीं मिलेगा OBC आरक्षण; हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अनुसार आरक्षण 'जन्म' से तय होता है, 'विवाह' से नहीं। दूसरे राज्य से हरियाणा आई महिलाओं को अब OBC कोटे का लाभ नहीं मिलेगा।
चंडीगढ़: हरियाणा में सरकारी नौकरियों और अन्य सरकारी लाभों में आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, दूसरे राज्य से विवाह कर हरियाणा आई महिलाओं को यहाँ पिछड़ा वर्ग (OBC/BC) कोटे का लाभ नहीं दिया जाएगा।
जन्म से तय होगा आरक्षण का अधिकार
अदालत ने अपने हालिया आदेशों में यह स्पष्ट किया है कि आरक्षण का अधिकार 'जन्म' से प्राप्त होता है, न कि 'विवाह' से। यदि कोई महिला किसी अन्य राज्य (जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश या पंजाब) में OBC श्रेणी से संबंध रखती है और उसकी शादी हरियाणा के किसी OBC परिवार में हो जाती है, तो भी वह हरियाणा राज्य की आरक्षण नीति के तहत लाभ पाने की हकदार नहीं होगी।
मुख्य बिंदु जो आपको जानने चाहिए कि आरक्षण के लिए पिता की जाति और उनके मूल निवास को ही मुख्य आधार माना जाएगा। पति की जाति के आधार पर महिला को नई श्रेणी प्राप्त नहीं होगी।भारत के संवैधानिक नियमों के तहत, एक राज्य की पिछड़ी जाति की सूची दूसरे राज्य से भिन्न हो सकती है। इसलिए, एक राज्य का माइग्रेशन (प्रवास) दूसरे राज्य में आरक्षण के लाभ को स्वतः समाप्त कर देता है। ऐसी महिलाएं हरियाणा में किसी भी सरकारी भर्ती या शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश के लिए 'सामान्य श्रेणी' (General Category) के अंतर्गत ही आवेदन कर सकेंगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विवाह के आधार पर आरक्षण दिया जाने लगा, तो इससे मूल राज्य के निवासियों के हकों का हनन होगा। हरियाणा सरकार की नीति के अनुसार, आरक्षण केवल उन लोगों के लिए है जो इस राज्य के मूल निवासी हैं और जिन्होंने यहाँ के सामाजिक पिछड़ेपन को झेला है।
प्रमाणपत्र बनवाने में आएगी दिक्कत
राजस्व विभाग (Revenue Department) के अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि OBC सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 'पैरेंटल साइड' (मायके पक्ष) के दस्तावेजों की जांच अनिवार्य है। यदि मायका हरियाणा से बाहर का है, तो हरियाणा का पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता।