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World Bank Haryana Deal: हरियाणा में बदलेगा सिंचाई और जल प्रबंधन का नक्शा, 104 नहरों और 620 वाटर कोर्स का होगा कायाकल्प

विश्व बैंक ने हरियाणा सरकार की 5,714.80 करोड़ रुपये की 'जल संरक्षित हरियाणा' परियोजना को मंजूरी दे दी है। जानिए राज्य में जल प्रबंधन और नहरों के विकास की पूरी योजना।

 

चंडीगढ़ :  हरियाणा में लगातार गिरते भूजल स्तर, कृषि में पानी की बढ़ती खपत और जलभराव जैसी चुनौतियों के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार ने जल प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना को विश्व बैंक ने मंजूरी दे दी है। कुल 5,714.80 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 4,000 करोड़ रुपये का ऋण विश्व बैंक उपलब्ध करवाएगा, जबकि 1,714.80 करोड़ रुपये राज्य सरकार अपने संसाधनों से खर्च करेगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी-सी (SFC-C) की बैठक में परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी भी मौजूद रहीं। सरकार का दावा है कि यह परियोजना केवल नहरों की मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सिंचाई व्यवस्था, भूजल संरक्षण, जलभराव की समस्या, फसल विविधीकरण, सूक्ष्म सिंचाई और उपचारित पानी के पुन: उपयोग को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाएगी।

छह साल में चरणबद्ध तरीके से होगा जल प्रबंधन का कायाकल्प
‘जल संरक्षित हरियाणा’ को प्रदेश का फ्लैगशिप एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन कार्यक्रम बताया गया है। इसके तहत वर्ष 2026 से 2032 तक छह वर्षों में विभिन्न कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे। परियोजना के तहत प्रदेश में 15 क्लस्टर बनाए जाएंगे। इन क्लस्टरों का कुल क्षेत्रफल करीब 48.94 लाख एकड़ होगा। यानी राज्य के बड़े कृषि क्षेत्र को सीधे जल प्रबंधन की नई व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और कृषि क्षेत्र को पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। सरकार की कोशिश है कि पानी की प्रत्येक बूंद का अधिकतम उपयोग हो और सिंचाई व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाए।

104 नहरों का होगा पुनर्वास, सिंचाई व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती
परियोजना का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदेश की नहर व्यवस्था के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से 2,484.87 करोड़ रुपये की लागत से 104 नहरों का पुनर्वास किया जाएगा। इन नहरों के पुनर्वास से न केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, बल्कि पानी के वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने और नहरी नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में भी काम होगा।सरकार के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद प्रदेश की नहर प्रणाली में व्यापक सुधार आएगा। दीर्घकालिक लक्ष्य हरियाणा की सभी नहरों का पुनर्वास कर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है।


620 वाटर कोर्स होंगे पुनर्जीवित, लाखों एकड़ को मिलेगा सिंचाई लाभ
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MICADA) के माध्यम से प्रदेश में 620 वाटर कोर्स यानी खालों का पुनरुद्धार किया जाएगा। इससे लगभग 3.18 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों तक पानी पहुंचाने वाली व्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।इसके अलावा 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं भी लागू की जाएंगी। इन परियोजनाओं से करीब 56,830 एकड़ भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। इस पूरी कवायद का उद्देश्य नहरों से उपलब्ध पानी का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना और सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भरता को कम करना है।

दो लाख एकड़ जलभराव वाली जमीन सुधारने का लक्ष्य
हरियाणा के कई हिस्सों में जलभराव खेती के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। इससे जमीन की उत्पादकता प्रभावित होती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के तहत प्रदेश में 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का सुधार किया जाएगा। इससे प्रभावित क्षेत्रों में खेती योग्य जमीन का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा।सरकार का फोकस जल प्रबंधन को केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित रखने के बजाय जमीन, फसल और सिंचाई व्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ने पर है।

पांच लाख एकड़ में डीएसआर, 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण
हरियाणा में धान की खेती के कारण भूजल पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए भी परियोजना में विशेष प्रावधान किया गया है। सरकार 5 लाख एकड़ भूमि पर डीएसआर यानी धान की सीधी बिजाई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी। इसके साथ ही करीब 1.12 लाख एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण को अपनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसका सीधा उद्देश्य धान जैसी अधिक पानी मांगने वाली फसलों पर निर्भरता कम करना और ऐसी फसलों को बढ़ावा देना है जिनमें पानी की खपत अपेक्षाकृत कम हो। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार की जल नीति में यह हिस्सा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि क्षेत्र में पानी की बचत को किसानों की आय और टिकाऊ खेती से जोड़कर देखा जा रहा है।

सात जिलों में 131 नई वाटर बॉडीज, भूजल रिचार्ज पर जोर
भूजल स्तर को सुधारने के लिए भी परियोजना में बड़े पैमाने पर काम प्रस्तावित है। भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा समेत सात जिलों में लगभग 131 नई वाटर बॉडीज बनाई जाएंगी। इन जल निकायों का उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित करना और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है। इससे उन क्षेत्रों में विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है जहां भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

सीवेज के पानी का होगा दोबारा इस्तेमाल
जल संरक्षण की दिशा में सरकार अब उपचारित सीवेज के पानी के पुन: उपयोग पर भी जोर दे रही है। जींद में दो, कैथल में एक और गुरुग्राम के धनवापुर में एक प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इन चार एसटीपी से करीब 28,000 एकड़ क्षेत्र को लाभ मिलने का अनुमान है। इस योजना पर करीब 282.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य साफ पानी की मांग को कम करना और उपचारित पानी को उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करना है।

नायब सैनी सरकार के लिए जल नीति क्यों अहम?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार जल संकट को आने वाली पीढ़ियों की चुनौती के रूप में देख रही है। यही वजह है कि ‘जल संरक्षित हरियाणा’ में नहरों के पुनर्वास से लेकर भूजल रिचार्ज, जलभराव सुधार, सूक्ष्म सिंचाई, डीएसआर और फसल विविधीकरण तक कई मोर्चों को एक साथ जोड़ा गया है। इस परियोजना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हरियाणा की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। ऐसे में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना और साथ ही भूजल का अंधाधुंध दोहन रोकना सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे प्रदेश को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर बताया है। उनके अनुसार परियोजना केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करने वाली योजना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ जल व्यवस्था तैयार करने का प्रयास है।

विश्व बैंक की सराहना से बढ़ी सरकार की जिम्मेदारी
सरकार के अनुसार विश्व बैंक ने इस उपलब्धि के लिए हरियाणा सरकार के नेतृत्व और मार्गदर्शन की सराहना की है। अब चुनौती इस परियोजना को कागज से जमीन पर उतारने की है। यदि निर्धारित समय में परियोजना के सभी घटक प्रभावी ढंग से लागू होते हैं तो हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। नहरों का आधुनिकीकरण, खेतों तक पानी की बेहतर पहुंच, भूजल रिचार्ज, जलभराव वाली जमीन का सुधार और कम पानी वाली खेती को बढ़ावा देने से प्रदेश की जल अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

जल संरक्षण से जल आत्मनिर्भरता तक
‘जल संरक्षित हरियाणा’ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार के लिए महज एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश की जल नीति में बदलाव का प्रयास है। 5,714.80 करोड़ रुपये के निवेश और छह साल की समयसीमा के साथ सरकार ने जल संकट से निपटने का एक व्यापक रोडमैप सामने रखा है।

अब निगाहें इसके क्रियान्वयन पर रहेंगी। यदि नहरों, जल निकायों, सूक्ष्म सिंचाई, डीएसआर और फसल विविधीकरण से जुड़े लक्ष्यों को निर्धारित समय में हासिल किया गया तो हरियाणा न केवल सिंचाई व्यवस्था को मजबूत कर सकेगा, बल्कि भूजल संरक्षण और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में भी एक नई मिसाल कायम कर सकता है।