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HAU कृषि मेला 2026: 6 फुट की घीया और 20 किलो का पेठा देख फटी रह गईं आंखें!

हिसार कृषि मेले में छाईं अनोखी फसलें! 6 फुट लंबी घीया, 20 किलो का पेठा और गन्ने के रस की प्राकृतिक कुल्फी बनी आकर्षण का केंद्र। जानें ऑर्गेनिक खेती के सफल मॉडल।

 

हिसार: हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित कृषि मेले में इस बार किसानों की अनोखी फसलें और देसी नवाचार लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे. मेले में विभिन्न राज्यों से आए किसानों ने अपनी उन्नत और प्राकृतिक तरीकों से उगाई गई फसलों का प्रदर्शन किया. खासतौर पर 6 फुट लंबी घीया, 20 किलो तक का पेठा, बड़ी मूली और शलगम ने लोगों को चौंका दिया. इसके साथ ही गन्ने के रस और मावा से बनी कुल्फी की भारी मांग देखने को मिली.

बड़ी घीया और पेठा ने बटोरी सुर्खियां:मेले में पहुंचे किसानों ने अपनी मेहनत और तकनीक से उगाई गई विशाल सब्जियों का प्रदर्शन किया. एक किसान ने बताया, "हमने छह फुट लंबी घीया तैयार की है और गोल घीया का वजन तीन से चार किलो तक पहुंच जाता है." वहीं पेठे की फसल ने भी सबका ध्यान खींचा, जिसका वजन 20 किलो तक बताया गया. इन फसलों को देखकर किसान और आगंतुक दोनों ही काफी उत्साहित नजर आए.

ऑर्गेनिक खेती से बढ़ रहा किसानों का भरोसा: बड़वासनी के किसान जयवीर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि, "मैं पिछले पंद्रह सालों से ऑर्गेनिक खेती कर रहा हूं और इससे मुझे अच्छा फायदा मिला है." उन्होंने शलगम और अन्य सब्जियों की बड़ी और गुणवत्तापूर्ण पैदावार दिखाते हुए बताया कि, "प्राकृतिक तरीकों से खेती करने से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है."

प्राकृतिक खेती से तैयार हो रहे बेहतर बीज: सोनीपत के किसान जोगिंद्र सिंह राणा ने भी प्राकृतिक खेती के लाभ बताए. उन्होंने कहा कि, "हम पिछले तेरह सालों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इस बार मेले में बड़ा पेठा लेकर आए हैं. घीया में पोषण तत्व अधिक होते हैं और इसका जूस स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है. इसका उपयोग दवाइयों में भी होता है.” हम अपने बीज भी खुद तैयार कर रहे हैं और अन्य किसानों को उपलब्ध करवा रहे हैं."

गन्ने की कुल्फी बनी मेले की खास पहचान: इस बार मेले में गन्ने से बनी कुल्फी ने खास पहचान बनाई. हिसार के गांव खरक पूनिया के किसान संजय आर्य ने बताया कि, "हमने गन्ने के रस और मावा से कुल्फी तैयार की है, जो पूरी तरह प्राकृतिक है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. बाजार में मिलने वाली कुल्फी में चीनी का इस्तेमाल होता है, जबकि उनकी कुल्फी में शुद्ध गन्ने का रस प्रयोग किया जाता है."

खेती से व्यवसाय तक का सफल मॉडल: किसान संजय आर्य ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैं पिछले पंद्रह सालों से खेती कर रहा हूं और गन्ने से कुल्फी बनाकर व्यवसाय शुरू किया था, जिससे अब अच्छा मुनाफा कमा रहा हूं. अगर किसान एक एकड़ में गन्ने की खेती कर उसके उत्पादों को प्रोसेस करके बेचें, तो वे अच्छा लाभ कमा सकते हैं."

अनोखी फसलों का प्रदर्शन बना आकर्षण: मेले में अन्य किसानों ने भी अनोखी फसलें प्रदर्शित कीं. बड़वासनी के किसान ने काले आलू और 14 किलो का पेठा उगाकर लोगों को चौंकाया. वहीं, राजस्थान के भादरा से आए किसान 14 किलो का प्याज लेकर पहुंचे. इन किसानों को मेले में विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया.

सतत खेती पर जोर, विशेषज्ञों ने दी सलाह: विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीआर कांबोज ने सतत कृषि के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि, "बदलते जलवायु परिस्थितियों में सतत खेती किसानों की समृद्धि का मजबूत आधार बन रही है. नई तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करें ताकि उत्पादन बढ़े और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे."

सरसों की उन्नत किस्मों से बढ़ रही पैदावार: कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं. सरसों वैज्ञानिकों ने अब तक 25 उन्नत किस्में और एक हाइब्रिड विकसित की है. प्रजनक डॉ. राम अवतार ने बताया कि, "पिछले छह वर्षों में हमने अलग-अलग परिस्थितियों के लिए पांच नई किस्में विकसित की हैं, जिनमें आरएच 725, आरएच 1424 और आरएच 1975 किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं."

कृषि में नवाचार से समृद्धि की ओर बढ़ते कदम: कृषि मेले में प्रदर्शित नवाचार और किसानों के अनुभव यह साबित करते हैं कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के मेल से खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है. प्राकृतिक खेती, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन जैसे उपाय किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.